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हिन्दी साहित्य – व्यंग्य – जिनगी का यो यो बीप टेस्ट – श्री शांतिलाल जैन 

श्री शांतिलाल जैन  जिनगी का यो यो बीप टेस्ट (आदरणीय श्री शांतिलाल जैन जी का यह व्यंग्य कुछ समय पूर्व सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा था। सम्पूर्ण व्यंग्य मात्र एक पोस्ट की तरह जिसमें  कहीं भी उनके नाम का उल्लेख नहीं था। जब यह व्यंग्य उन्होने मुझे भेजा और मैंने इस सच्चाई से उन्हें अवगत कराया तो बड़ा ही निश्छल एवं निष्कपट उत्तर मिला - "मैंने इन चीजों पर कभी ध्यान नहीं दिया। लिखा, कहीं छप गया तो ठीक, फिर अगले काम में लग गए।" उनके इस उत्तर पर मैं निःशब्द हूँ, किन्तु ,मेरा मानना है की हम सबको सबके कार्य और नाम को यथेष्ट सम्मान देना चाहिए।) “हलो अम्मा, हम गोपाल बोल रहा हूँ…..परणाम......हम ठीक हूँ अम्मा...वारंगल आ गया हूँ….काहे ? काहे क्या अम्मा, हम बताये था ना आपको... हम ‘यो यो टेस्टवा’ पास कर रहे हैं. का बतायें अम्मा.....जिनगी के खेल में बने रहना है तो यो यो टेस्टवा तो पास करना ही पड़ेगा ना... का है कि फेल...
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योग-साधना LifeSkills/जीवन कौशल-Shinrin-yoku/Forest Bathing 1–Shri Jagat Singh Bisht

Shinrin-yoku/Forest Bathing-1 Shri Jagat Singh Bisht (Master Teacher: Happiness & Well-Being, Laughter Yoga Master Trainer, Author, Blogger, Educator and Speaker.)   (An informative series on Shinrin-yoku from LifeSkills will be definitely an awesome experience. The term Shinrin-yoku was coined in Japan in the 1980s.) LifeSkills brings to you a beautiful series of creatives based on scientific research on the Japanese Art and Science of SHINRIN-YOKU Forest Bathing/ Forest Therapy: Forest baths are gentle walks that support well-being through sensory immersion in forests and other naturally healing environments. HOW TREES CAN HELP YOU FIND HEALTH AND HAPPINESS. Be happy! LifeSkills Courtesy – Shri Jagat Singh Bisht, LifeSkills, Indore ...
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हिन्दी साहित्य – व्यंग्य – एक बहके बुजुर्ग का संकट – डॉ कुन्दन सिंह परिहार

डॉ कुन्दन सिंह परिहार एक बहके बुजुर्ग का संकट (वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. कुन्दन सिंह परिहार जी विगत पाँच दशक से भी अधिक समय से साहित्य सेवा के लिए समर्पित हैं।  चालीस वर्ष तक महाविद्यालयीन अध्यापन के बाद 2001 में जबलपुर के गोविन्द राम सेकसरिया अर्थ-वाणिज्य महाविद्यालय के प्राचार्य पद से सेवानिवृत्त। आप म.प्र. हिन्दी  साहित्य सम्मेलन के वागीश्वरी पुरस्कार एवं राजस्थान पत्रिका के सृजनशीलता सम्मान से सम्मानित हैं।  आपके  पाँच कथा संग्रह एवं दो व्यंग्य संग्रह  प्रकाशित हो चुके हैं।  साथ  ही  200  से अधिक कहानियाँ एवं लगभग इतने ही व्यंग्य विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। e-abhivyakti में हम आपके इस प्रथम व्यंग्य को प्रकाशित कर गौरवान्वित अनुभव कर रहे हैं एवं भविष्य में भी साहित्यिक सहयोग की अपेक्षा करते हैं।)  बब्बू भाई करीब पैंतीस साल की शानदार सेवा करके दफ्तर से बाइज़्ज़त और बेदाग़ रिटायर हो गये। रिटायर होने के बाद ज्यादातर रिटायर्ड लोगों की तरह न घर के रहे, न घाट के। रोज सवाल मुँह बाये खड़ा हो जाता कि कहाँ जायें...
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योग-साधना LifeSkills/जीवन कौशल-33 –Shri Jagat Singh Bisht

Shri Jagat Singh Bisht (Master Teacher: Happiness & Well-Being, Laughter Yoga Master Trainer, Author, Blogger, Educator and Speaker.) LifeSkills is a pathway to authentic happiness and a meaningful life. It will increase your well-being and help you flourish! LifeSkills Courtesy – Shri Jagat Singh Bisht, LifeSkills, Indore...
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हिन्दी साहित्य- कविता – ‘दिल्ली’ – डॉ गंगाप्रसाद शर्मा ‘गुणशेखर’

डॉ गंगाप्रसाद शर्मा ‘गुणशेखर’  (डॉ गंगाप्रसाद शर्मा ‘गुणशेखर’ पूर्व प्रोफेसर (हिन्दी) क्वाङ्ग्तोंग वैदेशिक अध्ययन विश्वविद्यालय, चीन) दिल्ली किसे समझते हैं आप दिल्ली! जगमगाती ज्योति से नहाए लोकतंत्र की पालकी उठाए खड़े लकदक संसद,राष्ट्रपति और शास्त्रीभवन व्य्यापारिक व कूटनीतिक बाँहैं फैलाए युद्धिष्ठिर को गले लगाने को आतुर लोहे के धृतराष्ट्र-से बेचैन दुनिया भर के राष्ट्रों के दूतावास, विश्वस्वास्थ्य संगठन,बहुराष्ट्रीय कंपनियों के मुख्यालय सर्वोच्च न्यायालय,एम्स और जवाहर लाल नेहरू विश्वद्यालय यानी न्याय,स्वास्थ्य,अर्थ और शिक्षा के नित नए सांचे-ढाँचे, गढ़ते -तोड़ते संस्थान इतिहास,धर्म,संस्कृति,साहित्य और कला को छाती पेटे लगाए लालकिला, कुतुबमीनार, शीशमहल अक्षरधाम, ज़ामामस्ज़िद, इंडियागेट, चाँदनी चौक रामलीला मैदान, प्रगति मैदान, ललित कला अकादमी, हिंदी अकादमी, ज्ञानपीठ, वाणी, राजकमल, किताबघर जैसे अद्भुत विरासत साधे स्थापत्य, स्थान और प्रतिष्ठान आखिर किसे समझते हैं आप दिल्ली !   कल-कारखानों का विष पीती-पिलाती काँखती,कराहती बहती काली-कलूटी कुब्जा यमुना दिल्ली और एन सी आर के बीचोबीच अपने पशुओं के लिए घास ढोती उपले थापती आधी दुनिया माने औरत जाति आखिर किसे कहते हैं आप दिल्ली!   मिरांडा हॉउस, लेडी श्रीराम कॉलेज में किताबों में सर गाड़े या किसी पब्लिक स्कूल के पीछे वाले भूभाग में बड़े पेड़ या झाड़ की आड़ में स्मैक के आगोश में छिपके बैठी होनहार पीढ़ी रेडलाइट इलाके में छापे मारती हाँफती भागती...
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योग-साधना LifeSkills/जीवन कौशल–Meditation: Breathing with feeling – Learning Video #5 -Shri Jagat Singh Bisht

MEDITATION: BREATHING WITH FEELING Learning Video #5 Having trained to breathe with the body earlier, we train to breathe with feelings in this session. Instructions: Sit down with legs folded crosswise, back straight and eyes closed. Always mindful, breathe in; mindful, breathe out. Breathing in long, understand:I am breathing in long; breathing out long, understand: I am breathing out long. Breathing in short, understand: I am breathing in short; breathing out short, understand: I am breathing out short. Breathe in experiencing the whole body, breathe out experiencing the whole body. Breathe in tranquilizing the whole body, breathe out tranquilizing the whole body. As you breathe in and out, observe your feelings. Breathe in experiencing your feelings, breathe out experiencing your feelings. Breathe in experiencing rapture, breathe out experiencing rapture. Breathe in experiencing pleasure, breathe out experiencing pleasure. Ever mindful, breathe in; mindful, breathe out. May all beings be happy, be peaceful, be liberated. Open your eyes and come out of meditation gently. (Based on the Anapanasati Sutta)  Jagat Singh Bisht, Founder: LifeSkills...
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योग-साधना LIFESKILLS/जीवन कौशल-32 –SHRI JAGAT SINGH BISHT

Shri Jagat Singh Bisht (Master Teacher: Happiness & Well-Being, Laughter Yoga Master Trainer, Author, Blogger, Educator and Speaker.)   Positive Psychology has three pillars: First is the study of positive emotions like gratitude, joy and hope. Second is the study of the positive traits, foremost among them the strengths and virtues, but also the ‘abilities’ such as intelligence and athleticism. Third is the study of positive institutions, such as democracy, strong families, and free enquiry, that support the virtues, which in turn support the positive emotions. LifeSkills Courtesy – Shri Jagat Singh Bisht, LifeSkills, Indore...
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पुस्तक समीक्षा / आत्मकथ्य – पंचमढ़ी की खोज – श्री सुरेश पटवा

आत्मकथ्य – पंचमढ़ी की खोज – श्री सुरेश पटवा  (‘पंचमढ़ी की खोज’  श्री सुरेश पटवा की प्रसिद्ध पुस्तकों में से एक है। आपका जन्म देनवा नदी के किनारे उनके नाना के गाँव ढाना, मटक़ुली में हुआ था। उनका बचपन सतपुड़ा की गोद में बसे सोहागपुर में बीता। प्रकृति से विशेष लगाव के कारण जल, जंगल और ज़मीन से उनका नज़दीकी रिश्ता रहा है। पंचमढ़ी की खोज के प्रयास स्वरूप जो किताबी और वास्तविक अनुभव हुआ उसे आपके साथ बाँटना एक सुखद अनुभूति है।  श्री सुरेश पटवा, ज़िंदगी की कठिन पाठशाला में दीक्षित हैं। मेहनत मज़दूरी करते हुए पढ़ाई करके सागर विश्वविद्यालय से बी.काम. 1973 परीक्षा में स्वर्ण पदक विजेता रहे हैं और कुश्ती में विश्व विद्यालय स्तरीय चैम्पीयन रहे हैं। भारतीय स्टेट बैंक से सेवा निवृत सहायक महाप्रबंधक हैं, पठन-पाठन और पर्यटन के शौक़ीन हैं। वर्तमान में वे भोपाल में निवास करते हैं। आप अभी अपनी नई पुस्तक ‘पलक गाथा’ पर काम कर रहे हैं। प्रस्तुत है उनकी पुस्तक पंचमढ़ी की खोज पर उनका आत्मकथ्य।) मध्यप्रदेश के होशंगाबाद...
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हिन्दी साहित्य – व्यंग्य – आँचल : एक श्रद्धांजलि – श्री शांतिलाल जैन

श्री शांतिलाल जैन  ‘आँचल : एक श्रद्धांजलि’ (आदरणीय अग्रज एवं वरिष्ठ व्यंग्यकार श्री शांतिलाल जैन जी विगत दो  दशक से भी अधिक समय से व्यंग्य विधा के सशक्त हस्ताक्षर हैं।  आपकी पुस्तक 'न जाना इस देश' को साहित्य अकादमी के राजेंद्र अनुरागी पुरस्कार से नवाजा गया है। इसके अतिरिक्त आप कई ख्यातिनाम पुरस्कारों से अलंकृत किए गए हैं। इनमें हरिकृष्ण तेलंग स्मृति सम्मान एवं डॉ ज्ञान चतुर्वेदी पुरस्कार प्रमुख हैं। e-abhivyakti में हम आपके इस प्रथम व्यंग्य को प्रकाशित कर गौरवान्वित अनुभव कर रहे हैं एवं भविष्य में भी साहित्यिक सहयोग की अपेक्षा करते हैं।)  3 जुलाई, 2048. ऑप्शनल सब्जेक्ट हिंदी, क्लास टेंथ. भावार्थ के लिए मैम ने कविता पढ़ी -“अबला जीवन हाय तुम्हारी यही कहानी, आँचल में दूध और आँखों में पानी” “मैम, ये आँचल कैसा होता है ?”  अचकचा गई मैम. कैसे बताये ? “आँचल पल्लू जैसा होता है.” “मैम, ये पल्लू कैसा होता है ?” – एक स्टूडेंट ने पूछा. “ओके. दुपट्टा देखा है ? या तुमारा ग्रान’मा का फोटू में कभी साड़ी, ओढ़नी, चुन्नी...
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योग-साधना LIFESKILLS/जीवन कौशल-31 –SHRI JAGAT SINGH BISHT

Shri Jagat Singh Bisht (Master Teacher: Happiness & Well-Being, Laughter Yoga Master Trainer, Author, Blogger, Educator and Speaker.)   Being honest with people can deepen relationships as well as enable you to get more of what you want out of life. A great way to do this is through laughter. Studies have shown that laughter releases endorphins that makes you more open. LifeSkills Courtesy – Shri Jagat Singh Bisht, LifeSkills, Indore...
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