॥ श्री रघुवंशम् ॥
॥ महाकवि कालिदास कृत श्री रघुवंशम् महाकाव्य का हिंदी पद्यानुवाद : द्वारा प्रो. चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’॥
☆ “श्री रघुवंशम्” ॥ हिन्दी पद्यानुवाद सर्ग #15 (6 – 10) ॥ ☆
रघुवंश सर्ग : -15
दिया राम ने शत्रुघ्न को समुचिंत आदेश।
मुनियों के कल्याण हित हो निर्विघ्न प्रदेश।।6।।
हर विशेष, सामान्य से निश्चित होता नेक।
अतः शत्रु-संहार हित रघुकुल का कोई एक।।7।।
चले शत्रुघ्न राम का लेकर आशीर्वाद।
रथ पर चढ़ निर्भीक मन पुष्प पूर्ण भू-भाग।।8।।
राक्षस-बध हित शत्रुध्न ही तो थे पर्याप्त।
किन्तु राम ने सेना भी देना समझा आप्त।।9।।
राह दिखाते मुनि चले रथ अति शोभावान।
बालखिल्य से सूर्य का रथ ज्यों दिखे महान।।10।।
© प्रो. चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’
A १, विद्युत मण्डल कालोनी, रामपुर, जबलपुर. म.प्र. भारत पिन ४८२००८
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडल (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’/श्री जय प्रकाश पाण्डेय ≈