॥ श्री रघुवंशम् ॥
॥ महाकवि कालिदास कृत श्री रघुवंशम् महाकाव्य का हिंदी पद्यानुवाद : द्वारा प्रो. चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’॥
☆ “श्री रघुवंशम्” ॥ हिन्दी पद्यानुवाद सर्ग #17 (1 – 5) ॥ ☆
रघुवंश सर्ग : -17
कुश से पाया कुमद ने पुत्र ‘‘अतिथि’’ तब आप्त।
जैसे ब्राह्म मुहूर्त से बुद्धि करे सुख प्राप्त।।1।।
जैसे दोनों अयन रवि से होते हैं शुद्ध।
तैसहि दोनों कुल हुये पाके ‘‘अतिथि’’ प्रबुद्ध।।2।।
योग्य पिता ने अतिथि को पढ़ा कुलोचित पाठ।
करा दिया परिणय उचित कुमारियों के साथ।।3।।
कुश ने पाकर पुत्र को निज सम शूर जितेन्द्रिय।
माना उसका ही है वह युवा रूप एक अन्य।।4।।
निज कुल के अनुरूप कर कुश ने इन्द्र-सहाय।
संहारे दुर्जय असुर, पर गये मारे हाय।।5।।
© प्रो. चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’
A १, विद्युत मण्डल कालोनी, रामपुर, जबलपुर. म.प्र. भारत पिन ४८२००८
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडल (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’/श्री जय प्रकाश पाण्डेय ≈