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हिन्दी साहित्य – सस्वर कविता ☆ कोरोना को करें पराजित – आचार्य भगवत दुबे ☆ स्वरांकन एवं प्रस्तुति श्री जय प्रकाश पाण्डेय

मानवीय एवं राष्ट्रीय हित में रचित रचना आचार्य भगवत दुबे (आज प्रस्तुत है हिंदी साहित्य जगत के पितामह  गुरुवार परम आदरणीय आचार्य भगवत दुबे जी की एक समसामयिक, प्रेरक एवं शिक्षाप्रद कविता " कोरोना को करें पराजित "। हम आचार्य भगवत दुबे जी के हार्दिक आभारी हैं जिन्होंने मानवता के अदृश्य शत्रु ' कोरोना ' से बचाव एवं बचाव के लिए सेवारत चिकित्सकों एवं उनके सहयोगियों का आभार अपनी अमृतवाणी के माध्यम से  किया है।  इस कार्य के लिए हमें श्री जय प्रकाश पाण्डेय जी का सहयोग मिला है,  जिन्होंने उनकी कविता को  अपने  मोबाईल में  स्वरांकित कर हमें प्रेषित किया है। ई-अभिव्यक्ति ने पूर्व में आचार्य भगवत दुबे जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तृत आलेख अपने पाठकों के साथ साझा किया था  जिसे आप निम्न लिंक पर पढ़ सकते हैं : हिन्दी साहित्य – आलेख – ☆ आचार्य भगवत दुबे – व्यक्तित्व और कृतित्व ☆ – हेमन्त बावनकर यहाँ यह उल्लेखनीय है कि आपके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर 3 पी एच डी (4थी...
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हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ डॉ. मुक्ता का संवेदनात्मक साहित्य # 41 ☆ नया दृष्टिकोण ☆ डॉ. मुक्ता

डॉ.  मुक्ता (डा. मुक्ता जी हरियाणा साहित्य अकादमी की पूर्व निदेशक एवं  माननीय राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित/पुरस्कृत हैं।  साप्ताहिक स्तम्भ  “डॉ. मुक्ता का संवेदनात्मक  साहित्य” के माध्यम से आप  प्रत्येक शुक्रवार डॉ मुक्ता जी की उत्कृष्ट रचनाओं से रूबरू हो सकेंगे। आज प्रस्तुत है डॉ मुक्ता जी की एक अति संवेदनशील  सार्थक एवं  नारीशक्ति पर अपनी बेबाक कविता  “नया दृष्टिकोण ”.  डॉ मुक्ता जी  नारी शक्ति विमर्श की प्रणेता हैं ।  नारी जगत  में पनपे नए दृष्टिकोण  पर रचित रचना के लिए डॉ मुक्ता जी की  लेखनी को सादर नमन।  कृपया इसे गंभीरता से आत्मसात करें। )      ☆ साप्ताहिक स्तम्भ – डॉ. मुक्ता का संवेदनात्मक साहित्य  # 41 ☆ ☆ नया दृष्टिकोण  ☆   मैं हर रोज़ अपने मन से वादा करती हूं अब औरत के बारे में नहीं लिखूंगी उसके दु:ख-दर्द को कागज़ पर नहीं उकेरूंगी द्रौपदी,सीता,गांधारी,अहिल्या और उर्मिला की पीड़ा का बखान नहीं करूंगी मैं एक अल्हड़,मदमस्त स्वच्छंद नारी का आकर्षक चित्र प्रस्तुत करूंगी जो समझौते और समन्वय से कोसों दूर लीक से हटकर पगडंडी पर चल अपने लिये नयी राह का निर्माण करती ‘खाओ-पीओ,मौज-उड़ाओ’ को जीवन में अपनाती ‘तू नहीं और सही’को मूल-मंत्र...
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हिन्दी साहित्य – मनन चिंतन ☆ संजय दृष्टि – प्रकृति ☆ श्री संजय भारद्वाज

श्री संजय भारद्वाज  (श्री संजय भारद्वाज जी – एक गंभीर व्यक्तित्व । जितना गहन अध्ययन उतना ही  गंभीर लेखन।  शब्दशिल्प इतना अद्भुत कि उनका पठन ही शब्दों – वाक्यों का आत्मसात हो जाना है।साहित्य उतना ही गंभीर है जितना उनका चिंतन और उतना ही उनका स्वभाव। संभवतः ये सभी शब्द आपस में संयोग रखते हैं  और जीवन के अनुभव हमारे व्यक्तित्व पर अमिट छाप छोड़ जाते हैं।  हम आपको प्रति रविवार उनके साप्ताहिक स्तम्भ – संजय उवाच शीर्षक  के अंतर्गत उनकी चुनिन्दा रचनाएँ आप तक  पहुँचा रहे हैं। सप्ताह के अन्य दिवसों पर आप उनके मनन चिंतन को  संजय दृष्टि के अंतर्गत पढ़ सकते हैं। )  ☆ संजय दृष्टि  – प्रकृति ☆ प्रकृति ने चितेरे थे चित्र चहुँ ओर मनुष्य ने कुछ चित्र मिटाये अपने बसेरे बसाये,   प्रकृति बनाती रही चित्र निरंतर, मनुष्य ने गेरू-चूने से वही चित्र दीवारों पर लगाये,   प्रकृति ने येन केन प्रकारेण जारी रखा चित्र बनाना मनुष्य ने पशुचर्म, नख, दंत सजाये   निर्वासन भोगती रही सिमटती रही, मिटती रही, विसंगतियों में यथासंभव चित्र बनाती रही प्रकृति,   प्रकृति को उकेरनेवाला प्रकृति के खात्मे पर तुला मनुष्य की कृति में अब नहीं बची...
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हिन्दी साहित्य – कविता ☆ मन के पीछे कोई ☆ डॉ श्याम मनोहर सीरोठिया

डॉ श्याम मनोहर सीरोठिया ( ई - अभिव्यक्ति में डॉ श्याम मनोहर सीरोठिया जी का हार्दिक स्वागत है। बहुमुखी प्रतिभा के धनी डॉ श्याम मनोहर सीरोठिया जी ने चिकित्सा सेवाओं के अतिरिक्त साहित्यिक सेवाओं में विशिष्ट योगदान दिया है। अब तक आपकी नौ काव्य  कृतियां  प्रकाशित हो चुकी हैं एवं तीन  प्रकाशनाधीन हैं। चिकित्सा एवं साहित्य के क्षेत्र में कई विशिष्ट पदों पर सुशोभित तथा  शताधिक पुरस्कारों / अलंकरणों से पुरस्कृत / अलंकृत डॉ श्याम मनोहर सीरोठिया जी  से हम अपने प्रबुद्ध पाठकों के लिए उनके साहित्य की अपेक्षा करते हैं। आज प्रस्तुत है उनका एक अतिसुन्दर भावप्रवण गीत  मन के पीछे कोई । ) ☆ मन के पीछे कोई ☆   एक बार पूछो अधरों से,प्यास भला कब सोयी। मन है किसी और के पीछे, मन के पीछे कोई।।   अभिव्यक्ति को कभी सहारा, दिया नहीं शब्दों ने। असफलता को ही  तो सब कुछ ,माना प्रारबधों ने।। हँसते रहे कोर नयनो के,साँस -साँस पर रोयी।।   पीड़ाओं ने छंद लिखे हैं,कागज पर इस मन के। आहट हुई द्वार पर,बदले,मौसम फिर  आँगन...
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हिन्दी साहित्य – कविता ☆ कोरोना हाईकु ☆ श्रीमति हेमलता मिश्र “मानवी “

मानवीय एवं राष्ट्रीय हित में रचित रचना  श्रीमति हेमलता मिश्र “मानवी “ ‘ (सुप्रसिद्ध, ओजस्वी,वरिष्ठ साहित्यकार श्रीमती हेमलता मिश्रा “मानवी”  जी  विगत ३७ वर्षों से साहित्य सेवायेँ प्रदान कर रहीं हैं एवं मंच संचालन, काव्य/नाट्य लेखन तथा आकाशवाणी  एवं दूरदर्शन में  सक्रिय हैं। आपकी रचनाएँ राष्ट्रीय स्तर पर पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित, कविता कहानी संग्रह निबंध संग्रह नाटक संग्रह प्रकाशित, तीन पुस्तकों का हिंदी में अनुवाद, दो पुस्तकों और एक ग्रंथ का संशोधन कार्य चल रहा है। आज प्रस्तुत है श्रीमती  हेमलता मिश्रा जी  द्वारा मानवीय एवं राष्ट्रीय हित में  हाईकु विधा में रचित कविता कोरोना हाईकु। ) ☆ कोरोना हाईकु ☆ क्या मजदूर क्या किसान जवान सभी महान!!   पाल रहे हैं सरकारी आदेश हर इंसान!!   सहमी राहें जनता को सिखाएँ धैर्य शिक्षाएँ!!   कडी़ टूटेगी ना आएंगे मरीज खत्म कोरोना!!   कोरोना बैरी लाख हों हेराफेरी हारेगा पारी!!   © हेमलता मिश्र “मानवी ”  नागपुर, महाराष्ट्र...
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हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ साहित्य निकुंज # 41 ☆ भावना के दोहे ☆ डॉ. भावना शुक्ल

डॉ भावना शुक्ल (डॉ भावना शुक्ल जी  (सह संपादक ‘प्राची‘) को जो कुछ साहित्यिक विरासत में मिला है उसे उन्होने मात्र सँजोया ही नहीं अपितु , उस विरासत को गति प्रदान  किया है। हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि माँ सरस्वती का वरद हस्त उन पर ऐसा ही बना रहे। आज प्रस्तुत है नववर्ष एवं नवरात्रि  के अवसर पर एक समसामयिक  “भावना के दोहे “।) ☆ साप्ताहिक स्तम्भ  # 41 – साहित्य निकुंज ☆ ☆ भावना के दोहे  ☆   विश्वास हमको अब होने लगा, तुझ पर ही विश्वास किया समर्पित आपको, मन में है ये आस।।   अभियान कोरोना के कहर से, कैसे बचे जहान। इसे रोकने चल रहे कितने  ही अभियान।।   मयंक आज गगन पर छा गया, रातों रात मयंक। भरती मुझको चांदनी, देखो अपने अंक।।   चांदनी छाती जाती चांदनी, है पूनम की रात। होती है फिर से धरा, एक और मुलाकात ।।   अभिनय तेरा अभिनय देखकर, मन में उठा गुबार।। आंखों से अब पढ़ लिया, झूठा तेरा प्यार।।     © डॉ.भावना शुक्ल सहसंपादक…प्राची प्रतीक लॉरेल , C 904, नोएडा सेक्टर – 120,  नोएडा (यू.पी )- 201307 मोब  9278720311 ईमेल : bhavanasharma30@gmail.com ...
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हिन्दी साहित्य – कविता ☆ हार ग‌ए यदि हिम्मत, समझो, सारी बाजी हारे हैं! ☆ – सुश्री शुभदा बाजपेई

मानवीय एवं राष्ट्रीय हित में रचित रचना सुश्री शुभदा बाजपेई (सुश्री शुभदा बाजपेई जी  हिंदी साहित्य  की गीत ,गज़ल, मुक्तक,छन्द,दोहे विधा की सशक्त हस्ताक्षर हैं। आपकी रचनाएँ कई प्रतिष्ठित पत्रिकाओं/ई-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती  रहती हैं। सुश्री शुभदा जी कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों / सम्मानों से पुरस्कृत /अलंकृत हैं एवं आकाशवाणी एवं दूरदर्शन पर  कई प्रस्तुतियां। आज प्रस्तुत है आपकी  एक  आशावादी कविता  “हार ग‌ए यदि हिम्मत, समझो, सारी बाजी हारे हैं”. ) ☆ कविता -  हार ग‌ए यदि हिम्मत, समझो, सारी बाजी हारे हैं ☆   दुनिया भर  मे कोरोना के‌‌, देखो  नखरे न्यारे हैं सहमी -सहमी लगे जिन्दगी, सहमे चाँद सितारे हैं   आना -जाना बंद हुआ है, सैर -सपाटे छूट गए नदिया रोती, सागर रूठा, टूटे सभी किनारे हैं   हाथ मिलाना छोड़ गए सब, नमस्कार की‌ जै-जै है रिश्तों में दूरी-मजबूरी, मित्र सभी बेचारे हैं   साँस -साँस भारी जीवन पर मगर रोग से लड़ना है हार ग‌ए यदि हिम्मत , समझो, सारी बाजी हारे हैं   आशाओं का दीप जला कर  हमें प्रतीक्षा करनी है होगी सुबह, सदा कब रहने वाले ये अँधियारे हैं   कभी किसी के यहाँ नहीं,दिन...
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हिन्दी साहित्य☆ साप्ताहिक स्तम्भ – इंद्रधनुष # 32 ☆ राम-नाम अभिराम ☆ श्री संतोष नेमा “संतोष”

श्री संतोष नेमा “संतोष”   (आदरणीय श्री संतोष नेमा जी  कवितायें, व्यंग्य, गजल, दोहे, मुक्तक आदि विधाओं के सशक्त हस्ताक्षर हैं. धार्मिक एवं सामाजिक संस्कार आपको विरासत में मिले हैं. आपके पिताजी स्वर्गीय देवी चरण नेमा जी ने कई भजन और आरतियाँ लिखीं थीं, जिनका प्रकाशन भी हुआ है. 1982 से आप डाक विभाग में कार्यरत हैं. आपकी रचनाएँ राष्ट्रीय पत्र पत्रिकाओं में लगातार प्रकाशित होती रहती हैं। आप  कई सम्मानों / पुरस्कारों से सम्मानित/अलंकृत हैं.    “साप्ताहिक स्तम्भ – इंद्रधनुष” की अगली कड़ी में प्रस्तुत है  श्री संतोष नेमा जी की  श्री रामनवमी पर विशेष रचना   “राम-नाम अभिराम ”। आप श्री संतोष नेमा जी  की रचनाएँ प्रत्येक शुक्रवार  आत्मसात कर  सकते हैं . )  ☆ साहित्यिक स्तम्भ – इंद्रधनुष # 32 ☆ ☆ श्री रामनवमी विशेष - राम-नाम अभिराम ☆ चैत्र शुक्ल नवमी सुदी,लिये राम अवतार राजा दशरथ के हुये,स्वप्न सभी साकार   रामचरित मानस लिखी,शुभ मुहूर्त शुरुआत बाबा तुलसी दे गये, यह सुंदर सौगात   राम नाम के मंत्र का, करिये निशदिन जाप उनके सुमिरन से मिटें, जग के सारे ताप   अविनाशी व्यापक परम्,...
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हिन्दी साहित्य- कविता / दोहे ☆ आचार्य सत्य नारायण गोयनका जी के दोहे #37 ☆ प्रस्तुति – श्री जगत सिंह बिष्ट

आचार्य सत्य नारायण गोयनका (हम इस आलेख के लिए श्री जगत सिंह बिष्ट जी, योगाचार्य एवं प्रेरक वक्ता योग साधना / LifeSkills  इंदौर के हृदय से आभारी हैं, जिन्होंने हमारे प्रबुद्ध पाठकों के लिए ध्यान विधि विपश्यना के महान साधक – आचार्य सत्य नारायण गोयनका जी के महान कार्यों से अवगत करने में  सहायता की है। आप  आचार्य सत्य नारायण गोयनका जी के कार्यों के बारे में निम्न लिंक पर सविस्तार पढ़ सकते हैं।) आलेख का  लिंक  ->>>>>>  ध्यान विधि विपश्यना के महान साधक – आचार्य सत्य नारायण गोयनका जी  Shri Jagat Singh Bisht (Master Teacher: Happiness & Well-Being, Laughter Yoga Master Trainer, Author, Blogger, Educator, and Speaker.) ☆  कविता / दोहे ☆ आचार्य सत्य नारायण गोयनका जी के दोहे # 37 ☆ प्रस्तुति – श्री जगत सिंह बिष्ट ☆  (हम  प्रतिदिन आचार्य सत्य नारायण गोयनका  जी के एक दोहे को अपने प्रबुद्ध पाठकों के साथ साझा करने का प्रयास करेंगे, ताकि आप उस दोहे के गूढ़ अर्थ को गंभीरता पूर्वक आत्मसात कर सकें। ) आचार्य सत्य नारायण गोयनका जी के दोहे बुद्ध वाणी...
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हिन्दी साहित्य – मनन चिंतन ☆ संजय दृष्टि – मानसपटल ☆ श्री संजय भारद्वाज

श्री संजय भारद्वाज  (श्री संजय भारद्वाज जी – एक गंभीर व्यक्तित्व । जितना गहन अध्ययन उतना ही  गंभीर लेखन।  शब्दशिल्प इतना अद्भुत कि उनका पठन ही शब्दों – वाक्यों का आत्मसात हो जाना है।साहित्य उतना ही गंभीर है जितना उनका चिंतन और उतना ही उनका स्वभाव। संभवतः ये सभी शब्द आपस में संयोग रखते हैं  और जीवन के अनुभव हमारे व्यक्तित्व पर अमिट छाप छोड़ जाते हैं।  हम आपको प्रति रविवार उनके साप्ताहिक स्तम्भ – संजय उवाच शीर्षक  के अंतर्गत उनकी चुनिन्दा रचनाएँ आप तक  पहुँचा रहे हैं। सप्ताह के अन्य दिवसों पर आप उनके मनन चिंतन को  संजय दृष्टि के अंतर्गत पढ़ सकते हैं। )  ☆ संजय दृष्टि  – मानसपटल   ☆ पहले आती थीं चिड़ियाँ, फिर कबूतरों ने डेरा जमाया, अब कौवों का जमावड़ा है.., बदलते दृश्यों को मन के पटल पर उतार रहा हूँ मैं अपनी बालकनी में खड़ा जीवन निहार रहा हूँ मैं..!   घर पर रहें, स्वस्थ रहें।   ©  संजय भारद्वाज, पुणे प्रात: 8:37 बजे,  1अप्रैल 2020   ☆ अध्यक्ष– हिंदी आंदोलन परिवार ☆ सदस्य– हिंदी अध्ययन मंडल, पुणे विश्वविद्यालय ☆ संपादक– हम लोग ☆ पूर्व सदस्य– महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी ☆ ट्रस्टी- जाणीव,...
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