॥ श्री रघुवंशम् ॥
॥ महाकवि कालिदास कृत श्री रघुवंशम् महाकाव्य का हिंदी पद्यानुवाद : द्वारा प्रो. चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’॥
☆ “श्री रघुवंशम्” ॥ हिन्दी पद्यानुवाद सर्ग #15 (46 – 50) ॥ ☆
रघुवंश सर्ग : -15
जब पुष्पक पर बैठ कर शस्त्र सहित चले राम।
यह आकाशवाणी हुई सहसा बिन विश्राम।।46।।
कहीं प्रजा में हो रहा कोई भ्रष्टाचार।
उसे ज्ञात कर हटाओ तब उतरेगा भार।।47।।
यह वाणी सुन खोजने करने दूर विकार।
पुष्पक से ही बढ़ चले राम सजग सविचार।।48।।
देखा तरू शाखा से कोई अधोमुखी तपवान।
अग्निधूम से रक्त वत नयन, व्यक्ति अनजान।।49।।
ज्ञात हुआ वह शूद्र था, शम्बूक जिसका नाम।
था तप का उद्देश्य भी पाना स्वर्गिक-धाम।।50।।
© प्रो. चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’
A १, विद्युत मण्डल कालोनी, रामपुर, जबलपुर. म.प्र. भारत पिन ४८२००८
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडल (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’/श्री जय प्रकाश पाण्डेय ≈