प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’ 

(आज प्रस्तुत है गुरुवर प्रोफ. श्री चित्र भूषण श्रीवास्तव जी  की  वर्ष 2021 के आगमन के अवसर पर एक भावप्रवण कविता  “नव वर्ष तुम्हारा अभिनंदन।  हमारे प्रबुद्ध पाठक गण  प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’ जी  काव्य रचनाओं को प्रत्येक शनिवार आत्मसात कर सकेंगे।  ) 

☆ साप्ताहिक स्तम्भ ☆ काव्य धारा # 22 ☆

☆ नव वर्ष तुम्हारा अभिनंदन 

सदियों से जग करता आया नववर्ष तुम्हारा अभिनंदन

नई आशा ले करता आया पूजन आराधन विनत नमन

सबके मन में है उत्सुकता नववर्ष तुम्हारे आने की

सुख प्रद नवीनता की खुशियां अपने संग संग में लाने की

आओ दे जाओ नवल दृष्टि इस जग में रहने वालों को

बेमतलब छोटे स्वार्थो हित आपस में उलझने वालों को

आओ लेकर नूतन प्रकाश इस जग को स्वर्ग बनाने को

जो दीन दुखी शोषित वंचित उन सब को सुखी बनाने को

आवश्यक लगता, हो परिवर्तन जन मन के सोच विचारों में

विद्वेश ना हो सद्भाव बढे आपस के सब व्यवहारों में

उन्नति हो सबको मिले सफलता सब शुभ कारोबारों  में

आनंद दायिनी खबरें ही पढ़ने को मिले अखबारों में

जो कामनाएं पूरी न हुई उनको अब नव आकाश मिले

जो बंद अंधेरे कमरे हैं उनको सुखदाई प्रकाश मिले

जो विजय न पाए उनके माथे पर विजय का हो चंदन

सब जग को सुखप्रद शांति मिले नववर्ष तुम्हारा अभिनंदन

 

© प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’ 

ए १ ,विद्युत मण्डल कालोनी , रामपुर , जबलपुर

vivek1959@yahoo.co.in

 ब्लॉग संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडल (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’/श्री जय प्रकाश पाण्डेय  ≈

0 0 votes
Article Rating

Please share your Post !

Shares
Subscribe
Notify of
guest


0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments