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प्रख्यात साहित्यकार सुश्री मालती मिश्रा ‘मयन्ती’ जी को पूर्वोत्तर हिन्दी अकादमी, शिलांग द्वारा ‘डॉ. महाराज कृष्ण जैन स्मृति सम्मान’

(यह हमारे लिए गर्व का विषय है कि e-abhivyakti  से सम्बद्ध प्रख्यात साहित्यकार सुश्री मालती मिश्रा ‘मयन्ती’ जी को पूर्वोत्तर हिन्दी अकादमी शिलांग द्वारा ‘डॉ. महाराज कृष्ण जैन स्मृति सम्मान’ से सम्मानित किया गया। हमारे विशेष अनुरोध पर 23वें त्रिदिवसीय राष्ट्रीय हिन्दी विकास सम्मेलन’ के अविस्मरणीय क्षणों को हमारे पाठकों से साझा करने हेतु उनकी रिपोर्ट।)

☆ पूर्वोत्तर हिन्दी अकादमी शिलांग द्वारा  23वें त्रिदिवसीय ‘राष्ट्रीय हिन्दी विकास सम्मेलन’ (24-26 मई 2019) ☆

विगत 24-26 मई 2019 को ‘पूर्वोत्तर हिन्दी अकादमी शिलांग’ द्वारा आयोजित साहित्यिक सम्मेलन में हिस्सा लेने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। दिल्ली से लगभग 2224 किलोमीटर दूर शिलांग जाकर इस सम्मेलन में हिस्सा लेना मेरे लिए बेहद रोचक, ज्ञानवर्धक व यादगार रहा। इस भव्य समारोह में  ‘डॉ० महाराज कृष्ण जैन स्मृति सम्मान’ से सम्मानित होना मेरे जीवन का एक अविस्मरणीय क्षण था

हिन्दी भाषा के विकास की दिशा में अग्रसर ‘पूर्वोत्तर हिन्दी अकादमी शिलांग’ द्वारा मौपट स्थित सीमा सुरक्षा बल (सीसुब) की 11 वीं वाहिनी के सेक्टर मुख्यालय के हॉल में  आयोजित अखिल भारतीय स्तर का 23 वाँ त्रिदिवसीय ‘राष्ट्रीय हिन्दी विकास सम्मेलन’ 24 मई 2019 से प्रारंभ होकर 26 मई 2019 को संपन्न हुआ। इस त्रिदिवसीय कार्यक्रम की समस्त व्यवस्था अकादमी के सचिव डॉ० अकेला भाई के नेतृत्व में किया गया, जिसमें देश के लगभग 18 से 20 राज्यों से लगभग 100 से 120 हिन्दी साहित्यसेवियों, लेखकों, कवियों ने हिस्सा लिया। श्रीमती उर्मि कृष्ण (शुभ तारिका अंबाला छावनी) के निर्देशन तथा अकादमी के अध्यक्ष डॉ. विमल बजाज की अध्यक्षता में इसका सफल आयोजन संपन्न हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि मौपट सेक्टर मुख्यालय के उप महानिरीक्षक श्री अवतार सिंह शाही थे तथा विशिष्ट अतिथि श्री शंकरलाल गोयंका (जीवनराम मुंगी देवी गोयंका चैरिटेबल ट्रस्ट के ट्रस्टी प्रभारी), सीसुब मौपट के समादेष्टा कुलदीप सिंह और समाजसेवी श्री पुरुषोत्तम दास चोखानी की उपस्थिति में तीन दिनों का यह साहित्यिक और पर्यटन का भव्य आयोजन हुआ।

प्रथम दिवस आयोजन हॉल के द्वार पर सभी प्रतिभागियों का वहाँ की परंपरा के अनुसार टीका लगाकर, हाथ में पारंपरिक धागा बाँधकर व पटका (पारंपरिक दुपट्टा) डालकर स्वागत किया गया। अपराह्न तीन बजे दीप प्रज्ज्वलन तथा सरस्वती वंदना के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। मुख्य अतिथि श्री अवतार सिंह शाही ने उपस्थित साहित्यकारों को संबोधित करते हुए कहा कि “जवान मातृभूमि की रक्षा तथा साहित्यकार मातृभाषा व राष्ट्रभाषा के संरक्षण व विकास का कार्य करता है। गैर हिन्दी भाषी क्षेत्र में आयोजित इस सम्मेलन में अगले दो दिनों तक हिन्दी भाषा के विकास के लिए जो मंथन चलने वाला है निश्चय उससे अमृत निकलेगा जो हिन्दी के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करेगा।” उन्होंने देशभर से आए हिन्दी सेवियों के बीच हिस्सा लेने का अवसर प्रदान करने के लिए आभार व्यक्त किया तथा अपनी ओर से पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। अकादमी के अध्यक्ष बजाज जी ने बताया कि उनकी संस्था विगत 29 वर्षों से हिन्दी भाषा के विकास के लिए कार्य कर रही है और इस क्षेत्र में उन्हें काफी सफलता मिली है। कार्यक्रम के दौरान कई पुस्तकों का लोकार्पण किया गया तथा साहित्यकारों को असमिया शॉल, जापी, प्रशस्तिपत्र तथा मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया। देश के विभिन्न क्षेत्रों में हिन्दी भाषा की स्थिति तथा विकास हेतु क्या किया जाना चाहिए इस विषय पर चर्चाएँ तथा देर रात तक विभिन्न क्षेत्रों से आए कवियों का काव्यपाठ हुआ। दूसरे दिन भी कार्यक्रम के दौरान परिचर्चाएँ, काव्यपाठ, साहित्यकारों का सम्मान सांस्कृतिक कार्यक्रम हुआ जिसमें विभिन्न प्रदेशों के पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत किए गए।

तीसरे दिन (रविवार) को पर्यटन शिविर का आयोजन हुआ जिसमें देश भर से आए साहित्यकारों को शिलोंग के एलीफैंट फॉल्स तथा चेरापूंजी के मावसमाई केव, थारखरांग पार्क व ईको पार्क जैसे विभिन्न पर्यटन स्थलों का अवलोकन कराया गया। मेघालय के खासी हिल्स की प्राकृतिक सौंदर्य ने सभी को आकर्षित किया। इस पर्यटन का मुख्य उद्देश्य देश के विभिन्न राज्यों के साहित्यकारों को मेघालय की प्राकृतिक उपलब्धियों और यहाँ की संस्कृति व परंपराओं से परिचित कराना था। कुछ साहित्यकारों ने स्थानीय निवासियों से बातचीत की तथा उनकी दैनिक क्रियाओं, रहन-सहन, खान-पान व परंपराओं की जानकारी प्राप्त की। अकादमी हिन्दी भाषा के विकास के लिए पूरे समर्पण के साथ अग्रसर है, अकादमी के सचिव डॉ० अकेला भाई के अनुसार आयोजन का यह तीसरा दिवस एक प्रदेश के लोगों को दूसरे प्रदेश के लोगों से परिचित करवाता है जिससे दूर-दराज तक पूर्वोत्तर भारत की संस्कृति की पहचान बनती है।

 

मालती मिश्रा ‘मयंती’✍️

 

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मालती मिश्रा

सादर आभार आ० हेमन्त जी

योगेंद्र योगी

हार्दिक शुभकामनाएं