श्री जय प्रकाश श्रीवास्तव
(संस्कारधानी के सुप्रसिद्ध एवं अग्रज साहित्यकार श्री जय प्रकाश श्रीवास्तव जी के गीत, नवगीत एवं अनुगीत अपनी मौलिकता के लिए सुप्रसिद्ध हैं। आप प्रत्येक बुधवार को साप्ताहिक स्तम्भ “जय प्रकाश के नवगीत ” के अंतर्गत नवगीत आत्मसात कर सकते हैं। आज प्रस्तुत है आपका एक भावप्रवण एवं विचारणीय नवगीत “कौन है अपना?” ।)
जय प्रकाश के नवगीत # 93 ☆ कौन है अपना? ☆ श्री जय प्रकाश श्रीवास्तव ☆
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चेहरे अब नहीं
पहचान में आते
किसको कह दें
कौन है अपना।
आँख मलते हाथ आई
वेदना केवल
सहमी-सहमी साँस पर
काटते हर पल
डालते नाकामियों पर
शर्म के परदे
किसके भरोसे
छोड़ दें डरना।
हर जगह कुरुक्षेत्र है
महाभारत का
बर्फ सी ठंडी है करुणा
आतंक आफत का
अब नहीं आकाश में
हैं मेघ छाते
फूटता संवेदना का
कोई भी झरना।
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© श्री जय प्रकाश श्रीवास्तव
सम्पर्क : आई.सी. 5, सैनिक सोसायटी शक्ति नगर, जबलपुर, (म.प्र.)
मो.07869193927,
≈संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈