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हिंदी साहित्य – पुस्तक चर्चा ☆ कथा संग्रह – प्रेमार्थ  –  श्री सुरेश पटवा ☆ प्रस्तावना – श्री युगेश शर्मा

श्री सुरेश पटवा          ((श्री सुरेश पटवा जी  भारतीय स्टेट बैंक से  सहायक महाप्रबंधक पद से सेवानिवृत्त अधिकारी हैं और स्वतंत्र लेखन में व्यस्त हैं। आपकी प्रिय विधा साहित्य, दर्शन, इतिहास, पर्यटन आदि हैं। आपकी पुस्तकों  स्त्री-पुरुष “, गुलामी की कहानी, पंचमढ़ी की कहानी, नर्मदा : सौंदर्य, समृद्धि और वैराग्य की  (नर्मदा घाटी का इतिहास) एवं  तलवार की धार को सारे विश्व में पाठकों से अपार स्नेह व  प्रतिसाद मिला है।  ई- अभिव्यक्ति के प्रबुद्ध पाठकों के लिए श्री सुरेश पटवा जी  जी ने अपनी शीघ्र प्रकाश्य कथा संग्रह  "प्रेमार्थ " की कहानियां साझा करने के हमारे आग्रह को स्वीकार किया है। इसके लिए श्री सुरेश पटवा जी  का हृदयतल से आभार। इस सन्दर्भ में आज प्रस्तुत है  सुप्रसिद्ध कहानीकार, नाटककार एवं समीक्षक श्री युगेश शर्मा जी की प्रेमार्थ पुस्तक की प्रस्तावना। अगले सप्ताह से प्रत्येक सप्ताह आप प्रेमार्थ  पुस्तक की एक कहानी पढ़ सकेंगे ।  ) ☆ कथा संग्रह - प्रेमार्थ  –  श्री सुरेश पटवा ☆ प्रस्तावना   - श्री युगेश शर्मा ☆ मैंने साहित्य की विभिन्न विधाओं की लगभग सवा सौ पुस्तकों...
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हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ विवेक की पुस्तक चर्चा # 90 ☆ धर्म और संस्कृति एक विवेचना – श्री रंगा हरि ☆ श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’

श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’  (हम प्रतिष्ठित साहित्यकार श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’जी के आभारी हैं जिन्होने  साप्ताहिक स्तम्भ – “विवेक की पुस्तक चर्चा”शीर्षक से यह स्तम्भ लिखने का आग्रह स्वीकारा। श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र जी, अतिरिक्त मुख्यअभियंता सिविल (म प्र पूर्व क्षेत्र विद्युत् वितरण कंपनी, जबलपुर ) में कार्यरत हैं। तकनीकी पृष्ठभूमि के साथ ही उन्हें साहित्यिक अभिरुचि विरासत में मिली है।  उनका कार्यालय, जीवन एवं साहित्य में अद्भुत सामंजस्य अनुकरणीय है। इस स्तम्भ के अंतर्गत हम उनके द्वारा की गई पुस्तक समीक्षाएं/पुस्तक चर्चा आप तक पहुंचाने का प्रयास  करते हैं । आप प्रत्येक मंगलवार को श्री विवेक जी के द्वारा लिखी गई पुस्तक समीक्षाएं पढ़  सकते हैं । आज प्रस्तुत है  श्री रंगा हरि जी की पुस्तक  “धर्म और संस्कृति -एक विवेचना” पर श्री विवेक जी की पुस्तक चर्चा। ) ☆ साप्ताहिक स्तम्भ – विवेक की पुस्तक चर्चा – धर्म और संस्कृति - एक विवेचना  # 90 ☆   पुस्तक चर्चा पुस्तक – धर्म और संस्कृति एक विवेचना लेखक –  श्री रंगा हरि  ☆ पुस्तक चर्चा ☆ धर्म और संस्कृति -...
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हिन्दी साहित्य – पुस्तक समीक्षा ☆ आत्मकथ्य – मोहल्ला 90 का ☆ श्री आशीष कुमार

श्री आशीष कुमार ( आज हम प्रस्तुत कर रहे हैं सुप्रसिद्ध युवा साहित्यकार श्री आशीष कुमार जी की एक चर्चित पुस्तक "मोहल्ला 90 का" के कुछ अंश जो निश्चित ही आपको कुछ समय के लिए ही सही अवश्य ले जायेंगे 90 के दशक में। )  ☆ पुस्तक समीक्षा ☆ आत्मकथ्य - मोहल्ला 90 का ☆ श्री आशीष कुमार ☆  पुस्तक - मोहल्ला 90 ka लेखक - श्री आशीष kumar प्रकाशक -  ईविन्स पब्लिशिंग मूल्य - पेपरबैक - रु 100 ई - बुक - रु 60 अमेज़न लिंक >> मोहल्ला 90 का इस संस्मरण के मुख्य शीर्षक हैं - अच्छे दिन, दुनिया बदल रही है, त्यौहारों की खुशबू, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गाँव की शादी, खट्टे मीठे दिन स्कूल के, खुशबू लड़कपन के प्यार की, नाम की सवारी, 2020 का जमाना, मुकाबला वापसी के लिए। यादों के झरोखे से " मोहल्ला 90 का" के कुछ अंश - बचपन संभवतय हर व्यक्ति की सबसे पुरानी यादों के साथ जुड़ा हुआ होता है। उसी उम्र में बच्चा पढ़ना शुरु करता है। माता –...
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हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ विवेक की पुस्तक चर्चा # 89 ☆ ककनमठ (उपन्यास) – पंडित छोटेलाल भारद्वाज ☆ श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’

श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’  (हम प्रतिष्ठित साहित्यकार श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’जी के आभारी हैं जिन्होने  साप्ताहिक स्तम्भ – “विवेक की पुस्तक चर्चा”शीर्षक से यह स्तम्भ लिखने का आग्रह स्वीकारा। श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र जी, अतिरिक्त मुख्यअभियंता सिविल (म प्र पूर्व क्षेत्र विद्युत् वितरण कंपनी, जबलपुर ) में कार्यरत हैं। तकनीकी पृष्ठभूमि के साथ ही उन्हें साहित्यिक अभिरुचि विरासत में मिली है।  उनका कार्यालय, जीवन एवं साहित्य में अद्भुत सामंजस्य अनुकरणीय है। इस स्तम्भ के अंतर्गत हम उनके द्वारा की गई पुस्तक समीक्षाएं/पुस्तक चर्चा आप तक पहुंचाने का प्रयास  करते हैं । आप प्रत्येक मंगलवार को श्री विवेक जी के द्वारा लिखी गई पुस्तक समीक्षाएं पढ़  सकते हैं । आज प्रस्तुत है  उपन्यास  “ककनमठ ” पर श्री विवेक जी की पुस्तक चर्चा। ) ☆ साप्ताहिक स्तम्भ – विवेक की पुस्तक चर्चा – उपन्यास – ककनमठ  # 89 ☆   पुस्तक चर्चा पुस्तक – उपन्यास  – ककनमठ  लेखक –  पंडित छोटेलाल भारद्वाज पृष्ठ – 180 मूल्य – 500 रु ☆ पुस्तक चर्चा ☆ उपन्यास – ककनमठ  –  पंडित छोटेलाल भारद्वाज ☆ समीक्षा – श्री विवेक रंजन...
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हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ – सलिल प्रवाह # 40 ☆ पुस्तक चर्चा – जिजीविषा (कहानी संग्रह) – डॉ. सुमनलता श्रीवास्तव☆ चर्चाकार – आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’

आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ (आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ जी संस्कारधानी जबलपुर के सुप्रसिद्ध साहित्यकार हैं। आपको आपकी बुआ श्री महीयसी महादेवी वर्मा जी से साहित्यिक विधा विरासत में प्राप्त हुई है । आपके द्वारा रचित साहित्य में प्रमुख हैं पुस्तकें- कलम के देव, लोकतंत्र का मकबरा, मीत मेरे, भूकंप के साथ जीना सीखें, समय्जयी साहित्यकार भगवत प्रसाद मिश्रा ‘नियाज़’, काल है संक्रांति का, सड़क पर आदि।  संपादन -८ पुस्तकें ६ पत्रिकाएँ अनेक संकलन। आप प्रत्येक सप्ताeह रविवार को  “साप्ताहिक स्तम्भ – सलिल प्रवाह” के अंतर्गत आपकी रचनाएँ आत्मसात कर सकेंगे। आज प्रस्तुत है आचार्य जी  द्वारा  पुस्तक चर्चा  ‘जिजीविषा (कहानी संग्रह) - डॉ. सुमनलता श्रीवास्तव’। ) ☆ साप्ताहिक स्तम्भ – सलिल प्रवाह # 40 ☆  ☆ ☆ पुस्तक चर्चा – जिजीविषा (कहानी संग्रह) - डॉ. सुमनलता श्रीवास्तव ☆  [कृति विवरण: जिजीविषा, कहानी संग्रह, डॉ. सुमनलता श्रीवास्तव, द्वितीय संस्करण वर्ष २०१५, पृष्ठ ८०, १५०/-, आकार डिमाई, आवरण पेपरबैक जेकट्युक्त, बहुरंगी, प्रकाशक त्रिवेणी परिषद् जबलपुर, कृतिकार संपर्क- १०७ इन्द्रपुरी, ग्वारीघाट मार्ग जबलपुर।] जिजीविषा : पठनीय कहानी संग्रह चर्चाकार: आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' हिंदी भाषा और साहित्य से...
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हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ विवेक की पुस्तक चर्चा # 89 ☆ साहबनामा – श्री मुकेश नेमा ☆ श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’

श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’  (हम प्रतिष्ठित साहित्यकार श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’जी के आभारी हैं जिन्होने  साप्ताहिक स्तम्भ – “विवेक की पुस्तक चर्चा”शीर्षक से यह स्तम्भ लिखने का आग्रह स्वीकारा। श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र जी, अतिरिक्त मुख्यअभियंता सिविल (म प्र पूर्व क्षेत्र विद्युत् वितरण कंपनी, जबलपुर ) में कार्यरत हैं। तकनीकी पृष्ठभूमि के साथ ही उन्हें साहित्यिक अभिरुचि विरासत में मिली है।  उनका कार्यालय, जीवन एवं साहित्य में अद्भुत सामंजस्य अनुकरणीय है। इस स्तम्भ के अंतर्गत हम उनके द्वारा की गई पुस्तक समीक्षाएं/पुस्तक चर्चा आप तक पहुंचाने का प्रयास  करते हैं । आप प्रत्येक मंगलवार को श्री विवेक जी के द्वारा लिखी गई पुस्तक समीक्षाएं पढ़  सकते हैं । आज प्रस्तुत है  “साहबनामा ” पर श्री विवेक जी की पुस्तक चर्चा। ) ☆ साप्ताहिक स्तम्भ – विवेक की पुस्तक चर्चा – व्यंग्य संग्रह – साहबनामा # 89 ☆   पुस्तक चर्चा पुस्तक – साहबनामा  लेखक –  श्री मुकेश नेमा   प्रकाशक – मेन्ड्रेक पब्लिकेशन, भोपाल पृष्ठ – २२४ मूल्य – २२५ रु ☆ पुस्तक चर्चा ☆ साहबनामा – श्री मुकेश नेमा ☆ समीक्षा – श्री विवेक रंजन...
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हिन्दी साहित्य – पुस्तक समीक्षा ☆ बँटा हुआ आदमी – डॉ मुक्ता ☆ समीक्षा – सुश्री सुरेखा शर्मा

☆ पुस्तक समीक्षा ☆ बँटा हुआ आदमी – डॉ मुक्ता ☆ समीक्षा – सुश्री सुरेखा शर्मा ☆ पुस्तक - बँटा हुआ आदमी लेखिका -  डाॅ• मुक्ता प्रकाशक ---पेवेलियन बुक्स इन्टरनेशनल अन्सारी रोड़ दरियागंज दिल्ली प्रथम संस्करण --2018 पृष्ठ संख्या ---128 मूल्य ---220 ₹ ☆ संवेदनशील मन की सार्थक अभिव्यक्ति ☆ सुश्री सुरेखा शर्मा -मैं अब   तुम्हारे साथ नहीं रह सकता, तुम विश्वास के काबिल नहीं हो? जब तुम मेरे लिए अपने घरवालों को छोड़ सकती हो तो किसी दूसरे की अंकशायिनी क्यों नहीं ?"  ये पंक्तियाँ हैं भावकथा संग्रह "बँटा हुआ आदमी " की भावकथा 'भंवरा' से।  विवाह के चार साल बाद जब राहुल का मन अपनी पत्नी से भर गया तो उसने राहुल से पूछा, 'मेरा कसूर क्या है?  हमने प्रेम विवाह किया है ,एक दूसरे के प्रति आस्था व अगाध विश्वास रखते हुए ••••और आज तुम मुझ पर यह घिनौना इल्जाम लगा रहे हो••!" तो पुरुष प्रवृत्ति सामने आती है,ये आप कथा में पढ़ेंगे ।यह किसी   प्रकार का सार संक्षेप न होकर कथा की ही पृष्ठभूमि पर उसके...
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हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ विवेक की पुस्तक चर्चा # 88 ☆ तिष्यरक्षिता – डा संजीव कुमार ☆ श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’

श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’  (हम प्रतिष्ठित साहित्यकार श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’जी के आभारी हैं जिन्होने  साप्ताहिक स्तम्भ – “विवेक की पुस्तक चर्चा”शीर्षक से यह स्तम्भ लिखने का आग्रह स्वीकारा। श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र जी, अतिरिक्त मुख्यअभियंता सिविल (म प्र पूर्व क्षेत्र विद्युत् वितरण कंपनी, जबलपुर ) में कार्यरत हैं। तकनीकी पृष्ठभूमि के साथ ही उन्हें साहित्यिक अभिरुचि विरासत में मिली है।  उनका कार्यालय, जीवन एवं साहित्य में अद्भुत सामंजस्य अनुकरणीय है। इस स्तम्भ के अंतर्गत हम उनके द्वारा की गई पुस्तक समीक्षाएं/पुस्तक चर्चा आप तक पहुंचाने का प्रयास  करते हैं । आप प्रत्येक मंगलवार को श्री विवेक जी के द्वारा लिखी गई पुस्तक समीक्षाएं पढ़  सकते हैं । आज प्रस्तुत है  “तिष्यरक्षिता” पर श्री विवेक जी की पुस्तक चर्चा। ) ☆ साप्ताहिक स्तम्भ – विवेक की पुस्तक चर्चा – खण्ड काव्य – तिष्यरक्षिता# 88 ☆   पुस्तक चर्चा पुस्तक – खण्ड काव्य – तिष्यरक्षिता लेखक -  डा संजीव कुमार  IASBN - 9789389856859 वर्ष - २०२० प्रकाशक – इंडिया नेट बुक्स गौतम बुद्ध नगर, दिल्ली पृष्ठ – १३२ मूल्य – २०० रु ☆ पुस्तक चर्चा ☆ खण्ड काव्य –...
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हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ विवेक की पुस्तक चर्चा # 87 ☆ व्यंग्य संग्रह – अब तक ७५, श्रेष्ठ व्यंग्य रचनायें – संपादन – डा लालित्य ललित और डा हरीश कुमार सिंह ☆ श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’

श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’  (हम प्रतिष्ठित साहित्यकार श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’जी के आभारी हैं जिन्होने  साप्ताहिक स्तम्भ – “विवेक की पुस्तक चर्चा”शीर्षक से यह स्तम्भ लिखने का आग्रह स्वीकारा। श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र जी, अतिरिक्त मुख्यअभियंता सिविल (म प्र पूर्व क्षेत्र विद्युत् वितरण कंपनी, जबलपुर ) में कार्यरत हैं। तकनीकी पृष्ठभूमि के साथ ही उन्हें साहित्यिक अभिरुचि विरासत में मिली है।  उनका कार्यालय, जीवन एवं साहित्य में अद्भुत सामंजस्य अनुकरणीय है। इस स्तम्भ के अंतर्गत हम उनके द्वारा की गई पुस्तक समीक्षाएं/पुस्तक चर्चा आप तक पहुंचाने का प्रयास  करते हैं । आप प्रत्येक मंगलवार को श्री विवेक जी के द्वारा लिखी गई पुस्तक समीक्षाएं पढ़  सकते हैं । आज प्रस्तुत है व्यंग्य संग्रह “अब तक ७५, श्रेष्ठ व्यंग्य रचनायें” पर श्री विवेक जी की पुस्तक चर्चा। ) ☆ साप्ताहिक स्तम्भ – विवेक की पुस्तक चर्चा – अब तक ७५, श्रेष्ठ व्यंग्य रचनायें # 87 ☆  पुस्तक चर्चा पुस्तक – व्यंग्य संग्रह – अब तक ७५, श्रेष्ठ व्यंग्य रचनायें संचयन व संपादन –  डा लालित्य ललित और डा हरीश कुमार सिंह प्रकाशक – इंडिया नेट...
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हिन्दी साहित्य – पुस्तक चर्चा ☆ व्यंग्य संग्रह – ‘लाकडाउन’’ – संपादक : श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ☆ चर्चाकार – डा. साधना खरे

 ☆  व्यंग्य संग्रह – ‘लाकडाउन’’ – संपादक - श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ☆  चर्चाकार - डा. साधना खरे ☆  व्यंग्य संग्रह  - लाकडाउन संपादन.. विवेक रंजन श्रीवास्तव   पृष्ठ - १६४ मूल्य - ३५० रु IASBN 9788194727217 प्रकाशक - रवीना प्रकाशन’ गंगा विहार’ दिल्ली हिन्दी साहित्य में व्यंग्य की स्वीकार्यता लगातार बढ़ी है. पाठको को व्यंग्य में कही गई बातें पसंद आ रही हैं.   व्यंग्य लेखन घटनाओ पर त्वरित प्रतिक्रिया व आक्रोश की अभिव्यक्ति का सशक्त मअध्यम बना है. जहां कहीं विडम्बना परिलक्षित होती है’ वहां व्यंग्य का प्रस्फुटन स्वाभाविक है. ये और बात है कि तब व्यंग्य बड़ा असमर्थ नजर आता है जब उस विसंगति के संपोषक जिस पर व्यंग्यकार प्रहार करता है’ व्यंग्य से परिष्कार करने की अपेक्षा’ उसकी उपेक्षा करते हुये’ व्यंग्य को परिहास में उड़ा देते हैं. ऐसी स्थितियों में सतही व्यंग्यकार भी व्यंग्य को छपास का एक माध्यम मात्र समझकर रचना करते दिखते हैं. विवेक रंजन श्रीवास्तव देश के एक सशक्त व्यंग्यकार के रूप में स्थापित हैं. उनकी कई किताबें छप...
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