सौ. सुजाता काळे
(सौ. सुजाता काळे जी मराठी एवं हिन्दी की काव्य एवं गद्य विधा की सशक्त हस्ताक्षर हैं। वे महाराष्ट्र के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल कोहरे के आँचल – पंचगणी से ताल्लुक रखती हैं। उनके साहित्य में मानवीय संवेदनाओं के साथ प्रकृतिक सौन्दर्य की छवि स्पष्ट दिखाई देती है। आज प्रस्तुत है सौ. सुजाता काळे जी द्वारा रचित एक अतिसुन्दर भावप्रवण कविता “अभी भी…”। )
☆ कोहरे के आँचल से # अभी भी… ☆ सौ. सुजाता काळे ☆
अभी भी आसपास तेरी साँस है,
अभी भी आसपास तेरा अहसास है।
गर शुष्क सभी लता, फूल, हुए हैं,
गर शुष्क सभी मेरे आँसू हुए हैं ।
अभी भी सावन का मन में मास है।
तुम्हे याद करके गला रूंधता है,
और एक तारा नभ से टूटता है।
फिर भी अभी एक बाकी आस है।
अभी भी आसपास तेरा आभास है।
अभी भी आसपास तेरी आस है।
© सुजाता काळे
28/2/22
पंचगणी, महाराष्ट्र, मोबाईल 9975577684