श्री संजय भारद्वाज

(श्री संजय भारद्वाज जी – एक गंभीर व्यक्तित्व । जितना गहन अध्ययन उतना ही  गंभीर लेखन।  शब्दशिल्प इतना अद्भुत कि उनका पठन ही शब्दों – वाक्यों का आत्मसात हो जाना है।साहित्य उतना ही गंभीर है जितना उनका चिंतन और उतना ही उनका स्वभाव। संभवतः ये सभी शब्द आपस में संयोग रखते हैं  और जीवन के अनुभव हमारे व्यक्तित्व पर अमिट छाप छोड़ जाते हैं।  हम आपको प्रति रविवार उनके साप्ताहिक स्तम्भ – संजय उवाच शीर्षक  के अंतर्गत उनकी चुनिन्दा रचनाएँ आप तक  पहुँचा रहे हैं। सप्ताह के अन्य दिवसों पर आप उनके मनन चिंतन को  संजय दृष्टि के अंतर्गत पढ़ सकते हैं। ) 

? संजय दृष्टि – लघुकथा – गिरहकट  ??

पत्रिका पलटते हुए आज फिर एक पृष्ठ पर वह ठिठक गया। यह तो उसकी रचना थी जो कुछ उलजलूल काँट-छाँट और भद्दे पैबंदों के साथ उसके एक परिचित के नाम से छपी थी। यह पहली बार नहीं था। वह इस ‘इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी थेफ्ट’ का आदी हो चला था। वैसे इससे उसकी साख पर कोई असर कभी न पड़ना था, न पड़ा। उन उठाईगीरों की साख तो थी ही नहीं, जो कुछ भी थी, उसमें इन हथकंडों से कभी बढ़ोत्तरी भी नहीं हुई।

आज उसने अपनी नई रचना लिखी। पत्रिका के संपादक को भेजते हुए उसे उठाईगीरे याद आए और उसका मन, उनके प्रति चिढ़ के बजाय दया से भर उठा। अपनी रचना में कुछ काँट-छाँट कर और अपेक्षाकृत कम भद्दे पैबंद लगाकर उसने एक और रचना तैयार की। साथ ही संपादक को लिखा कि उठाईगीरों को परिश्रम न करना पड़े, अतः ओरिजिनल के साथ डुप्लीकेट भी संलग्न हैं। दोनों के शीर्षक भी भिन्न हैं ताकि बेचारों को नाहक परेशानी न झेलना पड़े।

संपादक ने देखा, मूल रचना का शीर्षक था, ‘गिरह‘ और डुप्लीकेट पर लिखा था- ‘गिरहकट।’

©  संजय भारद्वाज

अध्यक्ष– हिंदी आंदोलन परिवार  सदस्य– हिंदी अध्ययन मंडल, पुणे विश्वविद्यालय  संपादक– हम लोग  पूर्व सदस्य– महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी ☆  ट्रस्टी- जाणीव, ए होम फॉर सीनियर सिटिजन्स 

मोबाइल– 9890122603

संजयउवाच@डाटामेल.भारत

writersanjay@gmail.com

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडल (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’/श्री जय प्रकाश पाण्डेय ≈

Please share your Post !

Shares
3 1 vote
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest

1 Comment
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments
माया कटारा

अत्यंत सटीक व्यंग्यात्मक लघुकथा – दो शीर्षकों में विभक्त- गिरह और गिरहकट लाजवाब ,आसान तरीका .…👌💐