श्री हरभगवान चावला
(सुप्रसिद्ध साहित्यकार श्री हरभगवान चावला जी की अब तक पांच कविता संग्रह प्रकाशित। कई स्तरीय पत्र पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित। कथादेश द्वारा लघुकथा एवं कहानी के लिए पुरस्कृत । हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा श्रेष्ठ कृति सम्मान। प्राचार्य पद से सेवानिवृत्ति के पश्चात स्वतंत्र लेखन।)
☆ विश्व जल दिवस पर – तीन कविताएँ – सूखा… ☆ श्री हरभगवान चावला ☆
22 मार्च विश्व जल दिवस है। मेरे 2005 में प्रकाशित पहले काव्य संग्रह ‘कोई अच्छी ख़बर लिखना’ में जल पर बहुत सी कविताएँ शामिल थीं। उनमें से तीन कविताएँ प्रस्तुत हैं।
– हरभगवान चावला
☆ सूखा-1 ☆
‘कितना दूर है पंजाब’
एक भेड़ पूछती है
और मर जाती है
‘हम कितना तेज़ दौड़ें
कि तुरंत पहुँच जाएँ पंजाब’
एक और भेड़ पूछती है
और गिर जाती है
सब भेड़ों की आँखों में
अनदेखा पंजाब है
जहाँ पानी से लबालब
नदियाँ बहती हैं
हर रोज़ छोटा होता जाता है
पंजाब जाता काफ़िला
एक दिन पूछती है
एक बहुत छोटी भेड़ –
‘जब तक हम पहुँचेंगे पंजाब
क्या तब तक भी बचा रहेगा
पंजाब के दरियाओं में पानी।’
☆ सूखा-2 ☆
सारा-सारा दिन
दरकी धरती की दरारों में
कोई कीड़ा ढूँढ़ती थी चिड़िया
और पाताली कुओं में चोंच भर पानी
चिड़िया हर रोज़
बारिश का इन्तज़ार करती थी
एक रात हताश चिड़िया ने
अपने भूखे-प्यासे बच्चों से कहा-
‘चलो
हम किसी दरिया के किनारे बसेंगे’
चिड़िया के नन्हें बच्चे
तुरंत उड़ना सीख गये।
☆ सूखा-3 ☆
बूढ़े ने
समय से पहले दम तोड़ चुके
खेत की अस्थियों को बटोरा
और कहा-
‘कहीं मिला जल
तो प्रवाहित करूँगा तुम्हें’
फिर बूढ़े ने
खूँटों से बँधी गायों की
रस्सियाँ खोल दीं
और अर्राती गायों से कहा-
‘कभी लौटकर इस गाँव में न आना’
फिर बूढ़े ने
अपने घर का दरवाज़ा बंद किया
देर तक दीवारों को देखता रहा
दीवार पर बने मोर को सहलाया
और कहा-
‘ज़िंदगी रही तो मिलेंगे ज़रूर’
फिर बूढ़ा
पानी के सफ़र पर चल दिया
उसने सुन्न आसमान को देखा
और सहसा महसूस किया
उसकी आँखों का पानी नहीं सूखा है
सब कुछ सूख जाने के बाद भी।
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© हरभगवान चावला
सम्पर्क – 406, सेक्टर-20, हुडा, सिरसा- 125055 (हरियाणा) फोन : 9354545440
≈ ब्लॉग संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडल (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’/श्री जय प्रकाश पाण्डेय ≈