श्री राजेश सिंह ‘श्रेयस’
☆ आलेख ☆ संत रविदास जयन्ती विशेष – महान संत गुरु रविदास ☆ श्री राजेश सिंह ‘श्रेयस’ ☆
(भारतीय संत परम्परा के महान संत गुरु रविदास की जन्म जयंती पर विशेष.)
राम शब्द की महिमा जिस किसी भी अर्थ में कही जाए, राम नाम को जिस भी रूप में स्मरण किया जाये सर्वथा पुण्य फलदायी है, क्योंकि राम शब्द स्वयं साकार स्वरूप में मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम एवं निराकार स्वरूप में परम ब्रह्म है l
इस शब्द विशेष को कोई भी संत अलग होना नहीं चाहता , चाहे वह अध्यात्म के किसी भी मत या परम्परा से सम्बन्ध रखता हो, क्योंकि राम शब्द समाज में प्रेम, भाई चारा, अनुराग पैदा करने वाला एवं एक दूसरे को जोड़ने वाला महामंत्र है l
सगुन उपासक तुलसी के राम, निर्गुण उपासक कबीर के राम रामानंद के शिष्य रविदास के राम, भारतीय जनमानस श्वासो में रमने वाले राम के नाम की ही महिमा अपरंपार है l यानी राम नाम निराकार – साकार, ब्रह्म के दोनों स्वरूपों में रमण करने वाला सद्मार्ग प्रदान करने वाला महा मन्त्र है l
आज माघ माह की पूर्णिमा तिथि है l भारतीय सनातन संस्कृति में इस तिथि का बहुत बड़ा महत्व है l माघ मास की पूर्णिमा को मां गंगा की गोद में डुबकी लगाने यानि गंगा स्नान करने का विशेष महत्त्व है l आस्थावान संत, महात्मा, ऋषि, गृहस्थ, सबके सब इस पूर्ण को प्राप्त करना चाहते हैं l
दूसरी ओर इसी पावन तिथि को ज्ञान गंगा की पावन नगरी काशी में संत रविदास का जन्म होता है जो अपनी निर्मल भक्ति के दम पर माँ गंगा को अपनी कठोता में लाने का सामर्थ्य रखते हैं (मन चंगा तो कठोती में गंगा)l
गंगा और राम किसी न किसी रूप में इन संतो के पास सदैव ही विद्यमान रहती हैं l
भारत की सांस्कृतिक राजधानी, एक से एक विद्वान् एवं महान संतों को जन्म देने वाली काशी ने हर एक कालखंड में न सिर्फ एक से एक महान संतों का जन्म दिया है, बल्कि अनेकों विचारों को भी जन्म दिया है l लेकिन विशेष बात यह है कि ये सारे विचार राम नाम महामंत्र का आश्रय पाकर स्वयं को धन्य करते हैं l
इन्हीं काशी के संतो में संत रविदास का जन्म भी माघ मास की पूर्णिमा को काशी की पावन भूमि में होता है l इस महान संत के जन्म से काशी एक बार पुनः धन्य होती है l
जिस तिथि को लाखों लाखों लोग गंगा के पावन जल में डुबकी लगा रहे होते हैं, परम पुण्य को प्राप्त कर रहे होते हैं, काशी इसी तिथि को एक और संत को जन्म देकर पुनः अपने वैभव के एक और पायदान को प्राप्त कर आगे बढ़ रही होती है l
काशी के संत रामानंद के बारह शिष्यों की कड़ी में संत रविदास का नाम भी शुमार होता है l इसके साथ ही काशी की गुरु -शिष्य परंपरा और अधिक पुष्ट होती है l
बौद्धिक, वैदिक, आध्यात्मिक ज्ञान का अर्जन करना और अपने ज्ञान को अपने शिष्यों तक पहुंचाना, गुरु -शिष्य परंपरा की सर्वोच्च सिद्धि और उपलब्धि है l
मेवाड़ की महारानी एवं श्री कृष्ण की भक्तिन मीरा बाई को भी गुरु की तलाश है l काशी जो स्वयं आदि योगी गुरु श्रेष्ठ शिव की स्वयं की नगरी है l इस पावन ज्ञान नगरी में अपने गुरु की तलाश करती हुई मेवाड की रानी कृष्ण के प्रेम की दीवानी मीरा का आगमन होता है l
फिर क्या कृष्ण भक्त मीरा को गुरु रूप में संत रविदास का आशीर्वाद प्राप्त होता है l जीवन भर कृष्ण की उपासना करने वाली मीरा को गुरु मंत्र के रूप में वही रा – म युगल अक्षर की सन्धि निकला हुआ नाम राम अपने गुरु से प्राप्त होता है l
फिर मीरा के मुख से एक पद गुरु के मुख से निकली हुई ब्रह्म वाणी कुछ इस रूप में स्फूटित होती है –
“पायो जी मैंने राम रतन धन पायो l
वस्तु अमोलिक दी मेरे सतगुरु
किरपा करि अपनायो।|
पायो जी मैंने…
भारतीय संत परंपरा के ऐसे महान संत गुरु रविदास जी की जन्म जयंती के पावन अवसर पर आप सभी को हार्दिक बधाई देता हूँ l
बाबा भोले की काशी को नमन करता हूँ l गंगा मैया का वंदन करता हूँ l
***
© श्री राजेश कुमार सिंह “श्रेयस”
कवि, लेखक, समीक्षक
लखनऊ, उप्र, (भारत )
≈संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈