श्रीमद् भगवत गीता

हिंदी पद्यानुवाद – प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’

दशम अध्याय

(भगवान द्वारा अपनी विभूतियों और योगशक्ति का कथन)

 

आदित्यानामहं विष्णुर्ज्योतिषां रविरंशुमान्‌।

मरीचिर्मरुतामस्मि नक्षत्राणामहं शशी ।।21।।

 

आदित्यों में विषय हूँ दीप्तिवान में सूर्य

मरूतों मारिचि हूँ नक्षत्रों में शशि रूप।।21।।

 

भावार्थ :  मैं अदिति के बारह पुत्रों में विष्णु और ज्योतियों में किरणों वाला सूर्य हूँ तथा मैं उनचास वायुदेवताओं का तेज और नक्षत्रों का अधिपति चंद्रमा हूँ।।21।।

 

Among the (twelve) Adityas, I am Vishnu; among the luminaries, the radiant sun; I am Marichi among the (seven or forty-nine) Maruts; among stars the moon am I.।।21।।

 

प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’

ए १ ,विद्युत मण्डल कालोनी, रामपुर, जबलपुर

vivek1959@yahoo.co.in

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