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हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ – ☆ सामाजिक चेतना – #23 ☆ धरती के सूरज ☆ सुश्री निशा नंदिनी भारतीय

सुश्री निशा नंदिनी भारतीय    (सुदूर उत्तर -पूर्व  भारत की प्रख्यात  लेखिका/कवियित्री सुश्री निशा नंदिनी जी  के साप्ताहिक स्तम्भ – सामाजिक चेतना की अगली कड़ी में   प्रस्तुत है  उनकी  एक  कविता  “धरती के सूरज ”। आप प्रत्येक सोमवार सुश्री  निशा नंदिनी  जी के साहित्य से रूबरू हो सकते हैं।)   ☆ साप्ताहिक स्तम्भ – सामाजिक चेतना – #23 ☆ ☆ कविता – धरती के सूरज ☆   धरती के सूरज तुम जागो अंधकार तुम्हें पुकार रहा दे कर दुहाई पौरुष की चीत्कार रहा हुंकार रहा।   डाल-डाल पर चहके पक्षी पशुओं ने आनंद श्वास लिया कमलदल विकसे तडाग में समीर ने स्वागत गान किया।   गौ मात खड़ी द्वार पर तेरे अमृत रसधार बहाने को हल फल लिए कृषक खड़ा मानव की क्षुधा मिटाने को।   शिवालय की क्षुद्र घंटिका प्रभु का नाम पुकार रही समस्त प्राणियों के हृदय में प्रेम की ज्योत जला रही।   स्वप्न निद्रा में अलसाया तू कर्मयोग को भूल रहा हृदय कपाट बंद करके तू मृत्यु शैया पर झूल रहा।   धरती के सूरज तुम जागो अंधकार तुम्हें पुकार रहा दे कर दुहाई पौरुष की चीत्कार रहा हुंकार रहा।   © निशा नंदिनी भारतीय  तिनसुकिया, असम 9435533394...
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हिन्दी साहित्य – मनन चिंतन – ☆ संजय दृष्टि – शैली ☆ – श्री संजय भारद्वाज

श्री संजय भारद्वाज  (श्री संजय भारद्वाज जी का साहित्य उतना ही गंभीर है जितना उनका चिंतन और उतना ही उनका स्वभाव। संभवतः ये सभी शब्द आपस में संयोग रखते हैं  और जीवन के अनुभव हमारे व्यक्तित्व पर अमिट छाप छोड़ जाते हैं।  हम आपको प्रति रविवार उनके साप्ताहिक स्तम्भ – संजय उवाच शीर्षक  के अंतर्गत उनकी चुनिन्दा रचनाएँ आप तक  पहुँचा रहे हैं। अब सप्ताह के अन्य दिवसों पर आप उनके मनन चिंतन को  संजय दृष्टि के अंतर्गत पढ़ सकेंगे। )    ☆ संजय दृष्टि  –  शैली  ☆ ...हरेक की अपनी विशिष्ट शैली होती है। आपकी अपनी दृष्टि में आपकी शैली की कौन सी विशेषता उसे अन्य शैलियों से अलग करती है? ...यह शैली ज़िंदगी के मर्सिया नहीं पढ़ती बल्कि मौत के सोहर गाती है। ©  संजय भारद्वाज, पुणे (31.10.2013) ☆ अध्यक्ष– हिंदी आंदोलन परिवार ☆ सदस्य– हिंदी अध्ययन मंडल, पुणे विश्वविद्यालय ☆ संपादक– हम लोग ☆ पूर्व सदस्य– महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी ☆ ट्रस्टी- जाणीव, ए होम फॉर सीनियर सिटिजन्स ☆ मोबाइल– 9890122603 writersanjay@gmail.com ...
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हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ – ☆ जय प्रकाश पाण्डेय का सार्थक साहित्य # 21 – लाल बत्ती की इज्जत ☆ – श्री जय प्रकाश पाण्डेय

श्री जय प्रकाश पाण्डेय   (श्री जयप्रकाश पाण्डेय जी   की पहचान भारतीय स्टेट बैंक से सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी के अतिरिक्त एक वरिष्ठ साहित्यकार की है। वे साहित्य की विभिन्न विधाओं के सशक्त हस्ताक्षर हैं। उनके  व्यंग्य रचनाओं पर स्व. हरीशंकर परसाईं जी के साहित्य का असर देखने को मिलता है। परसाईं जी का सानिध्य उनके जीवन के अविस्मरणीय अनमोल क्षणों में से हैं, जिन्हें उन्होने अपने हृदय  एवं  साहित्य में  सँजो रखा है । प्रस्तुत है साप्ताहिक स्तम्भ की  अगली कड़ी में  उनकी एक कहानी “लाल बत्ती की इज्जत”। आप प्रत्येक सोमवार उनके  साहित्य की विभिन्न विधाओं की रचना पढ़ सकेंगे।) ☆ जय प्रकाश पाण्डेय का सार्थक साहित्य # 21☆   ☆ लघुकथा – लाल बत्ती की इज्जत ☆    “------- हलो.... बेटा तुम्हारे पापा अस्पताल में बहुत सीरियस हैं तुम्हें बहुत याद कर रहे हैं, उनका आखिरी समय चल रहा है। यहां मेरे सिवाय उनका कोई नहीं है। कब आओगे बेटा ?” माँ चिल्लाती रही, बड़बड़ाती रही पर अमेरिका में नौकरी करने गए एकलौते बेटे को फुरसत नहीं मिली। बेटे...
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हिंदी साहित्य – सफरनामा ☆ नर्मदा परिक्रमा – दूसरा चरण # 5 – श्री सुरेश पटवा जी की कलम से ☆ – श्री सुरेश पटवा

सुरेश पटवा            (विगत सफरनामा -नर्मदा यात्रा प्रथम चरण  के अंतर्गत हमने  श्री सुरेश पटवा जी की कलम से हमने  ई-अभिव्यक्ति के पाठकों से साझा किया था। इस यात्रा की अगली कड़ी में हम श्री सुरेश पटवा  जी और उनके साथियों द्वारा भेजे  गए  ब्लॉग पोस्ट आपसे साझा करने का प्रयास करेंगे। इस श्रंखला में  आपने पढ़ा श्री पटवा जी की ही शैली में पवित्र नदी नर्मदा जी से जुड़ी हुई अनेक प्राकृतिक, ऐतिहासिक और पौराणिक रोचक जानकारियाँ जिनसे आप संभवतः अनभिज्ञ  रहे होंगे। इस बार हम एक नया प्रयोग  कर रहे हैं।  श्री सुरेश पटवा जी और उनके साथियों के द्वारा भेजे गए ब्लॉगपोस्ट आपसे साझा  करने का प्रयास कर रहे हैं। उनके सहयात्री  तथा गांधीवादी विचारधारा से प्रेरित श्री अरुण कुमार डनायक जी द्वारा नर्मदा यात्रा संस्मरण उनके दृष्टिकोण से प्रस्तुत कर रहे हैं। आज के ही अंक में उनके संस्मरण की दूसरी कड़ी प्रकाशित की गई है। निश्चित ही आपको नर्मदा यात्री मित्रों की कलम से अलग अलग दृष्टिकोण से की गई यात्रा अनुभव को...
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हिंदी साहित्य – यात्रा-संस्मरण ☆ नर्मदा परिक्रमा – द्वितीय चरण # दो ☆ – श्री अरुण कुमार डनायक

श्री अरुण कुमार डनायक   (ई- अभिव्यक्ति में हमने सुनिश्चित किया था कि - इस बार हम एक नया प्रयोग  कर रहे हैं।  श्री सुरेश पटवा जी  और उनके साथियों के द्वारा भेजे गए ब्लॉगपोस्ट आपसे साझा  करने का प्रयास करेंगे।  निश्चित ही आपको  नर्मदा यात्री मित्रों की कलम से अलग अलग दृष्टिकोण से की गई यात्रा  अनुभव को आत्मसात करने का अवसर मिलेगा। इस यात्रा के सन्दर्भ में हमने कुछ कड़ियाँ श्री सुरेश पटवा जी एवं श्री अरुण कुमार डनायक जी  की कलम से आप तक  पहुंचाई ।  हमें प्रसन्नता है कि यात्रा की समाप्ति पर श्री अरुण जी ने तत्परता से नर्मदा यात्रा  के द्वितीय चरण की यात्रा का वर्णन दस कड़ियों में उपलब्ध करना प्रारम्भ कर दिया है । श्री अरुण कुमार डनायक जी द्वारा इस यात्रा का विवरण अत्यंत रोचक एवं उनकी मौलिक शैली में हम आज से दस अंकों में आप तक उपलब्ध करा रहे हैं। विशेष बात यह है कि यह यात्रा हमारे वरिष्ठ नागरिक मित्रों द्वारा...
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हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ – ☆ सकारात्मक सपने – #24 – जबाबदार कौन नेतृत्व ? या नीतियां ? ☆ सुश्री अनुभा श्रीवास्तव

सुश्री अनुभा श्रीवास्तव  (सुप्रसिद्ध युवा साहित्यकार, विधि विशेषज्ञ, समाज सेविका के अतिरिक्त बहुआयामी व्यक्तित्व की धनी  सुश्री अनुभा श्रीवास्तव जी  के साप्ताहिक स्तम्भ के अंतर्गत हम उनकी कृति “सकारात्मक सपने” (इस कृति को  म. प्र लेखिका संघ का वर्ष २०१८ का पुरस्कार प्राप्त) को लेखमाला के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं। साप्ताहिक स्तम्भ – सकारात्मक सपने के अंतर्गत आज अगली कड़ी में प्रस्तुत है  “जबाबदार कौन नेतृत्व ? या नीतियां ?  ”।  इस लेखमाला की कड़ियाँ आप प्रत्येक सोमवार को पढ़ सकेंगे।)     Amazon Link for eBook :  सकारात्मक सपने   Kobo Link for eBook        : सकारात्मक सपने   ☆ साप्ताहिक स्तम्भ – सकारात्मक सपने  # 24 ☆ ☆ जबाबदार कौन नेतृत्व ? या नीतियां ? ☆ कारपोरेट मैनेजर्स की पार्टीज में चलने वाला जसपाल भट्टी का लोकप्रिय व्यंग है, जिसमें वे कहते हैं कि किसी कंप,नी में सी एम डी के पद पर भारी भरकम पे पैकेट वाले व्यक्ति की जगह एक तोते को बैठा देना चाहिये, जो यह बोलता हो कि "मीटिंग कर लो", "कमेटी बना दो" या  "जाँच करवा लो ". यह सही है कि सामूहिक जबाबदारी की मैनेजमेंट नीति के...
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मराठी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ – ☆ रंजना जी यांचे साहित्य #- 23 – कॉपी ☆ – श्रीमती रंजना मधुकरराव लसणे

श्रीमती रंजना मधुकरराव लसणे    (श्रीमती रंजना मधुकरराव लसणे जी हमारी पीढ़ी की वरिष्ठ मराठी साहित्यकार हैं।  सुश्री रंजना  एक अत्यंत संवेदनशील शिक्षिका एवं साहित्यकार हैं।  सुश्री रंजना जी का साहित्य जमीन से  जुड़ा है  एवं समाज में एक सकारात्मक संदेश देता है।  निश्चित ही उनके साहित्य  की अपनी  एक अलग पहचान है। आप उनकी अतिसुन्दर ज्ञानवर्धक रचनाएँ प्रत्येक सोमवार को पढ़ सकेंगे। आज  प्रस्तुत है  शिक्षिका के कलम से एक भावप्रवण कविता  – “कॉपी”। )   ☆ साप्ताहिक स्तम्भ – रंजना जी यांचे साहित्य # 23☆     ☆ कॉपी ☆   कॉपी मुक्त शिक्षणाची आज मांडली से थट्टा । पेपर फुटीला ऊधान लावी गुणवत्तेला बट्टा।   गरिबाचं पोरं  वेडं दिनरात अभ्यासानं। ऐनवेळी रोवी झेंडा गठ्ठेवाला धनवान ।   सार्‍या शिक्षणाचा सार गुण   सांगती शंभर। चाकरीत  बिरबल सत्ताधारी अकबर।   कॉपी पुरता अभ्यास चार दिवसाचे सत्र। ठरविते गुणवत्ता गुणहीन  गुणपत्र।   उन्नतीस खीळ घाली कॉपी नामक वळंबा। नाणे पारखावे जसे राजे शिवाजी नि संभा।   ©  रंजना मधुकर लसणे आखाडा बाळापूर, जिल्हा हिंगोली 9960128105...
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आध्यात्म/Spiritual – श्रीमद् भगवत गीता – पद्यानुवाद – सप्तम अध्याय (22) प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’

श्रीमद् भगवत गीता हिंदी पद्यानुवाद – प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’ सप्तम अध्याय ज्ञान विज्ञान योग ( अन्य देवताओं की उपासना का विषय )   स तया श्रद्धया युक्तस्तस्याराधनमीहते । लभते च ततः कामान्मयैव विहितान्हि तान्‌।।22।।   उस श्रद्धा से युक्त हो कर सब भेद समाप्त करता मुझसे ही सकल कामनाओं को प्राप्त।।22।।   भावार्थ : वह पुरुष उस श्रद्धा से युक्त होकर उस देवता का पूजन करता है और उस देवता से मेरे द्वारा ही विधान किए हुए उन इच्छित भोगों को निःसंदेह प्राप्त करता है।।22।।   Endowed with that faith, he engages in the worship of that (form), and from it he obtains his desire, these being verily ordained by Me (alone).।।22।।   © प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’  ए १ ,विद्युत मण्डल कालोनी, रामपुर, जबलपुर vivek1959@yahoo.co.in...
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हिंदी साहित्य – कविता / Poetry – ☆ She Walks in Beauty / चलती फिरती सौंदर्य प्रतिमा ☆ कैप्टन प्रवीण रघुवंशी, एन एम्

कैप्टन प्रवीण रघुवंशी, एन एम् (हम कैप्टन प्रवीण रघुवंशी जी द्वारा ई-अभिव्यक्ति के साथ उनकी साहित्यिक और कला कृतियों को साझा करने के लिए उनके बेहद आभारी हैं। आईआईएम अहमदाबाद के पूर्व छात्र कैप्टन प्रवीण जी ने विभिन्न मोर्चों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर एवं राष्ट्रीय स्तर पर देश की सेवा की है। वर्तमान में सी-डैक के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एचपीसी ग्रुप में वरिष्ठ सलाहकार के रूप में कार्यरत हैं साथ ही विभिन्न राष्ट्र स्तरीय परियोजनाओं में शामिल हैं।) सुप्रसिद्ध कवि लार्ड बायरन की कविता  She Walks in Beauty / चलती फिरती सौंदर्य प्रतिमा  का कैप्टन प्रवीण रघुवंशी जी  द्वारा अनुवाद एक संयोग है। इस सन्दर्भ में हम आपसे एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा करना चाहेंगे। डॉ विजय कुमार मल्होत्रा जी (पूर्व निदेशक (राजभाषा), रेल मंत्रालय,भारत सरकार) को इसी वर्ष जून माह में  यूनाइटेड किंगडम  के प्रसिद्ध शहर  नॉटिंघम  जाने का अवसर मिला। प्रवास के दौरान उन्हें हिन्दी कवयित्री और काव्यरंग की अध्यक्षा श्रीमति जय वर्मा जी ने अंग्रेज़ी के प्रसिद्ध कवि लॉर्ड बायरन की विरासत से...
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हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ – ☆ परिहार जी का साहित्यिक संसार – # 24 – व्यंग्य – पत्रिका के साझेदार ☆ – डॉ कुन्दन सिंह परिहार

डॉ कुन्दन सिंह परिहार   (आपसे यह  साझा करते हुए मुझे अत्यंत प्रसन्नता है कि  वरिष्ठ साहित्यकार आदरणीय  डॉ  कुन्दन सिंह परिहार जी  का साहित्य विशेषकर व्यंग्य  एवं  लघुकथाएं  ई-अभिव्यक्ति  के माध्यम से काफी  पढ़ी  एवं  सराही जाती रही हैं.  हम  प्रति रविवार  उनके साप्ताहिक स्तम्भ – “परिहार जी का साहित्यिक संसार” शीर्षक  के अंतर्गत उनकी चुनिन्दा रचनाएँ आप तक पहुंचाते  रहते हैं.  डॉ कुंदन सिंह परिहार जी  की रचनाओं के पात्र  हमें हमारे आसपास ही दिख जाते हैं. कुछ पात्र तो अक्सर हमारे गली मोहल्ले में ही नज़र आ जाते हैं.  उन पात्रों की वाक्पटुता को डॉ परिहार जी उन्हीं की बोलचाल  की भाषा का प्रयोग करते हुए अपना साहित्यिक संसार रच डालते हैं ,जो कथानकों को सजीव बना देता है. डॉ परिहार जी ने एक ऐसे पडोसी चरित्र के मनोविज्ञान का अध्ययन किया है, जिसकी मानसिकता गांठ के पैसे  से कुछ भी  खरीदने की है ही नहीं। पत्रिका तो मात्र संकेत है। यदि आप ऐसी मानसिक बीमारी के चरित्र को जानना चाहते हैं तो आपको...
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