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हिन्दी साहित्य – व्यंग्य – ☆ खिचड़ी सरकार और कोप भवन की जरूरत ☆ – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव “विनम्र”

श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव "विनम्र" ☆ खिचड़ी सरकार और कोप भवन की जरूरत ☆ (प्रस्तुत है श्री विवेक  रंजन  श्रीवास्तव जी  का  सटीक एवं सार्थक व्यंग्य।  बतौर सिविल इंजीनियर  कोपभवन के आर्किटेक्ट की परिकल्पना उनका तकनीकी अधिकार है किन्तु एक सधे हुए व्यंग्यकार के तौर पर उन्होने वर्तमान राजनीति में कोपभवन की आवश्यकता का सटीक विश्लेषण किया है। निश्चित ही श्री विवेक जी ने ऐसे रेसोर्ट्स की भी परिकल्पना की होगी  जो कोपभवन के रास्ते में पड़ते  हैं । एक बेहतरीन व्यंग्य के लिए श्री विवेक जी को बधाई।) भगवान श्री राम के युग की स्थापत्य कला का अध्ययन करने में एक विशेष तथ्य उद्घाटित होता है, कि तब भवन में रूठने के लिये एक अलग स्थान होता था। इसे कोप भवन कहते थे। गुस्सा आने पर मन ही मन घुनने के बजाय कोप भवन में जाकर अपनी भावनाओं का इजहार करने की परम्परा थी। कैकेयी को श्री राम का राज्याभिषेक पसंद नहीं आया वे कोप भवन में चली गई। राजा दशरथ उन्हें मनाने कोप...
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हिन्दी साहित्य- कथा-कहानी – लघुकथा – ☆ अछूत ☆ – डॉ . प्रदीप शशांक

डॉ . प्रदीप शशांक  ☆ अछूत ☆ (डॉ प्रदीप शशांक जी द्वारा प्रस्तुत यह लघुकथा  वर्तमान सामाजिक परिवेश के ताने बाने पर आधारित है। डॉ प्रदीप जी की शब्द चयन एवं सांकेतिक शैली  मौलिक है। ) इस जिले में स्थानांतरित होकर आये देवांश को लगभग एक वर्ष हो गया था । परिवार पुराने शहर में ही था । देवांश छुट्टियों में ही अपने घर आता जाता था एवं परिवार की आवश्यकताओं की पूर्ति करता था । केवल वेतन के सहारे उसका दो जगह का खर्च ब- मुश्किल चल रहा था । अनिवार्य आवश्यकता की पूर्ति हेतु उधारी के कुचक्र में वह उलझता ही जा रहा था । विगत कुछ माहों से वह अनुभव कर रहा था कि यहां पर भ्रष्टाचार की नदी का बहाव कुछ ज्यादा ही तेज है । इस नदी में यहां कार्यरत कुछ पण्डों का एकाधिकार था । ये पण्डे रोज ही भ्रष्टाचार की नदी में डुबकी लगाकर पूण्य लाभ कमा रहे थे, इसका प्रसाद भी उन्हीं के भक्तों में वितरित...
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हिन्दी साहित्य – कविता – ☆ सुन्दरता ☆ – सुश्री विजया देव

सुश्री विजया देव ☆ सुन्दरता ☆ (प्रस्तुत है वरिष्ठ  मराठी साहित्यकार सुश्री विजया देव जी  एक श्रंगारिक हिन्दी कविता "सुन्दरता " ।)   कोमल कमनीय काया तुम्हारी जीवन का सुख दे जाये कमल पुष्प सा स्पर्श तुम्हारा निर्जीव में जीव ले आये   चाँद सी चमकती माथे की बिंदिया सूरज पर भी मात करे कजरारे दो नैन कटारी सीधे दिल पर वार करे मस्त हवा की झूमती क्यारी मन को सुगंधित कर जाये 1   रुप की गागर छलकाकर तुम तन में तरंगे लहराती हो कोयल जैसी वाणी मधुर है मन में उमंगे भर जाती हो अपलक देखे देखने वाला सुधबुध उसकी खो जाये 2   मूर्तिकार की प्रतिमा हो या कामदेव का रंगमहल कवि की सुन्दर रचना हो तुम या हो तराशा ताजमहल अद्भुत अनुपम ईश्वर निर्मित सुन्दरता जब छा जाये 3   © विजया देव...
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मराठी साहित्य – मराठी कविता – ? गझल ? – सुश्री प्रभा सोनवणे

सुश्री प्रभा सोनवणे   गझल (सुश्री प्रभा सोनवणे जी  हमारी  पीढ़ी की एक वरिष्ठ मराठी साहित्यकार हैं ।   प्रस्तुत है सुश्री प्रभा जी की एक भावप्रवण मराठी गजल।) फुका शोध घेशी, तुला ज्ञात आहे तुझा आप्त कोणी न शहरात आहे कधी ना मिळाली कुणाची दीदारी सदा वैर माझ्याच नशिबात आहे दिवा एक नाही कुणी लावणारा इथे फक्त अंधारली रात आहे कुणी भाव खातो फुकाचा इथेही मला माहिती, काय औकात आहे व्यथा साहते मी मुक्याने तरीही कुणा वाटते मारवा गात आहे © प्रभा सोनवणे,   “सोनवणे हाऊस”, ३४८ सोमवार पेठ, पुणे – ४११०११ मोबाईल-9270729503 ...
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आध्यात्म/Spiritual – श्रीमद् भगवत गीता – पद्यानुवाद – द्वितीय अध्याय (59) प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’

श्रीमद् भगवत गीता पद्यानुवाद – प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’ द्वितीय अध्याय साँख्य योग ( अर्जुन की कायरता के विषय में श्री कृष्णार्जुन-संवाद )   विषया विनिवर्तन्ते निराहारस्य देहिनः । रसवर्जं रसोऽप्यस्य परं दृष्टवा निवर्तते ।।59।। भूख देह की मिटाते तो हैं विषय विकार किंतु लालसा मिटाता प्रभु का साक्षात्कार।।59।।   भावार्थ : इन्द्रियों द्वारा विषयों को ग्रहण न करने वाले पुरुष के भी केवल विषय तो निवृत्त हो जाते हैं, परन्तु उनमें रहने वाली आसक्ति निवृत्त नहीं होती। इस स्थितप्रज्ञ पुरुष की तो आसक्ति भी परमात्मा का साक्षात्कार करके निवृत्त हो जाती है।।59।।   The objects  of  the  senses  turn  away  from  the  abstinent  man,  leaving  the  longing (behind); but his longing also turns away on seeing the Supreme. ।।59।।   © प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’  ए १ ,विद्युत मण्डल कालोनी, रामपुर, जबलपुर vivek1959@yahoo.co.in मो ७०००३७५७९८ (हम प्रतिदिन इस ग्रंथ से एक मूल श्लोक के साथ श्लोक का हिन्दी अनुवाद जो कृति का मूल है के साथ ही गद्य में अर्थ व अंग्रेजी भाष्य भी प्रस्तुत करने का प्रयास करेंगे।)...
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योग-साधना LifeSkills/जीवन कौशल ☆ Laughter Yoga – A Life Changing Experience ☆ Shri Jagat Singh Bisht

Shri Jagat Singh Bisht (Master Teacher: Happiness & Well-Being, Laughter Yoga Master Trainer, Author, Blogger, Educator and Speaker.) Laughter Yoga – A Life Changing Experience Laughter lowers blood pressure, relaxes muscles, improves blood circulation, increases oxygen level in the body, elevates mood, brings hope, enhances communication and boosts immune system. Dr Madan Kataria has contributed to the happiness of mankind by successfully blending free laughter with yogic breathing and evolving the unique concept of Laughter Yoga. Laughter Yoga is a revolutionary idea – simple and profound. It is a breakthrough laughter delivery system that enables a person to laugh continuously for fifteen to twenty minutes. It is a powerful exercise routine and a complete wellbeing workout which is fast sweeping the world. Dr Madan Kataria, an Indian physician, along with his wife Madhuri, started the first laughter club in a park in Mumbai on 13th March 1995 with just five members. Today it is a worldwide phenomenon with more than six thousand social laughter clubs in...
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हिन्दी साहित्य – कविता ☆ दोज़ख ☆ –डा. मुक्ता

डा. मुक्ता ☆ दोज़ख ☆   (डा. मुक्ता जी हरियाणा साहित्य अकादमी की पूर्व निदेशक एवं  माननीय राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित/पुरस्कृत हैं।  जीवन के कटु सत्य को उजागर करती  हृदयस्पर्शी कविता।)   हर दिन घटित हादसों को देख मन उद्वेलित हो,चीत्कार करता कैसी है हमारी सामाजिक व्यवस्था और सरकारी तंत्र जहां मां,बेटी,बहन की अस्मत नहीं सुरक्षित जहां मासूम बच्चों को अगवा कर उनकी ज़िंदगी को दोज़ख में झोंक नरक बनाया जाता जहां दुर्घटनाग्रस्त तड़पता,चीखता-चिल्लाता इंसान सड़क पर सहायता हेतु ग़ुहार लगाता और सहायता ना मिलने पर अपने प्राण त्याग देता और परिवारजनों को आंसू बहाने के लिए छोड़ जाता जहां दाना मांझी को पत्नी के शव को कंधे पर उठा बारह किलोमीटर पैदल चलना पड़ता उड़ीसा में एंबुलेंस के बीच राह उतार देने पर सात साल की बेटी के शव को कंधे पर उठा एक पिता को छह किलोमीटर पैदल चलना पड़ता जहां एक मां को रात भर अपनी बेटी का शव सीने से लगा खुले आसमान के नीचे बैठ हाथ पसारना पड़ता ताकि वह दाह-संस्कार के लिए जुटा सके धन यह सामान्य सी घटनाएं उठाती हैं प्रश्न….. क्या गरीब लोगों को संविधान द्वारा नहीं मौलिक अधिकार प्रदत्त? क्या उन्हें नही प्राप्त जीने का अधिकार? क्या उन्हें नहीं रोटी,कपड़ा,मकान की दरक़ार क्यों मूलभूत सुविधाएं हैं उनसे कोसों...
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मराठी साहित्य – मराठी कविता – ? अर्धवट कविता ? –श्री अशोक श्रीपाद भांबुरे

श्री अशोक श्रीपाद भांबुरे ? अर्धवट कविता ?   (प्रस्तुत है श्री अशोक श्रीपाद भांबुरे जी की एक  अतिसुन्दर रचना ।  निःसन्देह उनकी यह  मुक्त छंद रचना... किसी भी तरह से उनके जीवन से कम नहीं।)   उपवर झालेली माझी अर्धवट कविता योग्य शब्दांच्या शोधात थांबली आहे अजून वय उलटून चाललंय तरी...   कधी शब्द सापडलाच चांगला तर मात्रेत बसत नाही आणि मुक्त छंद लिहायचाच नाही हे तर ठरवून टाकलंय मी...   ती मात्र हुशार निघाली लिहिते मुक्त छंदात शब्दही असतात अगदी बाळसेदार व्यासपीठावर मिरवते टाळ्याही घेते...   मुक्त छंदाच्या संसारात तिची कविता रमली आहे आणि माझी कविता थांबली आहे वाट पहात आशय, विषय, मात्रांच्या प्रतिक्षेत...   लोक मला हेकेखोर म्हणतात पण कुठलीच तडजोड चालणार नाही मला जीवनात आणि कवितेच्या बाबतीतही...   जीवन आणि कविता ही वेगळी काढता येत नाही म्हणूनच दोन्ही कागद कोरे आहेत अजून एक कवितेचा आणि दुसरा माझा याही वयात...!   © अशोक भांबुरे, धनकवडी धनकवडी, पुणे ४११ ०४३. मो. ८१८००४२५०६, ९८२२८८२०२८ ashokbhambure123@gmail.com ...
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English Literature – ☆ Happiness ☆ – Shri Jay Prakash Pandey

Shri Jay Prakash Pandey ☆ Happiness ☆  (We present a very motivating article by Shri Jay Prakash Pandey.  Shri Jay Prakash ji worked a lot for the overall development and happiness of tribal people while he was working in State Bank of India.  We will try to share his experiences in future.) Happiness is the big ingredient everyone wants in his life. Happiness is, in many ways, a personal matter. There are three things to remember about happiness: Happiness is important Happiness is desirable Happiness is possible No matter what your past circumstances have been, no matter what your present conditions are, happiness is possible for you. You can learn to develop it and this happiness will give you a healthier and richer life Happiness is not achieved by devious or false methods. The first step building a state of happiness in your life is to raise the level of your own self-respect. Happiness is only within your reach if you first admit that is a...
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हिन्दी साहित्य- पुस्तक समीक्षा – * शिवांश से शिव तक * श्री ओम प्रकाश श्रीवास्तव एवं श्रीमति भारती श्रीवास्तव – (समीक्षक – प्रो. सी.बी. श्रीवास्तव ‘विदग्ध‘)

कैलाश मानसरोवर यात्रा - "शिवांश से शिव तक" –  श्री ओम प्रकाश श्रीवास्तव एवं श्रीमति भारती श्रीवास्तव पुस्तक समीक्षा शिवांश से शिव तक (कैलाश मानसरोवर यात्रा वर्णन) लेखक- श्री ओम प्रकाश श्रीवास्तव एवं श्रीमती भारती श्रीवास्तव प्रकाशक- मंजुल पब्लिषिंग हाउस प्रा.लि. अंसारी रोड दरियागंज नई दिल्ली। मूल्य – 225 रु. पृष्ठ संख्या-284, अध्याय-25, परिषिष्ट 8, चित्र 35   कैलाश और मानसरोवर भारत के धवल मुकुट मणि हिमालय के दो ऐसे पवित्र प्रतिष्ठित स्थल हैं जो वैदिक संस्कृति के अनुयायी भारतीय समाज के जन मानस में स्वर्गोपम मनोहर और पूज्य है। मान्यता है कि ये महादेव भगवान शंकर के आवास स्थल है। गंगाजी के उद्गम स्त्रोत स्थल है और नील क्षीर विवेक रखने वाले निर्दोष पक्षी जो राजहंस माॅ सरस्वती का प्रिय वाहन है उसका निवास स्थान है। हर भारतीय जो वैदिक साहित्य से प्रभावित है मन में एक बार अपने जीवन काल में इनके सुखद और पुण्य दर्शन की लालसा संजोये होता है। भारत के अनेको पवित्र तीर्थस्थलों में से ये प्रमुख तीर्थ है। इसीलिये इनकी पावन यात्रा...
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