image_print

English Literature – Poetry ☆ Anonymous litterateur of Social Media# 21 ☆ Captain Pravin Raghuvanshi, NM

Captain Pravin Raghuvanshi, NM ☆ Anonymous Litterateur of Social Media # 21 (सोशल मीडिया के गुमनाम साहित्यकार # 21) ☆  Captain Pravin Raghuvanshi —an ex Naval Officer, possesses a multifaceted personality. Presently, he is serving as Senior Advisor in prestigious Supercomputer organisation C-DAC, Pune. He is involved in various Artificial Intelligence and High-Performance Computing projects of national and international repute. He has got a long experience in the field of ‘Natural Language Processing’, especially, in the domain of Machine Translation. He has taken the mantle of translating the timeless beauties of Indian literature upon himself so that it reaches across the globe. He has also undertaken translation work for Shri Narendra Modi, the Hon’ble Prime Minister of India, which was highly appreciated by him. He is also a member of ‘Bombay Film Writer Association’. Captain Raghuvanshi is also a littérateur par excellence. He is a prolific writer, poet and ‘Shayar’ himself and participates in literature fests and ‘Mushayaras’. He keeps participating in various language & literature fests, symposiums and workshops etc. Recently, he played...
Read More

हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ – सलिल प्रवाह # 20 ☆ कहो जीवन की जय ☆ आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’

आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ (आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ जी संस्कारधानी जबलपुर के सुप्रसिद्ध साहित्यकार हैं। आपको आपकी बुआ श्री महीयसी महादेवी वर्मा जी से साहित्यिक विधा विरासत में प्राप्त हुई है । आपके द्वारा रचित साहित्य में प्रमुख हैं पुस्तकें- कलम के देव, लोकतंत्र का मकबरा, मीत मेरे, भूकंप के साथ जीना सीखें, समय्जयी साहित्यकार भगवत प्रसाद मिश्रा ‘नियाज़’, काल है संक्रांति का, सड़क पर आदि।  संपादन -८ पुस्तकें ६ पत्रिकाएँ अनेक संकलन। आप प्रत्येक सप्ताह रविवार को  “साप्ताहिक स्तम्भ – सलिल प्रवाह” के अंतर्गत आपकी रचनाएँ आत्मसात कर सकेंगे। आज प्रस्तुत है  एक भावप्रवण कविता कहो जीवन की जय ) ☆ साप्ताहिक स्तम्भ – सलिल प्रवाह # 20 ☆  ☆ कहो जीवन की जय ☆    धरती माता विपदाओं से डरी नहीं मुस्काती है जीत उन्हें यह मरी नहीं आसमान ने नीली छत सिर पर तानी तूफां-बिजली हार गये यह फटी नहीं अग्नि पचाती भोजन, जला रही अब भी बुझ-बुझ जलती लेकिन किंचित् थकी नहीं पवन बह रहा, साँस भले थम जाती हो प्रात समीरण प्राण फूँकते थमी नहीं सलिल प्रवाहित कलकल निर्मल तृषा बुझा नेह नर्मदा प्रवहित किंचित् रुकी नहीं पंचतत्व निर्मित...
Read More

हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ काव्य धारा # 8 ☆ राजा रघुनाथ शाह एवं शंकरशाह की बलिदान गाथा ☆ प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’

प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’  ( आज प्रस्तुत है गुरुवर प्रोफ. श्री चित्र भूषण श्रीवास्तव जी  की एक ओजस्वी कविता राजा रघुनाथ शाह एवं शंकरशाह की बलिदान गाथा। यह कविता  राजा रघुनाथ शाह एवं  शंकरशाह जी को  समर्पित है जिनका कल दिनांक 18 सितम्बर को बलिदान दिवस था।  हमारे प्रबुद्ध पाठक गण  प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’ जी  काव्य रचनाओं को प्रत्येक शनिवार आत्मसात कर सकेंगे।  )  ☆ साप्ताहिक स्तम्भ ☆ काव्य धारा # 8☆ ☆ राजा रघुनाथ शाह एवं शंकरशाह की बलिदान गाथा ☆ जानते इतिहास जो वे जानते यह भी सभी राजधानी गौड राजाओ की थी त्रिुपरी कभी   उस समय मे गौडवाना एक समृद्ध राज्य था था बडा भूभाग कृषि, वन क्षेत्र पर अविभाज्य था   सदियों तक शासन रहा कई पीढ़ियों के हाथ में अनेको उपलब्धियाॅ भी रही जिनके साथ में   रायसेन, भोपाल, हटा, सिंगौरगढ मे थे किले सीमा में थे आज के छत्तीसगढ के भी जिले   खंडहर नर्मदा तट मंडला मे हैं अब भी खड़े आज भी हैं महल मंदिर रामनगर मे कई बड़े   कृषि की उन्नति, वन की सम्पत्ति, राज्य में धन धान्य...
Read More

हिन्दी साहित्य – कविता ☆ गीत – स्वागत गुरु ☆डॉ.  सलमा जमाल 

डॉ.  सलमा जमाल  (डा. सलमा जमाल जी का ई-अभिव्यक्ति में हार्दिक स्वागत है। रानी दुर्गावती विश्विद्यालय जबलपुर से  एम. ए. (हिन्दी, इतिहास, समाज शास्त्र), बी.एड., पी एच डी (मानद), डी लिट (मानद), एल. एल.बी. की शिक्षा प्राप्त ।  15 वर्षों का शिक्षण कार्य का अनुभव  एवं विगत 22 वर्षों से समाज सेवारत ।आकाशवाणी छतरपुर/जबलपुर एवं दूरदर्शन भोपाल में काव्यांजलि में लगभग प्रतिवर्ष रचनाओं का प्रसारण। कवि सम्मेलनों, साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्थाओं में सक्रिय भागीदारी । विभिन्न पत्र पत्रिकाओं जिनमें भारत सरकार की पत्रिका "पर्यावरण" दिल्ली प्रमुख हैं में रचनाएँ सतत प्रकाशित।अब तक लगभग 72 राष्ट्रीय एवं 3 अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार/अलंकरण। वर्तमान में अध्यक्ष, अखिल भारतीय हिंदी सेवा समिति, पाँच संस्थाओं की संरक्षिका एवं विभिन्न संस्थाओं में महत्वपूर्ण पदों पर आसीन। अब तक १० पुस्तकें प्रकाशित।आपकी लेखनी को सादर नमन।)  आपके द्वारा रचित अमृत का सागर (गीता-चिन्तन) और बुन्देली हनुमान चालीसा (आल्हा शैली) हमारी साँझा विरासत के प्रतीक है।  ☆ गीत – स्वागत गुरु ☆ हर्षित हृदय से आपका, शत् कोटी है वंदन । मन की गहराइयों से...
Read More

हिन्दी साहित्य – मनन चिंतन ☆ संजय दृष्टि ☆ चुप्पी (19) ☆ श्री संजय भारद्वाज

श्री संजय भारद्वाज  (श्री संजय भारद्वाज जी – एक गंभीर व्यक्तित्व । जितना गहन अध्ययन उतना ही  गंभीर लेखन।  शब्दशिल्प इतना अद्भुत कि उनका पठन ही शब्दों – वाक्यों का आत्मसात हो जाना है।साहित्य उतना ही गंभीर है जितना उनका चिंतन और उतना ही उनका स्वभाव। संभवतः ये सभी शब्द आपस में संयोग रखते हैं  और जीवन के अनुभव हमारे व्यक्तित्व पर अमिट छाप छोड़ जाते हैं।  हम आपको प्रति रविवार उनके साप्ताहिक स्तम्भ – संजय उवाच शीर्षक  के अंतर्गत उनकी चुनिन्दा रचनाएँ आप तक  पहुँचा रहे हैं। सप्ताह के अन्य दिवसों पर आप उनके मनन चिंतन को  संजय दृष्टि के अंतर्गत पढ़ सकते हैं। ) ☆ संजय दृष्टि  ☆ चुप्पी (19) ☆ शब्द थक जाएँ तो संभाल लेती है चुप्पी, चुप्पी टूटने लगे तो शब्द सहारा बनते हैं, शब्द और चुप्पी, चुप्पी और शब्द, शाश्वत प्रेम की सनातन गाथा रचते हैं...!   ©  संजय भारद्वाज  प्रात: 8:21, 17.10.2018 ☆ अध्यक्ष– हिंदी आंदोलन परिवार ☆ सदस्य– हिंदी अध्ययन मंडल, पुणे विश्वविद्यालय ☆ संपादक– हम लोग ☆ पूर्व सदस्य– महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी ☆ ट्रस्टी- जाणीव, ए होम फॉर सीनियर सिटिजन्स ☆ writersanjay@gmail.com मोबाइल– 9890122603 ≈ ब्लॉग संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडल (हिन्दी)...
Read More

English Literature – Poetry ☆ Speechless… ☆ Captain Pravin Raghuvanshi, NM

Captain Pravin Raghuvanshi, NM (Captain Pravin Raghuvanshi—an ex Naval Officer, possesses a multifaceted personality. Presently, he is serving as Senior Advisor in prestigious Supercomputer organisation C-DAC, Pune. An alumnus of IIM Ahmedabad is involved in various Artificial Intelligence and High-Performance Computing projects of national and international repute. He has got a long experience in the field of ‘Natural Language Processing’, especially, in the domain of Machine Translation. He has taken the mantle of translating the timeless beauties of Indian literature upon himself so that it reaches across the globe. He has also undertaken translation work for Shri Narendra Modi, the Hon’ble Prime Minister of India, which was highly appreciated by him. He is also a member of ‘Bombay Film Writer Association’.) We present an English Version of Shri Sanjay Bhardwaj’s Hindi Poetry  “अवाक ” . We extend our heartiest thanks to the learned author  Captain Pravin Raghuvanshi Ji (who is very well conversant with Hindi, Sanskrit,  English and Urdu languages) for this beautiful translation.)  ☆ Speechless...☆ With proud filled flashing eyes Son-daughter duo Kept narrating the saga of their struggles, perseverance and sacrifices... Tongue-tied Wrinkled-faced parents Kept listening to their...
Read More

हिन्दी साहित्य – मनन चिंतन ☆ संजय दृष्टि ☆ अवाक ☆ श्री संजय भारद्वाज

श्री संजय भारद्वाज  (श्री संजय भारद्वाज जी – एक गंभीर व्यक्तित्व । जितना गहन अध्ययन उतना ही  गंभीर लेखन।  शब्दशिल्प इतना अद्भुत कि उनका पठन ही शब्दों – वाक्यों का आत्मसात हो जाना है।साहित्य उतना ही गंभीर है जितना उनका चिंतन और उतना ही उनका स्वभाव। संभवतः ये सभी शब्द आपस में संयोग रखते हैं  और जीवन के अनुभव हमारे व्यक्तित्व पर अमिट छाप छोड़ जाते हैं।  हम आपको प्रति रविवार उनके साप्ताहिक स्तम्भ – संजय उवाच शीर्षक  के अंतर्गत उनकी चुनिन्दा रचनाएँ आप तक  पहुँचा रहे हैं। सप्ताह के अन्य दिवसों पर आप उनके मनन चिंतन को  संजय दृष्टि के अंतर्गत पढ़ सकते हैं। ) ☆ संजय दृष्टि  ☆ अवाक ☆   दर्प से चमकती आँखों से बेटा-बेटी अपने त्याग, तप और संघर्ष की गाथा सुनाते रहे.., झुर्रियों से घिरा चेहरा लिये माता-पिता अवाक होकर सुनते रहे!   ©  संजय भारद्वाज  प्रात: 11:54 बजे, 4.9.20 ☆ अध्यक्ष– हिंदी आंदोलन परिवार ☆ सदस्य– हिंदी अध्ययन मंडल, पुणे विश्वविद्यालय ☆ संपादक– हम लोग ☆ पूर्व सदस्य– महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी ☆ ट्रस्टी- जाणीव, ए होम फॉर सीनियर सिटिजन्स ☆ writersanjay@gmail.com मोबाइल– 9890122603 ≈ ब्लॉग संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडल (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’/श्री जय...
Read More

हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ साहित्य निकुंज # 61 ☆ तुम यहीं हो ☆ डॉ. भावना शुक्ल

डॉ भावना शुक्ल (डॉ भावना शुक्ल जी  (सह संपादक ‘प्राची‘) को जो कुछ साहित्यिक विरासत में मिला है उसे उन्होने मात्र सँजोया ही नहीं अपितु , उस विरासत को गति प्रदान  किया है। हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि माँ सरस्वती का वरद हस्त उन पर ऐसा ही बना रहे। आज प्रस्तुत हैं परम आदरणीया माँ स्व डॉ गायत्री तिवारी जी  (27 दिसंबर 1947 - 8 सितम्बर 2015)को सस्नेह समर्पित एक भावप्रवण कविता  “तुम यहीं हो”। )  ☆ साप्ताहिक स्तम्भ  # 61 – साहित्य निकुंज ☆ ☆ तुम यहीं हो ☆ तुम मेरी यादों के झरोखे में झाँकती मुझे तुम निहारती मै अतीत के उन पलों में पहुंच जाती हूँ ।   तुम्हारा रोज मुझसे बात करना,अपना मन हल्का करना। मैं खो जाती हूँ तुम्हारे आँचल की छाँव में जहां मिलता था मुझे सुकून, मुझे चैन।   तुम्हारा प्यार, तुम्हारा ममत्व अक्सर ख्वाबों में भी आराम देता है। नींद में भी तुम्हारे हाथों का स्पर्श यकीन दिला जाता है कि तुम हो मेरे ही आस पास।   मन में आज भी एक प्रश्न चिन्ह उठता है जिंदगी पूरी जिये बिना तुम क्यों चली गई और जाने कितने सवाल छोड़ गई हम...
Read More

हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ इंद्रधनुष # 52 ☆ कभी खुद से भी सवाल कर लेना ☆ श्री संतोष नेमा “संतोष”

श्री संतोष नेमा “संतोष” (आदरणीय श्री संतोष नेमा जी  कवितायें, व्यंग्य, गजल, दोहे, मुक्तक आदि विधाओं के सशक्त हस्ताक्षर हैं. धार्मिक एवं सामाजिक संस्कार आपको विरासत में मिले हैं. आपके पिताजी स्वर्गीय देवी चरण नेमा जी ने कई भजन और आरतियाँ लिखीं थीं, जिनका प्रकाशन भी हुआ है. 1982 से आप डाक विभाग में कार्यरत हैं. आपकी रचनाएँ राष्ट्रीय पत्र पत्रिकाओं में लगातार प्रकाशित होती रहती हैं। आप  कई सम्मानों / पुरस्कारों से सम्मानित/अलंकृत हैं.    “साप्ताहिक स्तम्भ – इंद्रधनुष” की अगली कड़ी में प्रस्तुत है  एक भावप्रवण रचना “कभी खुद से भी सवाल कर लेना”। आप श्री संतोष नेमा जी  की रचनाएँ प्रत्येक शुक्रवार  आत्मसात कर सकते हैं।) ☆ साहित्यिक स्तम्भ – इंद्रधनुष # 52☆ ☆ कभी खुद से भी सवाल कर लेना  ☆   कभी खुद से भी सवाल कर लेना जरा उसका भी ख्याल कर लेना   गैरों पै उँगलियाँ उठाई बहुत चार तुम्हारी तरफ,मलाल कर लेना   हैं दुनिया में परेशानियाँ बहुत मुश्किलों में दिल खुशहाल कर लेना   खुदा के बाद है माँ-बाप का रुतवा दिल से उनकी संभाल कर लेना   माफ कर देना...
Read More

हिन्दी साहित्य – मनन चिंतन ☆ संजय दृष्टि ☆ सार्थक ☆ श्री संजय भारद्वाज

श्री संजय भारद्वाज  (श्री संजय भारद्वाज जी – एक गंभीर व्यक्तित्व । जितना गहन अध्ययन उतना ही  गंभीर लेखन।  शब्दशिल्प इतना अद्भुत कि उनका पठन ही शब्दों – वाक्यों का आत्मसात हो जाना है।साहित्य उतना ही गंभीर है जितना उनका चिंतन और उतना ही उनका स्वभाव। संभवतः ये सभी शब्द आपस में संयोग रखते हैं  और जीवन के अनुभव हमारे व्यक्तित्व पर अमिट छाप छोड़ जाते हैं।  हम आपको प्रति रविवार उनके साप्ताहिक स्तम्भ – संजय उवाच शीर्षक  के अंतर्गत उनकी चुनिन्दा रचनाएँ आप तक  पहुँचा रहे हैं। सप्ताह के अन्य दिवसों पर आप उनके मनन चिंतन को  संजय दृष्टि के अंतर्गत पढ़ सकते हैं। ) ☆ संजय दृष्टि  ☆ सार्थक ☆ कुछ हथेलियाँ उलीचती रहीं दलदल से पानी, सूखी धरती तक पहुँचाती रहीं बूँद-बूँद पानी, जग हँसता रहा उनकी नादानी पर.. कालांतर में मरुस्थल तो तर हुआ नहीं पर दलदल की जगह उग आया लबालब अरण्य.. साधन की जो बाट नहीं जोहते, उनके संकल्प और श्रम कभी व्यर्थ नहीं होते!   ©  संजय भारद्वाज  14.9.20, रात्रि 12.07 बजे। ☆ अध्यक्ष– हिंदी आंदोलन परिवार ☆ सदस्य– हिंदी अध्ययन मंडल, पुणे विश्वविद्यालय ☆ संपादक– हम लोग ☆ पूर्व सदस्य– महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी ☆ ट्रस्टी- जाणीव, ए होम फॉर सीनियर...
Read More
image_print