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हिन्दी साहित्य – कविता ☆ नव वर्ष विशेष – स्वागत नूतन वर्ष तुम्हारा ☆ प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’

प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’    (प्रस्तुत है गुरुवर प्रोफ. श्री चित्र भूषण श्रीवास्तव जी  की नव वर्ष पर कविता  ‘स्वागत नूतन वर्ष तुम्हारा‘। )    स्वागत नूतन वर्ष तुम्हारा जन-जन को हर्षाने वाले जग के कोने कोने में हे! मधु मुस्काने लाने वाले। उषा की उज्जवल शुभ किरणें तुम सारे जग में फैलाओ- खुशियाँ पायें वे सब निर्बल जो हैं दुख में रहने वाले ।।1।।   ऐसा वातावरण बनाओ जिससे हो घर-घर खुशहाली जहाँ उदासी पलती आई वहाँ पर भी आये जीवन लाली। उपजे मन में सदाचार सद्भाव प्रेम की शुभ इच्छायें- कहीं कोई मन प्रेम शांति सुख खुशियों से अब रहे न खाली ।।2।।   प्रगति सभी को सदा साथ दे, कहीं कोई न हो कठिनाई सुख-दुख की घड़ियों में सारे  लोग रहें ज्यों भाई-भाई। अधिकारों के साथ सभी को कर्तव्यों का बोध सदा हो- निष्ठा और विश्वास आपसी सबके हित नित हो सुखदायी ।।3।।   कर्म- धर्म की रीति नीति से भूले भटके जो रहवासी सही राह पर चल सकने को वे बन जायें उचित विश्वासी। ऐसा करो प्रयास कि दुनियाँ फुलवारी  सी हो सुखकारी- कभी विफल हो न निराश हो...
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हिन्दी साहित्य – कविता ☆ नव वर्ष विशेष – नव वर्ष पर एक नव गीत ☆ डॉ. सुरेश कुशवाहा ‘तन्मय’

डॉ  सुरेश कुशवाहा ‘तन्मय’ (अग्रज  एवं वरिष्ठ साहित्यकार  डॉ. सुरेश कुशवाहा ‘तन्मय’ जी   नव वर्षाभिनंदन पर  नवीन कविता     “नव वर्ष पर एक नव गीत”। ) ☆ नव वर्ष पर एक नव गीत☆ आज पर विमर्श लिखें.......   चलो, नया वर्ष लिखें स्वागत - वन्दन करते अभिनव चिंतन करते प्रमुदित मन,हर्ष लिखें।   बीते से,  सीखें   हम नये कुछ,सलीके हम हो चुकी अगर भूलें करें नहीं,उनका गम नव प्रभात किरणों से आज पर, विमर्श लिखें, चलो, नया वर्ष --------।   संक्रमणित हलचल का कुटिल,कौरवी  दल का देव - भूमि भारत में अंश न बचे,छल, का, राष्ट्र हितैषी मिल कर विजयी, निष्कर्ष लिखें चलो, नया वर्ष---------।   समता के, भाव जगे भेद - भाव, दूर, भगे धर्म, जाति-भेद भूल निश्छल मन, गले लगें, अन्तर स्थित सब के उस प्रभु का दर्श लिखें चलो, नया वर्ष---------।   संकल्पित हों,जन-जन देश-प्रेम हित,  चिन्तन करुणामय धर्म-ध्वजा फहरे,जल-थल व गगन, नव-विवेक, शुचिता से मंगल उत्कर्ष लिखें आज पर विमर्श लिखें----।।   सुरेश कुशवाहा तन्मय बी - 101, महानंदा ब्लॉक, विराशा हाइट्स, दानिशकुंज ब्रिज, कोलार रॉड भोपाल मो. 9893266014...
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हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ संजय उवाच – #28 ☆ नव वर्ष विशेष – कालगणना ☆ श्री संजय भारद्वाज

श्री संजय भारद्वाज    (“साप्ताहिक स्तम्भ – संजय उवाच “ के  लेखक  श्री संजय भारद्वाज जी – एक गंभीर व्यक्तित्व । जितना गहन अध्ययन उतना ही  गंभीर लेखन।  शब्दशिल्प इतना अद्भुत कि उनका पठन ही शब्दों – वाक्यों का आत्मसात हो जाना है।साहित्य उतना ही गंभीर है जितना उनका चिंतन और उतना ही उनका स्वभाव। संभवतः ये सभी शब्द आपस में संयोग रखते हैं  और जीवन के अनुभव हमारे व्यक्तित्व पर अमिट छाप छोड़ जाते हैं। श्री संजय जी के ही शब्दों में ” ‘संजय उवाच’ विभिन्न विषयों पर चिंतनात्मक (दार्शनिक शब्द बहुत ऊँचा हो जाएगा) टिप्पणियाँ  हैं। ईश्वर की अनुकम्पा से इन्हें पाठकों का  आशातीत  प्रतिसाद मिला है।” हम  प्रति रविवार उनके साप्ताहिक स्तम्भ – संजय उवाच शीर्षक  के अंतर्गत उनकी चुनिन्दा रचनाएँ आप तक पहुंचाते रहेंगे। आज प्रस्तुत है  इस शृंखला की अगली  कड़ी । ऐसे ही साप्ताहिक स्तंभों  के माध्यम से  हम आप तक उत्कृष्ट साहित्य पहुंचाने का प्रयास करते रहेंगे।) ☆ साप्ताहिक स्तम्भ – संजय उवाच # 28 ☆ ☆ कालगणना ☆ वर्ष बीता, गणना की हुई निर्धारित तारीखें बीतीं। ...
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हिन्दी साहित्य ☆ कविता ☆ नव वर्ष विशेष – नव वर्ष की नव भोर ☆ सुश्री निशा नंदिनी भारतीय

सुश्री निशा नंदिनी भारतीय  a (सुदूर उत्तर -पूर्व  भारत की प्रख्यात लेखिका/कवियित्री सुश्री निशा नंदिनी जी  की नव वर्ष पर विशेष कविता “नव वर्ष की नव भोर”। )   ☆ नव वर्ष की नव भोर  ☆ नव वर्ष की नव भोर है कोकिल कलरव चहुँ ओर है। हरी-भरी पावन वसुधा है नीरव नील गगन बरसा है।   प्राची से झाँक रहा अरूण है पुष्प पादप पर रश्मि किरण है। तृण तिनको पर तुहिन वरण है अप्रतिम सौंदर्य भरा प्रांगण है।   अनजान पथ का पथिक बनकर जीव भ्रमण करता धरती पर। सहोदर सहचर के संग चलकर मिश्रित सुख-दुख सहता रहकर।   साथ मिला मित्रों का मधुकर जग जीवन के बीहड़ पथपर। कर्तव्यनिष्ठ पथ पर चलकर कई दशक बीते हँस हँसकर।   आज नववर्ष की नव बेलापर "निशा"की कालिमा से धुलकर। शुभकामनाएं देता मन मधुकर खुशियों से घर आँगन भरकर।   © निशा नंदिनी भारतीय  तिनसुकिया, असम 9435533394...
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हिन्दी साहित्य – कविता ☆ नव वर्ष विशेष – नव वर्ष ☆ सुश्री दीपिका गहलोत “मुस्कान”

सुश्री दीपिका गहलोत “मुस्कान” ( सुश्री दीपिका गहलोत ” मुस्कान “ जी  की नव वर्ष पर प्रस्तुत है एक कविता  नव वर्ष । ☆ नव वर्ष  ☆    नव वर्ष की नयी उमंग , लायी है सूरज की पहली सुरमयी किरण , जो बीत गया उसे सँवारने , आयी है नयी सोच की लहर सलंग , हर पल जीना है उत्साह से , यही है इस नव वर्ष का प्रण , हर मददग़ार की मदद करना , यहीं पर हुआ है इस नयी सोच का उत्पन्न , साँझ जैसा ढल रहा है बीता साल , उगते सूरज सा है नए साल का आगमन , अपने- पराये सब भेदभाव छोड़ छाड़  के , करना है इस नयी लहर का स्वागतं , छोटो की भूल चूक करके माफ़ , बड़ो के आशीर्वाद से करना है साल का प्रारम्भ , "मुस्कान"  की तो यही है आशा , नव वर्ष हो सबके लिए अन्न-जल-धन से संपन्न , नव वर्ष की नयी उमंग , लायी है सूरज की पहली सुरमयी किरण . . .   © सुश्री दीपिका गहलोत  “मुस्कान ”   पुणे, महाराष्ट्र...
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मराठी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ कवितेच्या प्रदेशात # 30 – जन्म सोहळा ☆ सुश्री प्रभा सोनवणे

सुश्री प्रभा सोनवणे   (आज प्रस्तुत है सुश्री प्रभा सोनवणे जी के साप्ताहिक स्तम्भ  “कवितेच्या प्रदेशात” में  उनकी अतिसुन्दर कविता  “जन्म सोहळा”.  आखिर नव वर्ष का शुभारम्भ किसी जन्म उत्सव से कम तो नहीं है न ?  मुझे पूर्ण विश्वास है  कि आप निश्चित ही प्रत्येक बुधवार सुश्री प्रभा जी की रचना की प्रतीक्षा करते होंगे. आप  प्रत्येक बुधवार को सुश्री प्रभा जी  के उत्कृष्ट साहित्य का साप्ताहिक स्तम्भ  – “कवितेच्या प्रदेशात” पढ़ सकते  हैं।) ☆ साप्ताहिक स्तम्भ – कवितेच्या प्रदेशात # 30 ☆ ☆ जन्म सोहळा ☆    वृत्त-आनंद कंद गागाल गालगागा  गागाल गालगागा   आहेत चांदण्याचे माझ्या घरी पसारे मोहात पाडती ते  शब्दातले इशारे   मी रंगले कधीची स्वप्नामधेच माझ्या सा-या खुणा सुखाच्या आहेत नित्य ताज्या   मी वेगळीच आहे, जेव्हा मला कळाले तेव्हाच दुःख माझे एका क्षणी जळाले   मी कोणत्या कुळाची,आले कुठून येथे माझे मला कळेना ही वाट कोणती ते   मी मंत्रमुग्ध झाले पाहून त्या सुखाला हातात येत गेले आकाश, मेघमाला   वर्षाव कौतुकाचा मी ओंजळीत घेता आजन्म तृप्त झाले या सोहळ्यात आता   © प्रभा सोनवणे “सोनवणे हाऊस”, ३४८ सोमवार पेठ, पंधरा ऑगस्ट चौक, विश्वेश्वर बँकेसमोर, पुणे 411011 मोबाईल-९२७०७२९५०३,  email- sonawane.prabha@gmail.com...
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मराठी साहित्य – मराठी आलेख – ☆ नव वर्ष विशेष -आज ह्या इंग्रजी वर्षाचा शेवटचा दिवस… ☆ – सुश्री आरुशी दाते

सुश्री आरुशी दाते ( नव वर्ष की पूर्व संध्या पर  सुश्री आरूशी दाते जी  का  एक आलेख आज ह्या इंग्रजी वर्षाचा शेवटचा दिवस... )   ☆ आज ह्या इंग्रजी वर्षाचा शेवटचा दिवस...  ☆   ह्या वर्षी जीवनात अनेक चढ उतार पाहिले, भिन्न भिन्न लोकांना भेटले, काही लोकं सोडून गेले(का ते मला माहित नाही), काही नवीन लोक जोडले गेले, काही जुनेच लोक नव्याने समोर आले... खूप सारे अनुभव गाठीशी आले, कोणी चिखलफेक केली तर कोणी कौतुकाची फुलं उधळली, खूप गोष्टी शिकायला मिळाल्या... मला माझा छंद जोपासता आला... अपेक्षित, अनपेक्षीत प्रसंगांना सामोरं जावं लागलं, कधी कधी पार खचून गेले, कधी कधी तब्येतीनं नाराजी व्यक्त केली... हाती घेतलेली काही कामं सोडून द्यावी लागली, तर नवीन कामांची जबाबदारी खांद्यावर घ्यावी लागली... पण हा प्रवास कुठेही थांबला नाही... मानसिक, शारीरिक, भावनिक आणि आर्थिक बाजू सांभाळताना होणारी ससेहोलपट आठवली की अंगावर शहारा येतो... अनेक संकटे आली तरी, सुखाच्या क्षणांनी संकटांना तोंड देण्यासाठी पंखात बळ दिले... ह्याच सुखाच्या क्षणांना सोबत घेऊन आणि हे सुखाचे क्षण माझ्या आयुष्यात आणणारे माझे पती, माझी मुलगी, सासरचे कुटुंबीय, माहेरचे कुटुंबीय, नातलग...
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हिन्दी साहित्य – आलेख ☆ नव वर्ष विशेष – नव वर्ष पर ☆ श्रीमती कल्पना श्रीवास्तव

श्रीमती कल्पना श्रीवास्तव ( नव वर्ष पर प्रस्तुत है श्रीमती कल्पना श्रीवास्तव जी का विशेष आलेख "नव वर्ष पर"।) ☆ नव वर्ष पर ☆ नवल वर्ष का धवल दिवस यह,  राही तुमको मंगलमय हो कीर्ति मान यश से परिपूरित, जीवन का आलोक अमर हो नये साल के पहले दिन सूरज की पहली किरण हम सबके जीवन में, सारे विश्व के लिए शांति, सुरक्षा, प्रसन्नता, समृद्धि और उन्नति लेकर आये यही कामनायें हैं. यद्यपि चिंतन योग्य शाश्वत सच तो यह है कि सूरज तो हर दिन उसी ऊर्जा के साथ ऊगता है, दरअसल यह हम होते हैं जो किसी तारीख को अपने व्यवहार और कामो से स्वर्ण अक्षरो में अंकित कर देते हैं, या फिर उस पर कालिख पोत डालते हैं. ये स्वर्णाक्षरों में अंकित दिन या कालिमा लिये हुये तारीखें इतिहास के दस्तावेजी पृष्ठ बन कर रह जाते हैं. नववर्ष का अर्थ होता है  कैलेंडर में साल का बदलाव. समय को हम सेकेण्डों, मिनटों, घंटों, दिनों, सप्ताहों, महीनों और सालों में गिनते हैं. वर्ष जिसकी तारीखो...
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हिन्दी साहित्य – कविता ☆ नव वर्ष विशेष – नव वर्ष का नव सोपान है ☆ श्री अरुण कुमार डनायक

श्री अरुण कुमार डनायक   (श्री अरुण कुमार डनायक जी  की  नव वर्ष 2020 पर एक कविता  नव वर्ष का नव सोपान है .)      ☆ नव वर्ष का नव सोपान है ☆    नव प्रात लिए, नव आस लिए नव वर्ष का नव सोपान है नव प्रीत लिए, नव भाव लिए पुरातन का अवसान है ।   है बीता जो भी अशुभ उसे रखना नहीं है स्मरण में नव ऊर्जा धारण करना है और नव उत्ताप भी नव जागरण में ।   हो मन में स्नेह का नव अंकुर नव उच्छ्वास का मलय बहे क्रोध, अहं, द्वेष, विराग छोड़ नर-नार जगत में सदय रहे ।   ज्ञान, चेतना, मति की धारा नव श्रृंखला में प्रवाहित हो नव उद्दोग से नव वर्ष में जन-जन उन्नत, पुलकित हो ।   ©  श्री अरुण कुमार डनायक 42, रायल पाम, ग्रीन हाइट्स, त्रिलंगा, भोपाल- 39 (श्री अरुण कुमार डनायक, भारतीय स्टेट बैंक से सेवानिवृत्त अधिकारी हैं  एवं  गांधीवादी विचारधारा से प्रेरित हैं। )...
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हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ तन्मय साहित्य # 28 – ☆ डॉ. सुरेश कुशवाहा ‘तन्मय’

डॉ  सुरेश कुशवाहा ‘तन्मय’ (अग्रज  एवं वरिष्ठ साहित्यकार  डॉ. सुरेश कुशवाहा ‘तन्मय’ जी  जीवन से जुड़ी घटनाओं और स्मृतियों को इतनी सहजता से  लिख देते हैं कि ऐसा लगता ही नहीं है कि हम उनका साहित्य पढ़ रहे हैं। अपितु यह लगता है कि सब कुछ चलचित्र की भांति देख सुन रहे हैं।  आप प्रत्येक बुधवार को डॉ सुरेश कुशवाहा ‘तन्मय’जी की रचनाएँ पढ़ सकेंगे। आज के साप्ताहिक स्तम्भ  “तन्मय साहित्य ”  में  प्रस्तुत है  अग्रज डॉ सुरेश  कुशवाहा जी के आयु के 71 वर्ष के शुभारंभ पर कविता   “साठोत्तरीय.......”। ) ☆  साप्ताहिक स्तम्भ – तन्मय साहित्य – # 28☆ ☆ साठोत्तरीय....... ☆     इकहत्तर की वय में, वही चेतना, प्राण वही है परिवर्तित मौसम में भी, मन में अरमान वही है।   है, उमंग - उत्साह, बदन  में  चाहे  दर्द  भरा  हो पीड़ा की पगडंडी यदि, मंजिल का एक सिरा हो पा लेंगे चलते - चलते, जो सोचा यहीं कहीं है. परिवर्तित----------   आत्म शक्ति और  संकल्पों का, लेते हुए सहारा आशाओं के बल पर, टिका हुआ विश्वास हमारा शिथिल शिराएं हुई, किन्तु हम शक्तिहीन नहीं हैं परिवर्तित-----------   कई ...
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