श्री अखिलेश श्रीवास्तव
(ई-अभिव्यक्ति में श्री अखिलेश श्रीवास्तव जी का स्वागत। विज्ञान, विधि एवं पत्रकारिता में स्नातक। 1978 से वकालत, स्थानीय समाचार पत्रों में सम्पादन कार्य। स्वांतः सुखाय समसामयिक विषयों पर लेख एवं कविताएं रचित/प्रकाशित। प्रस्तुत है आपकी एक भावप्रवण कविता “चिठ्ठी”।)
☆ कविता – चिठ्ठी ☆ श्री अखिलेश श्रीवास्तव ☆
दूर बसे अपने लोगों की
खैर खबर लाती थी चिठ्ठी ।
पोस्टमेन घर घर में जाकर
पहुंचाते थे सबकी चिठ्ठी ।।
अपने लोगों की यादों को
संजोकर रखती थी चिठ्ठी ।
घर में उत्सुकता बढ़ जाती
जब आती थी कोई चिठ्ठी ।।
अपनों के आपस के प्यार की
अभिव्यक्ति होती थी चिठ्ठी ।
शब्दों के मोती की माला
होती थी ये प्यारी चिठ्ठी ।।
प्रेमी-प्रेयसी के प्यार की
गहराई होती थी चिठ्ठी ।
रिश्तों के प्यारे सम्बन्धों
को दर्शाती थी ये चिठ्ठी ।।
परीक्षा के परिणामों की
खबर हमें लाती थी चिठ्ठी ।
नौकरी लग जाने की खबर
खुशी से लेकर आती चिठ्ठी ।।
रिश्ते नातों के विवाह की
खबर हमें पहुंचाती चिठ्ठी ।
नये शिशु के आने का भी
संदेशा लाती थी चिठ्ठी ।।
इंतजार पोस्टमेन भैया का
करवाती थी हमें ये चिट्ठी ।
अपने बीते हुए समय की
याद दिलाती है ये चिट्ठी ।।
इतिहास बनकर हमेशा
सबके काम में आती चिठ्ठी
लिपिबद्ध होकर हम सबकी
यादों में बस जाती चिठ्ठी।।
एक समय था जब हमारी
प्राण वायु होती थी चिठ्ठी ।
फिर से हम सबकी सेवा
करना चाहती है ये चिट्ठी ।।
आज सभी से हाथ जोड़कर
विनती करती है ये चिट्ठी ।
फिर से मुझे बना लो अपना
यही आस लगाए चिठ्ठी ।।
© श्री अखिलेश श्रीवास्तव
जबलपुर, मध्यप्रदेश
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडल (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’/श्री जय प्रकाश पाण्डेय ≈