॥ श्री रघुवंशम् ॥
॥ महाकवि कालिदास कृत श्री रघुवंशम् महाकाव्य का हिंदी पद्यानुवाद : द्वारा प्रो. चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’॥
☆ “श्री रघुवंशम्” ॥ हिन्दी पद्यानुवाद सर्ग #15 (91 – 95) ॥ ☆
रघुवंश सर्ग : -15
यों उन चारों बंधु ने पुत्रों को दे राज।
किया दिवंगत जननियों के तर्पण और श्राद्ध।।91।।
तब आ मुनि के वेश में राम निकट यमराज।
कहा जो देखे हमें कोई, उसे आप दें त्याग।।92।।
कहा राम ने ‘‘हो तथा’’। प्रकट हुये यमराज।
ब्रह्मा का आदेश है चलें स्वर्ग महराज।।93।।
लक्ष्मण ने सुन बात यह दुर्वासा भय त्रस्त।
जो दर्शन हितराम के की सब बात निरस्त।।94।।
योगी लक्ष्मण ने किया सरयू तट तन त्याग।
राम प्रतिज्ञा को किया मन से खुद चरितार्थ।।95।।
© प्रो. चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’
A १, विद्युत मण्डल कालोनी, रामपुर, जबलपुर. म.प्र. भारत पिन ४८२००८
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडल (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’/श्री जय प्रकाश पाण्डेय ≈