image_print

हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ डॉ. मुक्ता का संवेदनात्मक साहित्य # 32 ☆ समस्या नहीं : संभावना  ☆ – डॉ. मुक्ता

डॉ.  मुक्ता (डा. मुक्ता जी हरियाणा साहित्य अकादमी की पूर्व निदेशक एवं  माननीय राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित/पुरस्कृत हैं।  साप्ताहिक स्तम्भ  “डॉ. मुक्ता का संवेदनात्मक  साहित्य” के माध्यम से आप  प्रत्येक शुक्रवार डॉ मुक्ता जी की उत्कृष्ट रचनाओं से रूबरू हो सकेंगे। आज प्रस्तुत है डॉ मुक्ता जी का आलेख “खामोशी और आबरू”.  डॉ मुक्ता जी का यह विचारोत्तेजक एवं प्रेरक लेख हमें  जीवन के कठिन से कठिन समय  में विपरीत परिस्थितियों में भी सम्मानपूर्वक जीने का लक्ष्य निर्धारित करने हेतु प्रेरणा देता है। इस आलेख का कथन “जीवन में हम कभी हारते नहीं, जीतते या सीखते हैं अर्थात् सफलता हमें विजय देती है और पराजय अनुभव अथवा बहुत बड़ी सीख... जो हमें गलत दिशा की ओर बढ़ने से रोकती है। ” ही इस आलेख का सार है। डॉ मुक्त जी की कलम को सादर नमन।  कृपया इसे गंभीरता से आत्मसात करें एवं अपने विचार कमेंट बॉक्स में अवश्य  दर्ज करें )     ☆ साप्ताहिक स्तम्भ – डॉ. मुक्ता का संवेदनात्मक साहित्य – # 32☆ ☆ समस्या नहीं : संभावना ☆ 'जीवन में...
Read More

हिन्दी साहित्य – मनन चिंतन ☆ संजय दृष्टि  – वसंत पंचमी विशेष – माँ शारदा शतश: नमन  ☆ श्री संजय भारद्वाज

श्री संजय भारद्वाज  (श्री संजय भारद्वाज जी – एक गंभीर व्यक्तित्व । जितना गहन अध्ययन उतना ही  गंभीर लेखन।  शब्दशिल्प इतना अद्भुत कि उनका पठन ही शब्दों – वाक्यों का आत्मसात हो जाना है।साहित्य उतना ही गंभीर है जितना उनका चिंतन और उतना ही उनका स्वभाव। संभवतः ये सभी शब्द आपस में संयोग रखते हैं  और जीवन के अनुभव हमारे व्यक्तित्व पर अमिट छाप छोड़ जाते हैं।  हम आपको प्रति रविवार उनके साप्ताहिक स्तम्भ – संजय उवाच शीर्षक  के अंतर्गत उनकी चुनिन्दा रचनाएँ आप तक  पहुँचा रहे हैं। सप्ताह के अन्य दिवसों पर आप उनके मनन चिंतन को  संजय दृष्टि के अंतर्गत पढ़ सकते हैं। )  ☆ संजय दृष्टि  – वसंत पंचमी विशेष - माँ शारदा शतश: नमन  ☆ [1] शुभ्र परिधानधारिणी, पद्मासना हर शब्द, हर अक्षर तुम्हें अर्पण, उज्ज्वल हंस पर विराजमान दुग्धधवला महादेवी, माँ शारदा को शतश: नमन। [2] मानसरोवर का अनहद शिवालय का नाद कविता, अयोध्या का चरणामृत मथुरा का प्रसाद कविता, अंधे की लाठी गूँगे का संवाद कविता, बारम्बार करता नमन 'संजय' माँ सरस्वती साक्षात कविता। [3] मौसम तो वही था, यह बात अलग है तुमने एकटक निहारा स्याह पतझड़, मेरी आँखों ने चितेरे रंग-बिरंगे बसंत.., बुजुर्ग...
Read More

हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ साहित्य निकुंज # 32 ☆ वसंत पंचमी विशेष – बसंत ☆ डॉ. भावना शुक्ल

डॉ भावना शुक्ल (डॉ भावना शुक्ल जी  (सह संपादक ‘प्राची ‘) को जो कुछ साहित्यिक विरासत में मिला है उसे उन्होने मात्र सँजोया ही नहीं अपितु , उस विरासत को गति प्रदान  किया है। हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि माँ सरस्वती का वरद हस्त उन पर ऐसा ही बना रहे। आज प्रस्तुत है उनकी वसंत पंचमी  पर्व पर विशेष कविता  ‘ बसंत ’।)   ☆ साप्ताहिक स्तम्भ  # 32 – साहित्य निकुंज ☆ ☆ बसंत ☆ माघ माह की पंचमी, आया है ऋतु राज, सरस्वती को पूजते , लोग घरों में आज।।   बसंत बसंत आता है मन को लुभाता है चहुँ ओर फ़ैल रही है हरियाली झूम रही है डाली डाली धरती ने हरीतिमा का किया शृंगार मन में उठी उमंग की फुहार प्रेम प्यार की कोपलें फूटी खिलने लगे फूल और कलियाँ छा गई सब ओर खुशियाँ फ़ैली है बसंत की महक गूंज रही पक्षियों की चहक जीवन में खिलने लगे नये रंग लगा लिया कलियों ने अंग देखो आ गया बसंत आ गया बसंत।   © डॉ.भावना शुक्ल सहसंपादक…प्राची wz/21 हरि सिंह पार्क, मुल्तान नगर, पश्चिम विहार (पूर्व ), नई दिल्ली –110056 मोब  9278720311 ईमेल : bhavanasharma30@gmail.com ...
Read More

मराठी साहित्य ☆ वार्ता ☆ शब्दांचा प्रवास हृदयपासून हृदयपर्यन्त – कविराज विजय यशवंत सातपुते ☆ वार्ताकार – श्री काशिराम खरडे

कविराज विजय यशवंत सातपुते (समाज , संस्कृति, साहित्य में  ही नहीं अपितु सोशल मीडिया में गहरी पैठ रखने वाले  कविराज विजय यशवंत सातपुते जी  की  सोशल मीडिया  की  टेगलाइन “माणूस वाचतो मी……!!!!” ही काफी है उनके बारे में जानने के लिए। जो साहित्यकार मनुष्य को पढ़ सकता है वह कुछ भी और किसी को भी पढ़ सकने की क्षमता रखता है।आप कई साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक संस्थाओं से जुड़े हुए हैं। आज प्रस्तुत है  मोहरली लेखणी साहित्य समुह का विशेष  वार्ता कार्यक्रम  आठवांच्या हिंदोळ्यावर... काशिराम खरडे सोबत...। किसी भी विशिष्ट व्यक्ति से वार्ता एक कला है। श्री काशिराम खरडे जी वास्तव में इस कला में दक्ष हैं। हम इस विशेष वार्ता के लिए कविराज विजय यशवंत सातपुते जी, मोहरली लेखणी साहित्य समुह एवं श्री काशिराम खरडे जी  के हृदय से आभारी हैं ।   ☆ मोहरली लेखणी साहित्य समुह प्रस्तुति -  आठवांच्या हिंदोळ्यावर... काशिराम खरडे सोबत... ☆ नमस्कार मोहरलीकर... आज आपण _आठवांच्या हिंदोळ्यावर... काशिराम खरडे सोबत..._ या आपल्या साप्ताहिक उपक्रमाअंतर्गत एका अशा साहित्यिकांशी संवाद साधणार आहोत, जे मागिल तीन दशकांहून अधिक काळ साहित्यसेवा...
Read More

English Literature – Poetry ☆ Thoonth –The Tree Stump ☆ Captain Pravin Raghuvanshi, NM

Captain Pravin Raghuvanshi, NM (We are extremely thankful to Captain Pravin Raghuvanshi Ji for sharing his literary and artworks with e-abhivyakti.  An alumnus of IIM Ahmedabad, Capt. Pravin has served the country at national as well international level in various fronts. Presently, working as Senior Advisor, C-DAC in Artificial Intelligence and HPC Group; and involved in various national-level projects. We present an English Version of Shri Sanjay Bhardwj’s Hindi Poetry “ठूंठ” published previously as☆ संजय दृष्टि  – ठूँठ ☆  We extend our heartiest thanks to Captain Pravin Raghuvanshi Ji for this beautiful translation.) ☆ Thoonth --the Tree Stump☆   Every tree stump can grow Green shoots Innocent sprouts Blossoming buds Rainbow hues flowers, With chirping birds perched on them... All it needs A little manure A little water And plenty of love...   *Similarly* Every person desires An assuring pat on the back, Soothing delectable fingers, Soulful affectionate  eyes, And, encouraging words, Everyone has his own definite role... You all stick together *In drive to green*  the stumps And I will make sure *No one ever becomes a* stump. © Captain Pravin Raghuvanshi, NM ...
Read More

हिन्दी साहित्य☆ साप्ताहिक स्तम्भ – इंद्रधनुष # 23 ☆ वसंत पंचमी विशेष – सरस्वती वंदना ☆ श्री संतोष नेमा “संतोष”

श्री संतोष नेमा “संतोष”   (आदरणीय श्री संतोष नेमा जी  कवितायें, व्यंग्य, गजल, दोहे, मुक्तक आदि विधाओं के सशक्त हस्ताक्षर हैं. धार्मिक एवं सामाजिक संस्कार आपको विरासत में मिले हैं. आपके पिताजी स्वर्गीय देवी चरण नेमा जी ने कई भजन और आरतियाँ लिखीं थीं, जिनका प्रकाशन भी हुआ है. 1982 से आप डाक विभाग में कार्यरत हैं. आपकी रचनाएँ राष्ट्रीय पत्र पत्रिकाओं में लगातार प्रकाशित होती रहती हैं। आप  कई सम्मानों / पुरस्कारों से सम्मानित/अलंकृत हैं.    “साप्ताहिक स्तम्भ – इंद्रधनुष” की अगली कड़ी में प्रस्तुत है वसंत पंचमी  पर विशेष  कविता / गीत “सरस्वती वंदना”. आप श्री संतोष नेमा जी  की रचनाएँ प्रत्येक शुक्रवार पढ़  सकते हैं . )  ☆ साहित्यिक स्तम्भ – इंद्रधनुष # 23 ☆ ☆ वसंत पंचमी विशेष – सरस्वती वंदना ☆   चारु      हासिनी     वाग्वादिनी। जयति जयति जय हंस वाहिनी।।   शीश मुकुट मोहक मणि सोहे। गल  मोतिन  की  माला  मोहे।। ज्ञान-बुद्धि   दे   ज्ञान   दायिनी। जयति जयति जय हंस वाहिनी।   धूप-दीप, फल  मेवा  अर्पित। भक्ति-भाव से विनय समर्पित।। महका  दे  उर  पुष्प  वाहिनी।। जयति जयति जय हंस वाहिनी।।   शब्द-शब्द,कविता-आराधन। नव गीतों का करे...
Read More

योग-साधना LifeSkills/जीवन कौशल ☆ Three HAPPINESS Mantras – Video #6 ☆ Shri Jagat Singh Bisht

Shri Jagat Singh Bisht (Master Teacher: Happiness & Well-Being, Laughter Yoga Master Trainer, Author, Blogger, Educator, and Speaker.)  ☆ Three HAPPINESS Mantras  ☆  Video Link >>>> LAUGHTER YOGA: VIDEO #6 We are sharing three happiness mantras for creating instant joy. If you feel low at any time, you may chant and enact these mantras and feel instant cheer. Chant the mantras with children, seniors or peers at home, workplace or in your community to share happiness and joy. Happiness Mantra #1: Very Good, Very Good, Yay! Happiness Mantra #2: I am good, very good, yay! Happiness Mantra #3: hoho haha.. Mantra #1 in other languages: Japanese: Yatta yatta yay! Russian: Harasho harasho yay! Italian: Molto bene molto bene yay! Spanish: Mui bien mui bien yay! Hindi: Bahut achche bahut achche yay! Mantra #2, other versions: I am healthy, very healthy, yay! I am strong, very strong, yay! I am good, very good, yay! I am smart, very smart, yay!   Our Fundamentals: The Science of Happiness (Positive Psychology), Meditation, Yoga, Spirituality and Laughter Yoga. We conduct talks, seminars, workshops, retreats, and training. Email: lifeskills.happiness@gmail.com LifeSkills A Pathway to Authentic Happiness, Well-Being...
Read More

आध्यात्म/Spiritual – श्रीमद् भगवत गीता – पद्यानुवाद – दशम अध्याय (6) प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’

श्रीमद् भगवत गीता हिंदी पद्यानुवाद – प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’ दशम अध्याय ( विभूति योग) महर्षयः सप्त पूर्वे चत्वारो मनवस्तथा । मद्भावा मानसा जाता येषां लोक इमाः प्रजाः ।।6।।   पुरा सप्त ऋषि चार मनु उपजे मम संकल्प जिनसे इस संसार में वर्णित सृष्टि अकल्प।।6।।   भावार्थ :  सात महर्षिजन, चार उनसे भी पूर्व में होने वाले सनकादि तथा स्वायम्भुव आदि चौदह मनु- ये मुझमें भाव वाले सब-के-सब मेरे संकल्प से उत्पन्न हुए हैं, जिनकी संसार में यह संपूर्ण प्रजा है।।6।।   The seven great sages, the ancient four and also the Manus, possessed of powers like Me (on account of their minds being fixed on Me), were born of (My) mind; from them are these creatures born in this world.।।6।।   © प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’  ए १ ,विद्युत मण्डल कालोनी, रामपुर, जबलपुर vivek1959@yahoo.co.in...
Read More

हिन्दी साहित्य – ☆ साप्ताहिक स्तम्भ – संवाद # 18 ☆ लघुकथा – साजिश ☆ डॉ. ऋचा शर्मा

डॉ. ऋचा शर्मा (डॉ. ऋचा शर्मा जी को लघुकथा रचना की विधा विरासत में  अवश्य मिली है  किन्तु ,उन्होंने इस विधा को पल्लवित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी . उनकी लघुकथाएं और उनके पात्र हमारे आस पास से ही लिए गए होते हैं , जिन्हें वे वास्तविकता के धरातल पर उतार देने की क्षमता रखती हैं. अब आप  ई-अभिव्यक्ति में  प्रत्येक गुरुवार को उनकी उत्कृष्ट रचनाएँ पढ़ सकेंगे। आज प्रस्तुत है उनकी एक लघुकथा  “साजिश”।  समाज में व्याप्त इस कटु सत्य को पीना इतना आसान नहीं है किन्तु,  सत्य आखिर सत्य तो है और नकारा नहीं जा सकता।  डॉ ऋचा जी की रचनाएँ अक्सर यह अहम्  भूमिकाएं निभाती हैं । डॉ ऋचा शर्मा जी की लेखनी को ऐसी रचना रचने के लिए सादर नमन। ) ☆ साप्ताहिक स्तम्भ – संवाद – # 18 ☆ ☆ लघुकथा –साजिश ☆ बुढ़ापा ... उम्र के इस दौर में वे दोनों किसी तरह जी रहे थे। एक बेटी और दो बेटों का भरा-पूरा परिवार था। वह घर जिसमें हमेशा...
Read More

Weekly column ☆ Poetic World of Ms. Neelam Saxena Chandra # 22 – A Plea to Santa ☆ Ms. Neelam Saxena Chandra

Ms Neelam Saxena Chandra   (Ms. Neelam Saxena Chandra ji is a well-known author. She has been honoured with many international/national/ regional level awards. We are extremely thankful to Ms. Neelam ji for permitting us to share her excellent poems with our readers. We will be sharing her poems on every Thursday. Ms. Neelam Saxena Chandra ji is  an Additional Divisional Railway Manager,Indian Railways, Pune Division. Her beloved genre is poetry. Today we present her poem “A Plea to Santa”.  This poem  is from her book “The Frozen Evenings”.) ☆ Weekly column ☆ Poetic World of Ms. Neelam Saxena Chandra # 20☆ ☆  A Plea to Santa ☆   Santa, Santa Do not deny my wish, Give me a Christmas gift And let this Christmas eve be different please...   Santa, Santa I want everyone to be happy and glee: No tears, no sorrow; Only contentment and ecstasy...   Santa, Santa Let there be no gloom; Please grant me a boon, Let joy and prosperity bloom...   Santa, Santa Let there be love and care; No biases of caste, creed and race, Let peace prevail everywhere...   Santa, Santa Let us all join...
Read More
image_print