आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’

(आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ जी संस्कारधानी जबलपुर के सुप्रसिद्ध साहित्यकार हैं। आपको आपकी बुआ श्री महीयसी महादेवी वर्मा जी से साहित्यिक विधा विरासत में प्राप्त हुई है । आपके द्वारा रचित साहित्य में प्रमुख हैं पुस्तकें- कलम के देव, लोकतंत्र का मकबरा, मीत मेरे, भूकंप के साथ जीना सीखें, समय्जयी साहित्यकार भगवत प्रसाद मिश्रा ‘नियाज़’, काल है संक्रांति का, सड़क पर आदि।  संपादन -८ पुस्तकें ६ पत्रिकाएँ अनेक संकलन। आप प्रत्येक सप्ताह रविवार को  “साप्ताहिक स्तम्भ – सलिल प्रवाह” के अंतर्गत आपकी रचनाएँ आत्मसात कर सकेंगे। आज प्रस्तुत है आचार्य जी द्वारा रचित  ‘गीतः श्रद्धा ने … । )

☆ साप्ताहिक स्तम्भ – सलिल प्रवाह # 67 ☆ 

☆ गीतः श्रद्धा ने …  ☆ 

*

अहा! कहा ज्यों ही श्रद्धा से

श्रद्धा ने रवि लजा गया।

नेह-नर्मदा अरुणाई से

बिन बोले ही सजा गया।

*

सांध्य सुंदरी क्रीड़ा करती, हाथ न छोड़े दोपहरी।

निशा निमंत्रण लिए खड़ी है, वसुधा की है प्रीत खरी।

टेर प्रतीचि संदेसा भेजे

मिलनातुर मन कहाँ गया?

अहा! कहा ज्यों ही श्रद्धा से

श्रद्धा ने रवि लजा गया।

*

बंजर रही न; हुई उर्वरा, कृपण कल्पना विहँस उदार।

नयन नयन से मिले झुके उठ, फिर-फिर फिरकर रहे निहार।

फिरकी जैसे नचें पुतलियाँ

पुतली बाँका बन गया। 

अहा! कहा ज्यों ही श्रद्धा से

श्रद्धा ने रवि लजा गया।

*

अस्त त्रस्त सन्यस्त न पल भर, उदित मुदित फिर आएगा।

अनकहनी कह-कहकर भरमा, स्वप्न नए दिखलाएगा।

सहस किरण-कर में बाँधे

भुजपाश पहन पहना गया।

अहा! कहा ज्यों ही श्रद्धा से

श्रद्धा ने रवि लजा गया।

*

कलरव की शहनाई गूँजी, पर्ण नाचते ठुमक-ठुमक।

छेड़ें लहर सालियाँ मिलकर, शिला हेरतीं हुमक-हुमक।

सहबाला शशि सँकुच छिप रहा,

सखियों के मन भा गया।

अहा! कहा ज्यों ही श्रद्धा से

श्रद्धा ने रवि लजा गया।

*

मिलन-विरह की आँख मिचौली, खेल-खेल मन कब थकता।

आस बने विश्वास हास तब ख़ास अधर पर आ सजता।

जीवन जी मत नाहक भरमा

खुद को खो खुद पा गया।

अहा! कहा ज्यों ही श्रद्धा से

श्रद्धा ने रवि लजा गया।

*

©  आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’

संपर्क: विश्ववाणी हिंदी संस्थान, ४०१ विजय अपार्टमेंट, नेपियर टाउन, जबलपुर ४८२००१,

चलभाष: ९४२५१८३२४४  ईमेल: [email protected]

 संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडल (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’/श्री जय प्रकाश पाण्डेय ≈

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