॥ श्री रघुवंशम् ॥
॥ महाकवि कालिदास कृत श्री रघुवंशम् महाकाव्य का हिंदी पद्यानुवाद : द्वारा प्रो. चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’॥
☆ “श्री रघुवंशम्” ॥ हिन्दी पद्यानुवाद सर्ग #15 (16 – 20) ॥ ☆
रघुवंश सर्ग : -15
था चिताग्नि सा रूप कुछ धूमिल मयदुर्गन्ध।
अग्निलपट से बाल थे, मांस-मखन स्वच्छंद।।16।।
शूल रहित पाकर उसे घेर लिया तत्काल।
क्योंकि वह ही उचित था, हर प्रकार का काले।।17।।
ब्रह्मा ने डर कर तुम्हें भेजा मम आहार
क्योंकि आज भोजन रहित था मेरा भण्डार।।18।।
धमका के शत्रुध्न को राक्षस विविध प्रकार।
उन्हें मारने के लिये तरू एक लिया उखाड़।।19।।
खण्ड हुआ वह वृक्ष जब लगा शत्रुध्न तीर।
पुष्परेणु भर छू सकी उड़ कर दुष्ट शरीर।।20।।
© प्रो. चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’
A १, विद्युत मण्डल कालोनी, रामपुर, जबलपुर. म.प्र. भारत पिन ४८२००८
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडल (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’/श्री जय प्रकाश पाण्डेय ≈