श्री श्याम खापर्डे
(श्री श्याम खापर्डे जी भारतीय स्टेट बैंक से सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी हैं। आप प्रत्येक सोमवार पढ़ सकते हैं साप्ताहिक स्तम्भ – क्या बात है श्याम जी । आज प्रस्तुत है आपकी एक विचारणीय एवं भावप्रवण कविता “# क्षमा #”)
☆ साप्ताहिक स्तम्भ ☆ क्या बात है श्याम जी # 76 ☆
☆ # क्षमा # ☆
मैंने तुम्हारा दिल
कितनी बार दुखाया है
बहते आंसुओं को
गालों पर सुखाया है
तुम्हारे प्रणय निवेदन को
ठुकराकर
कितनी बार रूलाया है
तुम्हारे निश्चल प्रेम की
सदैव उपेक्षा किया हूँ
संकट की घड़ी में
ना कभी रक्षा किया हूँ
याचक बन तुम मेरे
कदमों में पड़ी रही
पर मैंने ना कभी
भिक्षा दिया हूँ
माना कि तुम बला की
खूबसूरत हो
किसी पुजारी के
मंदिर की मूरत हो
हर कोई यहाँ है
तुम्हारा मतवाला
हर किसी की जैसे
तुम जरूरत हो
पर मुझे तुम्हारे प्रेम की
चाह नहीं है
मेरी तुमसे मिल सकें
ऐसी राह नहीं है
मेरे हृदय में बहुत है
सम्मान तुम्हारा
पर तुम्हें चाहूँ
ऐसा कोई भाव नहीं है
गर हो सके तो
तुम मुझे माफ करना
मेरी गुस्ताखिंयों से
अपना मन साफ करना
समय चक्र के भंवर में
फँसा हुआ हूँ मै
क्षमा कर सको तो बस
मुझे क्षमा करना /
© श्याम खापर्डे
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