॥ श्री रघुवंशम् ॥
॥ महाकवि कालिदास कृत श्री रघुवंशम् महाकाव्य का हिंदी पद्यानुवाद : द्वारा प्रो. चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’॥
☆ “श्री रघुवंशम्” ॥ हिन्दी पद्यानुवाद सर्ग #17 (11 – 15) ॥ ☆
रघुवंश सर्ग : -17
बाजों ने बजकर किया सुखप्रद घोष महान।
जैसे घोषित किया हो सतत अतिथि-कल्याण।।11।।
वयोवृद्ध जन ने किया जाति-प्रथा अनुसार।
आरती ले दूर्वा-कमल दल औं पीपल छाल।।12।।
कुछ पुरोहितों ने किया अथर्व-मंत्रोच्चार।
अतिथि अजेय हो कर सकें ग्रहण नृपति का भार।।13।।
सिर पर यों शोभित हुई पड़ी नेक जलधार।
जैसे शिव के शीश पै हो गंगा की धार।।14।।
फैले चारों ओर फिर चारण के संगीत।
ज्यों बादल की प्रशंसा में चातक के गीत।।15।।
© प्रो. चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’
A १, विद्युत मण्डल कालोनी, रामपुर, जबलपुर. म.प्र. भारत पिन ४८२००८
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडल (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’/श्री जय प्रकाश पाण्डेय ≈