॥ श्री रघुवंशम् ॥
॥ महाकवि कालिदास कृत श्री रघुवंशम् महाकाव्य का हिंदी पद्यानुवाद : द्वारा प्रो. चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’॥
☆ “श्री रघुवंशम्” ॥ हिन्दी पद्यानुवाद सर्ग #15 (71 – 75) ॥ ☆
रघुवंश सर्ग : -15
कवि ने कहा ये तनय है सीता-प्राणाधार।
आत्मज दोनों आपके, इन्हें करें स्वीकार।।71।।
राम ने कहा तात तव वधू सिय परम पवित्र।
जनता के संदेह का कारण असुर चरित्र।।72।।
जन मन का संदेह यदि सिया करे निर्मूल।
तो स्वागत करता महल सिया सहित दो फूल।।73।।
पाकर स्वीकृति राम की मुनि ने शिष्यों साथ।
बुलावाया सीता वहाँ आश्रम से कह बात।।74।।
अगले दिन दरबार में करने अनुसंधान।
नगर-वासियों मध्य मुनि आये सहित विधान।।75।।
© प्रो. चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’
A १, विद्युत मण्डल कालोनी, रामपुर, जबलपुर. म.प्र. भारत पिन ४८२००८
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडल (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’/श्री जय प्रकाश पाण्डेय ≈