॥ श्री रघुवंशम् ॥
॥ महाकवि कालिदास कृत श्री रघुवंशम् महाकाव्य का हिंदी पद्यानुवाद : द्वारा प्रो. चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’॥
☆ “श्री रघुवंशम्” ॥ हिन्दी पद्यानुवाद सर्ग #15 (86 – 90) ॥ ☆
रघुवंश सर्ग : -15
यज्ञ पूर्ण कर विदा कर ऋषि और अतिथि तमाम।
पुत्र केन्द्रित प्रेम रख विवश रह गये राम।।86।।
युधाजित की विनय पर सिंधु देश का राज्य।
दिया राम ने भरत को सहित प्रेम अविभाज्य।।87।।
जीत वहाँ गन्धर्वों को दे वीणा और गान।
भरत प्रभावी नृपति बन जीत सके सम्मान।।88।।
तक्ष और पुष्कल सुतों को दे अपना राज्य।
भरत लौट आये पुनः भ्रात राम के पास।।89अ।।
तक्षशिला और पुष्पपुर थी उनके आवास।
जो दोनों हुई बाद में उन्हीं नाम से ख्यात।।89ब।।
रामाज्ञा से लखन ने बना दिया निज हाथ।
अंगद व चंद्रकेतु को कारापथ का नाथ।।90।।
© प्रो. चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’
A १, विद्युत मण्डल कालोनी, रामपुर, जबलपुर. म.प्र. भारत पिन ४८२००८
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडल (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’/श्री जय प्रकाश पाण्डेय ≈