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महाकवि कालीदास कृत मेघदूतम का श्लोकशः हिन्दी पद्यानुवाद : द्वारा प्रो. चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’

☆ “मेघदूतम्” श्लोकशः हिन्दी पद्यानुवाद # मेघदूत ….पूर्वमेघः ॥१.२७॥ ☆

 

विश्रान्तः सन व्रज वननदीतीरजानां निषिञ्चन्न

उद्यानानां नवजलकणैर यूथिकाजाल्कानि

गण्डस्वेदापनयनरुजाक्लान्तकर्णोत्पलानां

चायादानात क्षणपरिचितः पुष्पलावीमुखानाम॥१.२७॥

वन नद पुलिन पर उगे यू्थिकोद्यान

को मित्र विश्रांत हो सींच जाना

दे छांह कुम्हले कमल कर्ण फूली

मलिन मालिनों को मिलन के बहाना

© प्रो. चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’   

A १, विद्युत मण्डल कालोनी, रामपुर, जबलपुर. म.प्र. भारत पिन ४८२००८

≈ ब्लॉग संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडल (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’/श्री जय प्रकाश पाण्डेय ≈

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