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वर्जिन साहित्यपीठ: एक अभियान (निःशुल्क ईबुक्स एवं पुस्तक प्रकाशन*)

(आज जब  नामचीन एवं राष्ट्रीय पुरस्कार से पुरुस्कृत लेखकों / सेलेब्रिटीज के अतिरिक्त शेष लेखकों के लिए  पारम्परिक प्रकाशन के द्वार लगभग बन्द हो चुके हैं, ऐसे समय में  स्व-प्रकाशन (Self-Publication) एक बड़े व्यवसाय के रूप में उभरा है। यहाँ तक कि किसी भी  प्रादेशिक एवं राष्ट्रीय  साहित्य /ग्रंथ अकादमी  जैसे संस्थानों  से अपनी पुस्तकें प्रकाशित करना  स्वप्न देखने जैसा है।  ईबुक्स जैसे निःशुल्क प्रकाशन के क्षेत्र में अमेज़न, गूगल प्ले स्टोर आदि विशेष भूमिकाएँ निभा रहे हैं। ऐसे में  श्री ललित कुमार मिश्र  द्वारा  “वर्जिन साहित्यपीठ” जैसी संस्था के माध्यम से  निःशुल्क ईबुक्स एवं पुस्तक प्रकाशन लेखकों के लिए एक अभियान ही नहीं संजीवनी भी है।)

इस यात्रा की शुरुआत से पूर्व इसकी पृष्ठभूमि की चर्चा करना चाहूंगा। उन दिनों कॉलेज में प्रवेश लिया ही था, जब लेखन आरम्भ हुआ। वर्ष था 1993 और लेखन की वजह वही, जो ज्यादातर लेखक मित्रों के लेखन की होती है। करीब एक वर्ष पश्चात वजह के साथ-साथ लेखन भी कहीं गुम हो गया और मैं जीवन की सामान्य धारा में बहने लगा। 20 वर्ष कैसे बीत गए, पता ही नहीं चला।

2015 में कुछ मित्रों की प्रेरणा से पुनः लेखन आरम्भ हुआ। किन्तु, इस लेखन में गति आई उसी वजह के अचानक लौट आने से। दो पुस्तकों की सामग्री तैयार हो चुकी थी। अब प्रश्न था इनके प्रकाशन का। बाहर निकला तो देखा बड़ा जंजाल था। व्यावसायिक प्रकाशक थे वे बिना रुपयों के बात करने को ही तैयार नहीं थे और जो अव्यावसायिक सरकारी प्रकाशक थे उनके नियम ही ऐसे थे कि हम उसमें फिट नहीं हो पा रहे थे। जैसे आयु सीमा इत्यादि। अब इन्हें कौन समझाए कि रचनाकार की अवस्था का ज्ञान उनकी आयु से नहीं बल्कि रचनाओं से होता है। किन्तु मैंने हार नहीं मानी और विकल्प खोजता रहा।

ये संयोग ही था कि मैं प्रकाशन में नौकरी कर रहा था। इसका लाभ यह हुआ कि मैं प्रकाशन की तकनीकी प्रक्रिया में अनजाने में ही सक्षम होता जा रहा था। उस समय मुझे इसका तनिक भी आभास नहीं था कि एक दिन यही ज्ञान और कौशल वर्जिन साहित्यपीठ की नींव में अहम भूमिका निभाएगा। फिर एक दिन अमेज़न किंडल की जानकारी मिली। शुरुआती समस्याओ के बाद आखिरकार उसपर अपनी पुस्तक प्रकाशित करने में सफल हो ही गया। किन्तु मैं यहीं नहीं रुका, अन्य विकल्प भी तलाशता रहा और सफलता भी मिलती गई। इसके पश्चात गूगल और पोथी को भी अपने विकल्पों में शामिल किया। अपनी पुस्तकें प्रकाशित करने के पश्चात एक दिन अचानक खयाल आया कि मेरे जैसे और भी कई लेखक मित्र प्रकाशन हेतु संघर्षरत होंगे तो क्यों न उन तक भी यह लाभ पहुँचाया जाए, उनके संघर्ष को भी विराम दिया जाए ताकि वे भी अपना पूरा ध्यान लेखन पर केंद्रित कर सकें और साथ ही अपनी रचनाओं से कुछ राशि भी अर्जित कर सकें।

कहते हैं न, अपने हिय से जानिए, उनके हिय का बात। तो बस अपने अनुभवों अर्थात जरूरत और समस्याओं के आधार पर योजनाएं बनाता गया और समय के साथ कार्य को बेहतर करने के तरीके भी खोजता रहा। धीरे धीरे मित्र जुड़ते गए और हम सबके सहयोग से आगे बढ़ते गए। जैसे जैसे इसका दायरा बढ़ता गया, वैसे वैसे इसकी पहचान हेतु इसे एक नाम देने की आवश्यकता महसूस हुई। चूँकि मेरी पहचान में मेरी कविता वर्जिन की अहम भूमिका रही, और कहीं न कहीं वर्जिन साहित्यपीठ की नींव में मेरे पहले काव्य संग्रह वर्जिन का भी योगदान रहा, अतः मैंने इसका नाम वर्जिन साहित्यपीठ रख दिया। काव्य संग्रह का योगदान इस तरह कि साहित्यपीठ की योजनाएं की सफलता सुनिश्चित करने के लिए मैंने सभी प्रयोग अपने काव्य संग्रह पर ही किए।

वर्जिन साहित्यपीठ की वर्तमान योजनाओं में प्रमुख हैं:

*निःशुल्क ईबुक प्रकाशन:*

इस हेतु कोई नियम या शर्त नहीं है। आप सीधे अपनी पांडुलिपि की वर्ड फ़ाइल फोटो और परिचय के साथ virginsahityapeeth@gmail.com पर ईमेल कर दीजिए। पहली 10 प्रति की बिक्री से प्राप्त राशि संस्था रखती है और 11वीं प्रति की बिक्री से लेखक मित्र को 70% रॉयल्टी मिलने लगती है।

पारदर्शिता के लिए हम प्रत्येक माह के प्रथम सप्ताह में गूगल और अमेज़न की सेल रिपोर्ट लेखक मित्रों से शेयर करते हैं। लेखक मित्रों की जानकारी के लिए ईबुक्स के लिए ISBN की आवश्यकता नहीं होती है। ईबुक्स की कंपनियाँ स्वयं अपना क्रमांक देते हैं। उदाहरणार्थ अमेज़न अपनी ईबुक्स के लिए ASIN स्वयं प्रदान करता है।

*निःशुल्क पेपरबैक प्रकाशन:*

आपकी ईबुक की 25 प्रति बिकते ही हम उसका पेपरबैक प्रिंट ऑन डिमांड योजना के अंतर्गत प्रकाशित कर देते हैं एवं एक लेखकीय प्रति प्रदान करते हैं। । इस योजना में लेखक को 50% रॉयल्टी प्रदान की जाती है। लेखक को ISBN के लिए अलग से कोई कीमत नहीं चुकानी होती है। ISBN निःशुल्क एवं अनिवार्य है।

पेपरबैक प्रकाशन के अंतर्गत दो योजनाएँ हैं :-

1. प्रिंट ऑन डिमांड – इस योजना के अंतर्गत आप न्यूनतम एक प्रति भी प्रिंट करवा सकते हैं। आपकी पुस्तक इस योजना के तहत हमेशा स्टॉक में रहती है। लेखक कभी भी 1 प्रति से लेकर असंख्य प्रतियाँ ऑनलाइन ऑर्डर कर सकता है।

2. बल्क प्रिंटिंग – इस योजना में आपको आपकी आवश्यकता के अनुसार पुस्तकें प्रकाशित कर प्रदान की जाती है। न्यूनतम 50 प्रतियों का प्रकाशन अनिवार्य है।

आईएसबीएन (ISBN) अब स्वयं प्राप्त करें

कई मित्रों की जिज्ञासा और शंकाओं से ज्ञात हुआ कि कई प्रकाशक ISBN के लिए अलग से रुपये वसूल रहे हैं और जिन मित्रों को ISBN प्रक्रिया की जानकारी नहीं है वे रुपये दे भी रहे हैं जिससे प्रकाशकों की कालाबाज़ारी और बढ़ती जा रही है।
मैं आपको बताना चाहूंगा कि ISBN भारत सरकार निःशुल्क प्रदान करती है और आप स्वयं भी उनकी वेबसाइट पर अपनी आईडी बनाकर स्वरचित पुस्तकों के लिए ISBN प्राप्त कर सकते हैं। उनकी वेबसाइट है http://isbn.gov.in
इस हेतु आपको कोई भी सहयोग की आवश्यकता हो तो आप वर्जिन साहित्यपीठ से सम्पर्क कर सकते हैं।
वर्जिन साहित्यपीठ
9971275250

*आजीवन सदस्यता:*

इस योजना के तहत आप मात्र 3000 रुपये देकर आजीवन सदस्यता ले सकते हैं। इसके लाभ हैं:

  1. आप असंख्य ईबुक निःशुल्क प्रकाशित करवा सकते हैं जबकि अन्य मित्र उनकी ईबुक की न्यूनतम 10 प्रति बिकने पर ही अगली ईबुक निःशुल्क प्रकाशित करवा पाएंगे।
  2. साहित्यपीठ के संपादन में प्रकाशित होने वाली सभी ईबुक की प्रति आजीवन निःशुल्क प्राप्त कर सकेंगे। इस वर्ष काव्य मंजूषा 1 & 2, लघुकथा मंजूषा 1 & 2 तथा लकड़ी की काठी 1 & 2 साहित्यपीठ के संपादन में अब तक प्रकाशित हो चुकी है।
  3. आप आजीवन स्वरचित पुस्तकों का विज्ञापन साहित्यपीठ से तैयार करवा सकेंगे।
  4. यदि आप किसी लेखक को साहित्यपीठ की सदस्यता हेतु प्रेरित करते हैं तो सदस्यता राशि का10% आपको पुरस्कार स्वरूप प्रदान किया जाएगा।
  5. शुल्क वाले आयोजनों में 50% रियायत दी जाएगी

यदि आप भी इस अभियान का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो निःसंकोच संपर्क कीजिए:

वर्जिन साहित्यपीठ

9971275250

(टीप : www.e-abhivyakti.com  में  प्रकाशित उपरोक्त लेख कोई  विज्ञापन नहीं  है। अपितु,  आपको एक अच्छी जानकारी उपलब्ध कराने का प्रयास है।)

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Vijay Tiwari Kislay

भाई ललित मिश्र जी के इस आलेख एवं वार्तालाप से मैं बेहद प्रभावित हुआ।
आपका प्रकाशकीय अनुभव एवं आत्मीयता का निःस्वार्थ लाभ निश्चित रूप से हमें मिलेगा।
ईश्वर आपको यश-कीर्ति प्रदान करे।
-किसलय

ललित मिश्र

प्रणाम किसलय जी

प्रयास करूंगा कि आपका यह अनुभव और बेहतर हो