श्री एस के कपूर “श्री हंस”
☆ “श्री हंस” साहित्य # 139 ☆
☆ गीत – ।।आज के नौनिहाल कल के कर्णधार होते हैं।। ☆ श्री एस के कपूर “श्री हंस” ☆
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बच्चों बचपन में प्रभु का वास होता है।
मासूमियत में ईश्वर का आभास होता है।।
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मन के सच्चे और मिट्टी से कच्चे होते हैं।
जिस राह चलाओ उधर ही बच्चे होते हैं।।
बच्चों के ह्रदय चंचलता का निवास होता है।
बच्चों बचपन में प्रभु का वास होता है।।
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बचपन से ही सिखाना है बातें अच्छी- अच्छी।
नींव बनाना है उनकी शुरू से ही सच्ची-सच्ची।।
बच्चे नौनिहाल कर्णधार निश्चल लिबास होता है।
बच्चों बचपन में प्रभु का वास होता है।।
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आज की जरूरत कि मोबाइल से बचाना है।
बच्चों को संस्कार संस्कृति सिखाना है।।
बड़ों से सीखते अच्छे बुरे का अहसास होता है।
बच्चों बचपन में प्रभु का वास होता है।।
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© एस के कपूर “श्री हंस”
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