श्री यशोवर्धन पाठक
☆ सुमित्र जी द्वारा रचित देवी गीत – “अम्बे कहूँ, जगदम्बे कहूँ” ☆ चर्चा – श्री यशोवर्धन पाठक ☆
स्मृतिशेष डा. राजकुमार तिवारी ‘सुमित्र’
सुप्रसिद्ध साहित्यकार श्रद्धेय डा. राजकुमार तिवारी जी सुमित्र ने साहित्यिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों पर काफी पठनीय और प्रभावी सृजन किया है जो कि सराहनीय भी है और स्मरणीय भी। इसी दिशा में सुमित्र जी ने धार्मिक आध्यात्मिक क्षेत्र के अन्तर्गत अनेक पुस्तकों और पुस्तिकाओं की रचना की जिसमें देवी देवताओं की आराधना में ऐसे श्रेष्ठ गीतों का भी सृजन किया है जिसका कि मधुर और मनमोहक ढंग से गायन किया जा सकता है।
देवी आराधना में सुमित्र जी की ऐसी ही एक लघु कृति है अम्बे कहूँ, जगदम्बे कहूँ, जो कि देवी भक्तों के मध्य काफी चर्चित हुई और इस कृति में शामिल गीतों को धार्मिक क्षेत्र में न केवल लोगों ने पसंद किया है बल्कि धार्मिक आयोजनों में मधुरता के साथ गाया भी गया।
सुमित्र जी के इस देवी गीत संग्रह में 29 देवी भक्ति गीत शामिल हैं जिनमें अम्बे कहूँ, जगदम्बे कहूँ, घंटा बोले, ओ मैहर वाली माँ, ओ माँ, दर्शन से सब कुछ मिलता है, भरे नयन में नीर, माता है सबकी हितकारी, माँ तू थोड़ा प्यार दे, जग वंदित तेरे चरण, मातृ वंदना, विश्व देवि नमामि, सर्व समर्थ माँ जैसे मीठे गीतों से संग्रह बहुत अच्छा बन पड़ा है।
पाथेय प्रकाशन से प्रकाशित इस लघु पुस्तिका के संयोजक श्री राजेश पाठक प्रवीण कहते हैं कि श्री सुमित्र जी का भक्ति भाव प्रेरक और प्रणम्य है।
आज सुमित्र जी हमारे बीच नहीं है लेकिन उनके द्वारा रचित यह देवी गीत संग्रह हम सबको भक्ति भाव के लिए सदा प्रेरित करता रहेगा।
चर्चाकार… श्री यशोवर्धन पाठक
मो – ९४०७०५९७५२
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडल – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈
जी चाचा जी बेहतरीन देवी गीत हैं
सादर नमन पिताजी को