कविराज विजय यशवंत सातपुते
कवितेचा उत्सव # 121 – विजय साहित्य
☆ महाबली हनुमान! ☆ कविराज विजय यशवंत सातपुते ☆
बलभीम वीर। आंजनेय सूत॥
केसरीचा पूत। हनुमान॥१॥
नाशिक हा जिल्हा । अंजिनेरी ग्राम॥
देवभूमी धाम। चिरंतन॥२॥
शक्ती सिद्धी युक्त। घेतलीसे धाव ॥
इंद्रवज्र घाव। हनुवटी॥३॥
शेंदूर नी तेल। रूई फुले पाने ॥
मंदिर घोषाने। निनादले॥४॥
शाप मिळालेला। विसर शक्तीचा॥
व्यासंग भक्तीचा। रामनामी ॥५॥
घडे रामभेट। शब्द चिरंजीव॥
दासभक्ती नीव । हनुमंत ॥६॥
जांबुवंत कृपे। परतली शक्ती॥
रामनामी भक्ती। स्थिरावली॥७॥
सीता शोध कार्य। झाला अग्रेसर ॥
रावणाचे घर। पेटविले॥८॥
जानकीचा शोध। वायुपुत्र घेई॥
संदेश तो देई। राघवासी॥९॥
जिथे जिथे राम। तिथे हनुमान॥
भक्ती शक्ती वाण। अलौकिक॥१०॥
चातुर्य नी शौर्य। पराक्रम गाथा॥
लीन होई माथा। बजरंगी॥११॥
मारुतीचे स्तोत्र। भीमरुपी पाठ॥
महारूद्र वाट। फलदायी॥१२॥
संकट मोचन। बल उपासना॥
समर्थ प्रेरणा। रामदासी॥१३॥
बजरंग बली। उपासना मंत्र॥
यशदायी तंत्र। हनुमंत॥१४॥
चिरंजीवी दास। देव पंचमुखी॥
रामनाम मुखी। अव्याहत॥१५॥
कविराज शब्दी। वर्णाया मारुती॥
द्यावी अनुभूती। रामराया॥१६॥
© कविराज विजय यशवंत सातपुते
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≈संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडळ (मराठी) – श्रीमती उज्ज्वला केळकर/श्री सुहास रघुनाथ पंडित /सौ. मंजुषा मुळे/सौ. गौरी गाडेकर≈