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सूचनाएँ/Information – ☆ सोन इंदर प्रतिष्ठान सम्मान ☆ – प्रस्तुति – श्रीमती समीक्षा तैलंग

सूचनाएँ/Information

श्रीमती समीक्षा तैलंग 

 

(हम प्रतिष्ठित व्यंग्यकार  श्रीमती समीक्षा तैलंग जी के ह्रदय से आभारी हैं जिन्होंने हमारे आग्रह  को स्वीकार कर  सोन इन्दर प्रतिष्ठान सम्मान कार्यक्रम  की विशेष जानकारी प्रेषित की है। )

 ☆ सोन इंदर प्रतिष्ठान सम्मान ☆

16 नवंबर को एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम में जाना हुआ। सावित्रीबाई फुले, पुणे विश्वविद्यालय में हुए इस कार्यक्रम में आ. बलराम प्रेमनारायण जी को सोनइंदर प्रतिष्ठान की ओर से साहित्य महासागर सम्मान से सम्मानित किया गया।

बलराम जी का सत्कार करते हुए बाएं से खडसे जी, पवार जी, बलराम जी, ममता जैन जी, डॉ. राजेन्द्र श्रीवास्तव जी, डॉ. सुनील देवधर जी

आ. दामोदर खड़से जी से बातचीत, उन्हें सुनना और उन्हें अपनी पुस्तक भेंट करना भी सुखद रहा। आ. सुनील देवधर जिन्हें मैं दादा कहती हूं, उनसे लगभग 24 वर्षों बाद मिलना उतनी ही आत्मीयता और सुकून भरा था। कार्यक्रम संयोजन में श्री अशोक भांबुरे जी का विशेष योगदान रहा।  मेरे एक और फेसबुक मित्र जिनसे मैं पहली बार मिली डॉ. राजेन्द्र श्रीवास्तव जी उनका संचालन लाजवाब था। उन्होंने अपनी पुस्तक भी मुझे भेंट की और मैंने भी…।

कार्यक्रम में बलराम जी के काम पर इतनी गंभीर चर्चा का हिस्सा होना और सुनना बहुत ही सार्थक रहा। बड़े बड़े साहित्यकारों को जब एकसाथ सुनने का मौका मिलता है तो उसे शब्दों में बयां करना शायद बहुत कठिन होता है।

बलराम जी भले अच्छे वक्ता न हो। न ही उन्हें सोशल मीडिया पर कभी एक्टिव देखा गया हो लेकिन उन्होंने जो लिखा है, उस पर साहित्य की घूमती हुई संस्थाएं (मतलब गणमान्य साहित्यकार) जब चर्चा करती हैं तो, शायद इससे बड़ा पुरस्कार किसी लेखक के लिए कुछ हो ही नहीं सकता।

बलराम जी मूलरूप से पत्रकार हैं। और पत्रकार रहते हुए उन्होंने न जाने कितने ही नामों का प्रयोग किया। मतलब बलराम की जगह पर अलग अलग नाम से लिखते रहे।आज उन्हीं सब नामों ने मिलकर उनके लेखन और उनके अपने नाम को बल देते हुए यह ऊंचाई दी और बलराम बना दिया।

एक और मराठी ग़ज़लकार आ. म. भ. चव्हाण जी को सुनना मतलब लगातार तालियों की गडगडाहट। बहुत ही गंभीर ग़जलें सुनने को मिली।

इसी कड़ी में शंकर पुणतांबेकर जी के शिष्य आ. ओमप्रकाश शर्मा जी से मुलाकात हुई। “एक मंत्री स्वर्गलोक में” व्यंग्य संग्रह का हिन्दी से मराठी अनुवाद पहली बार किया। जबकि पुणतांबेकर जी मराठी थे जो हिन्दी में लिखते थे। वहीं ओमप्रकाश जी हिन्दी होते हुए मराठी में लिखते हैं। यह अनुवाद किया हुआ अपने समय का पहला व्यंग्य संग्रह होगा जिसे पुरस्कृत भी किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रसिद्ध समाजसेवी उल्हास दादा पवार थे। सोन इंदर कार्यक्रम के संयोजक टीकम शेखावत जी ने कार्यक्रम के अंत में सभी का आभार व्यक्त किया।

 

प्रस्तुति – श्रीमती समीक्षा तैलंग

पुणे, महाराष्ट्र




सूचनाएँ/Information – ☆ 16 वां बहुभाषी नाट्य महोत्सव – निर्णायक की कलम से – – ☆ श्रीमती हेमलता मिश्रा “मानवी” 

श्रीमति हेमलता मिश्र “मानवी “

(सुप्रसिद्ध, ओजस्वी,वरिष्ठ साहित्यकार श्रीमती हेमलता मिश्रा “मानवी”  जी  विगत ३७ वर्षों से साहित्य सेवायेँ प्रदान कर रहीं हैं एवं मंच संचालन, काव्य/नाट्य लेखन तथा आकाशवाणी  एवं दूरदर्शन में  सक्रिय हैं। आपकी रचनाएँ राष्ट्रीय स्तर पर पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित, कविता कहानी संग्रह निबंध संग्रह नाटक संग्रह प्रकाशित, तीन पुस्तकों का हिंदी में अनुवाद, दो पुस्तकों और एक ग्रंथ का संशोधन कार्य चल रहा है।  आज प्रस्तुत है 16 वें बहुभाषी नाट्य महोत्सव में निर्णायक के रूप श्रीमती  हेमलता मिश्रा जी के उदगार.)

 

निर्णायक की कलम से -श्रीमती हेमलता मिश्रा “मानवी”  ☆

 

विदर्भ हिन्दी साहित्य सम्मेलन ,मोरभवन झांसीरानी चौक नागपुर और कला सागर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 16 वें बहुभाषी नाट्य महोत्सव में निर्णायक के रूप में पिछले छः दिनों के स्वर्गिक आनंद का अनुपम आस्वाद – – अवर्णनीय है

पूरे पंद्रह नाटक 200 से अधिक कलाकार और प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े सुधि जनों के साथ बड़े ही जोश उत्साह और जिज्ञासा से पूरित  नाट्य महोत्सव का भव्य समापन समारोह अनेकानेक गौरवान्वित पलों के साथ संपन्न हुआ। मानो एक विशाल साहित्य महायज्ञ में अपने अपने हिस्से की समिधा समर्पित कर हर कलाकार चंदन की महकती खुशबू सा निरामय हो उठा— कला गौरव की गमकती यज्ञाग्नि में स्वयं की कला की समिधा अर्पण कर समाज ऋण – – देश ऋण और मानवीय  ऋण चुका कर तृण कण सी निरागस नम्रता से पूरित हो गया– हर चेहरा प्रफुल्लित खिले पुष्प सा।

परिणाम की उत्सुकता अपनी जगह पर परंतु उल्लास हर चेहरे पर हिलोरें ले रहा। सुधि जनों, स्वनाम धन्य मनीषियों तथा महनीय अतिथियों का स्वागत–  निर्णायक मंडल का सत्कार इत्यादि महनीय पलों का साक्षी बना विदर्भ हिन्दी साहित्य सम्मेलन का प्रांगण और कला सागर का गरिमामय ग्रुप।

विशाल कला रसिक जनसमूह की उत्सुकता शांत हुई  पुरस्कारों की घोषणा के साथ और नामों की घोषणा के पूर्व ही जनसमूह में से उठते स्वर – – – निर्णायक गणों के निर्णय को  सही निर्णय की मुहर लगा देते।

कृतज्ञता ज्ञापन की पारंपरिक मगर दिली अदायगी के साथ विदर्भ हिन्दी साहित्य सम्मेलन और कला सागर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सोलहवें बहु-भाषी नाट्य महोत्सव का समापन घोषित किया गया।

संपन्न हुआ एक चिरंजीवी महोत्सव एक शाश्वत आशीर्वाद के साथ – – – कि फिर मिलेंगे। आमीन।

 

© हेमलता मिश्र “मानवी ” 

नागपुर, महाराष्ट्र




सूचनाएँ/Information – ☆ श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’ जी को क्रांतिधरा अंतरराष्ट्रीय साहित्य साधक सम्मान ☆

सूचनाएँ/Information

श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय “प्रकाश”

☆ श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’ जी को क्रांतिधरा अंतरराष्ट्रीय साहित्य साधक सम्मान ☆

 

सुप्रसिद्ध बालसाहित्यकार – श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय प्रकाश‘ जी को साहित्य सृजन, हिन्दी के प्रचार-प्रसार एवं बालसहित्य उन्नयन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए त्रिदिवसीय क्रान्तिधरा मेरठ साहित्यिक महाकुम्भ 2019, मेरठ में अंतरराष्ट्रीय हास्य कवि एवं शायर डॉ एजाज पॉपुलर मेरठी, श्री सरण घई (कनाडा), श्री कपिल कुमार (बेल्जियम ), श्री रामदेव धुरंधर (मारीशस), श्रीमती जया वर्मा (ब्रिटेन), डॉ रमा शर्मा (जापान), डॉक्टर श्वेता दीप्ति (नेपाल), डॉ सच्चिदानंद मिश्र (नेपाल) आदि देश-विदेश के मंचस्थ अतिथि साहित्यकारों के द्वारा #क्रांतिधरा_अंतरराष्ट्रीय_साहित्य_साधक_सम्मान प्रदान कर सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर देश विदेश से पधारे हुए 200 से अधिक शब्द शिल्पियों की उपस्थिति में यह गरिमामय सम्मान प्रदान किया गया।

उल्लेखनीय है कि श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय प्रकाश‘ जी का साहित्य सृजन, हिन्दी के प्रचार-प्रसार एवं बालसहित्य उन्नयन के क्षेत्र में  विशिष्ट योगदान है एवं आपकी बालकहानियाँ देश की प्रसिद्ध बाल पत्रिकाओं जैसे- नंदन, चम्पक, देवपुत्र, बाल किलकारी, हँसती दुनिया सहित कई पत्रपत्रिकाओं में प्रकाशित होती रहती हैं । हाल ही में एक पुस्तक प्रकाशन की स्वीकृति प्रकाशन विभाग, भारत सरकार द्वारा प्रदान की गई है। आप को इस गौरवशाली सम्मान की प्राप्ति पर इष्टमित्रों, पत्रकार बन्धु एवं साहित्यकार साथियों ने आपको हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी है।

 ई-अभिव्यक्ति द्वारा श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय “प्रकाश”  जी को इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई।




सूचनाएँ/Information – ☆ वर्तिका वार्षिकोत्सव ☆ – प्रस्तुति – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव‘विनम्र’ 

सूचनाएँ/Information

श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ 

(हम प्रतिष्ठित साहित्यकार श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ जी के  ह्रदय से आभारी हैं जिन्होने  ई-अभिव्यक्ति के लिए वर्तिका वार्षिकोत्सव की विशेष प्रस्तुति प्रेषित दी  है। यह  ई-अभिव्यक्ति के  लिए गर्व का विषय है कि  ई-अभिव्यक्ति के साप्ताहिक स्तम्भ – इंद्रधनुष के स्तम्भकारश्री संतोष नेमा ‘संतोष ‘ जी को इस कार्यक्रम में ‘वर्तिका राष्ट्रीय साहित्य चेतना अलंकरण से अलंकृत किया गया। )

ई-अभिव्यक्ति द्वारा सभी साहित्य मनीषियों को उनकी महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।

 ☆ वर्तिका वार्षिकोत्सव ☆

वर्तिका, संस्कारधानी जबलपुर की एक पंजीकृत एवं सक्रिय साहित्यिक-सामाजिक-सांस्कृतिक संस्था है. संस्था प्रतिवर्ष अपने वार्षिकोत्सव में देश के विभिन्न अंचलो से अनेक रचना धर्मियो को आमंत्रित कर सम्मानित करती है. वर्तिका से सम्मानित विद्वानो में श्री चंद्रसेन विराट ,प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव विदग्ध, श्री हरेराम समीप, आचार्य भगवत दुबे,  डॉ त्रिभुवन नाथ शुक्ल, भोपाल, इंजी विवेक रंजन श्रीवास्तव, श्री संजीव सलिल, दिल्ली के श्री जाली अंकल, हैदराबाद के श्री विजय सत्पथी, श्री हेमन्त बावनकर, श्री अनवर इस्लाम, श्री कुंवर प्रेमिल जैसे विद्वान शामिल हैं.

संस्था ने जबलपुर में विगत कई वर्षो से प्रति माह अंतिम रविवार को मासिक काव्य गोष्ठी आयोजित कर एक रचनात्मक वातावरण बनाया है. इस अवसर पर जिन साहित्यकारो का जन्म दिवस उस माह में होता है, उनकी रचनाओ पर आधारित काव्य पटल का विमोचन शहर की साहित्यिक गतिविधियो के केंद्र शहीद स्मारक में किया जाता है. वहाँ यह काव्य पटल पूरे माह आम जनता के लिये पठन मनन हेतु प्रदर्शित रहता है. वर्तिका ने समय समय पर युवा रचनाकारो के मार्गदर्शन हेतु गजल कैसे लिखें?  दोहा कैसे लिखें?  जैसे विषयों पर विद्वानो की कार्यशालायें आयोजित कर एक अलग पहचान बनाई है.

वर्तिका के वार्षिकोत्सव में इस बार १७ नवम्बर २०१९ को स्थानीय समन्वय केंद्र के भव्य सभागार में साहित्य मनीषियो की उपस्थिति तथा जबलपुर विश्वविद्यालय के यशस्वी कुलपति डा कपिल देव मिश्र जी के मुख्य आतिथ्य एवं श्री उमेश पिल्लई आयकर आयुक्त जी की विशिष्ट उपस्थिति में श्री भगवत दुबे जी की अध्यक्षता में एक गरिमामय समारोह में विभिन्न क्षेत्रो के विद्वत मनीषियो को सम्मानित किया.

कार्यक्रम का शुभारंभ श्वेता मिश्रा द्वारा सरस्वती वंदना के गायन से हुआ. अपनी कोकिल कंठी आवाज में कु अदिति नेमा ने भजन प्रस्तुत कर सभा को सम्मोहित कर दिया. इस मौके पर संस्था के संयोजक श्री विजय नेमा अनुज की सद्य प्रकाशित पुस्तक पतवार तुम्हें दे जाउंगा का विमोचन किया गया. प्रति वर्ष वर्तिका अपनी एक स्मारिका प्रकाशित करती है, इस वर्ष की स्मारिका वर्तिकायन का भी विमोचन समारोह में संपन्न हुआ. संस्था के अध्यक्ष श्री सोहन सलिल तथा सुश्री दिव्या सेठ ने  वरिष्ठ रचनाधर्मी प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव रचित नर्मदा स्तुति शांति दे माँ नर्मदे को संगीत बद्ध कर यू ट्यूब पर प्रस्तत करने का अनूठा काम किया है,  इस गीत का लोकार्पण भी समारोह में किया गया तथा गायक द्वय को वर्तिका स्मृति चिन्हो से सम्मानित किया गया. अध्यक्ष श्री सोहन सलिल ने अपने स्वागत उद्बोधन में विभिन्नता में एकता तथा निरंतरता के सूत्र को वर्तिका की ताकत कहा.  संस्था की गतिविधियो का संयोजक  प्रतिवेदन श्री विजय नेमा अनुज ने प्रस्तुत किया.  श्री उमेश पिल्लई जी को संस्था का संरक्षक मनोनीत किया गया.

इस अवसर पर साहित्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान हेतु  शिक्षाविद् श्रीमती दयावती श्रीवास्तव स्मृति  वर्तिका साहित्य अलंकरण मण्डला से आये हुये श्री कपिल वर्मा को प्रदान किया गया. उक्त अलंकरण श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव के सौजन्य से प्रदान किया जाता है.  पान उमरिया से पधारे हुये डा आर सी मिश्रा को एवं  इसी क्रम में मुम्बई के श्री संतोष सिंह को श्री सलिल तिवारी के सौजन्य से उनके पिता स्व श्री परमेश्वर प्रसाद तिवारी स्मृति अलंकरण से सम्मानित किया गया. श्री के के नायकर स्टेंड अप कामेडी के शिखर पुरुष हैं, उन्होने हास्य के क्षेत्र में  जबलपुर  को देश में स्थापित किया है. श्री नायकर को श्रीमती ममता जबलपुरी के सौजन्य से श्रीमती अमर कौर स्व हरदेव सिंह हास्य शिखर अलंकरण प्रदान किया गया. व्यंग्यकार श्री अभिमन्यू जैन को स्व सरन दुलारी श्रीवास्तव की स्मृति में व्यंग्य शिरोमणी अलंकरण दिया गया. इसी तरह श्री मदन श्रीवास्तव को स्व डा बी एन श्रीवास्तव स्मृति अलंकरण से सम्मानित किया गया. श्री सुशील श्रीवास्तव द्वारा अपने माता पिता स्व सावित्री परमानंद श्रीवास्तव की स्मृति में स्थापित अलंकरण प्रभा विश्वकर्मा शील को दिया गया. श्रीमती विजयश्री मिश्रा को स्व रामबाबूलाल उपाध्याय स्मृति अलंकरण दिया गया जो श्रीमती नीतू सत्यनारायण उपाध्याय द्वारा प्रायोजित है. श्री अशोक श्रीवास्तव सिफर द्वारा स्व राजकुमरी श्रीवास्तव स्मृति अलंकरण श्री संतोष नेमा को उनकी राष्ट्रीय साहित्य चेतना के लिये दिया गया. सुश्री देवयानी ठाकुर के सौजन्य से स्व ओंकार ठाकुर स्मृति कला अलंकरण से श्री सतीश श्रीवास्तव को सम्मानित किया गया. गाडरवाड़ा से पधारे हुये श्री विजय नामदेव बेशर्म को श्री सतीश श्रीवास्तव के सौजन्य से स्व भृगुनाथ सहाय स्मृति सम्मान से अलंकृत किया गया. वर्तिका प्रति वर्ष किसी सक्रिय साथी को संस्था के संस्थापक साज जी की स्मृति में लाइफ टाइम एचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित करती है, इस वर्ष यह प्रतिष्ठा पूर्ण सम्मान श्री सुशील श्रीवास्तव को  श्री अशोक झरिया शफक की ओर से प्रदान किया गया. इसके अतिरिक्त श्रीमती निर्मला तिवारी जी को कथा लेखन तथा युवा फिल्मकार आर्य वर्मा को युवा अलंकार से वर्तिका अलंकरण दिये गये.

वर्तिका ने सक्रिय संस्थाओ को भी सम्मानित करने की पहल की है, इस वर्ष नगर की साहित्य के लिये समर्पित संस्थाओ में पाथेय तथा प्रसंग को सम्मानित किया गया. कार्यक्रम का संचालन श्री दीपक तिवारी तथा श्री राजेश पाठक प्रवीण द्वारा किया गया. आभार प्रदर्शन सहभोज के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ.

आयोजन की साहित्यिक जगत में गहन प्रशंसापूर्ण चर्चा है.

प्रस्तुति – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव

संयोजक , वर्तिका , ए १ , विद्युत मण्डल कालोनी , रामपुर जबलपुर vivekranjan.vinamra@gmail.com




सूचना – हिन्दी साहित्य – ☆ ई-अभिव्यक्ति -गांधी स्मृति विशेषांक ☆ – (विशेषांक की रचनाएँ >>महत्वपूर्ण लिंक्स)

☆ ई-अभिव्यक्ति – गांधी स्मृति विशेषांक ☆

 

हम  2  अक्टूबर  2019 को  ई-अभिव्यक्ति  (www.e-abhivyakti.com ) द्वारा महात्मा गाँधी जी की 150वीं  जयंती पर प्रकाशित ई-अभिव्यक्ति -गांधी स्मृति विशेषांक  विशेषांक की रचनाओं के  महत्वपूर्ण लिंक्स उपलब्ध कर रहे हैं जिन्हें आप भविष्य में पढ़ सकते हैं।

ई-अभिव्यक्ति -गांधी स्मृति विशेषांक  में ई-अभिव्यक्ति की प्रस्तुति :-

  1. हिन्दी साहित्य – ई-अभिव्यक्ति संवाद – ☆ अतिथि संपादक की कलम से ……. महात्मा गांधी प्रसंग ☆ – श्री जय प्रकाश पाण्डेय – http://bit.ly/2oiSiae
  1. ई-अभिव्यक्ति: संवाद- 41 – ☆ ई-अभिव्यक्ति – गांधी स्मृति विशेषांक☆ – हेमन्त बावनकर – http://bit.ly/2n09wc7
  1. हिन्दी साहित्य – आलेख – ☆ दक्षिण अफ्रीका : मिस्टर बैरिस्टर एम. के. गांधी से गांधी बनाने की ओर ☆ श्री मनोज मीता, गांधीवादी चिंतक एवं समाजसेवी – http://bit.ly/2nuCAsA
  1. हिन्दी साहित्य – आलेख – ☆ गांधी विचार की वर्तमान प्रासंगिकता ☆ श्री राकेश कुमार पालीवाल, महानिदेशक (आयकर) हैदराबाद (प्रसिद्ध गांधीवादी चिंतक  ) – http://bit.ly/2nER7le
  1. हिन्दी साहित्य – आलेख – ☆ गांधी जी के मुख्य सरोकार ☆ डॉ.  मुक्ता (राष्ट्रपति पुरस्कार से पुरस्कृत) एवं पूर्व निदेशक हरियाणा साहित्य अकादमी – http://bit.ly/2oq2sFK
  1. हिन्दी साहित्य – व्यंग्य – ☆ सपने में बापू ☆ डॉ कुन्दन सिंह परिहार, वरिष्ठ साहित्यकार – http://bit.ly/2mRKpbq
  1. हिन्दी साहित्य – व्यंग्य – ☆ घोडा, न कि …. ☆ डॉ सुरेश कान्त, संपादक हिन्द पॉकेट बुक्स – http://bit.ly/2mKLKR6
  1. हिन्दी साहित्य – व्यंग्य – ☆ तेरा गांधी, मेरा गांधी; इसका गांधी, किसका गांधी! ☆ श्री प्रेम जनमेजय, व्यंग्य शिल्पी एवं संपादक – http://bit.ly/2mIfXjI
  1. हिन्दी साहित्य – व्यंग्य – ☆ राजघाट का मूल्य ☆ श्री संजीव निगम, वरिष्ठ साहित्यकार – http://bit.ly/2ok5wDC
  1. हिन्दी साहित्य – व्यंग्य – ☆ गांधी जिन्दा हैं और रहेंगे ☆ श्रीमती सुसंस्कृति परिहार – http://bit.ly/2mKFfOc
  1. हिन्दी साहित्य – आलेख – ☆ चंपारण सत्याग्रह: एक शिकायत की जाँच ☆ श्री अरुण कुमार डनायक, गांधीवादी चिंतक – http://bit.ly/2mO5eED
  1. हिन्दी साहित्य – कविता – ☆ अहिंसा का दूत ☆ सुश्री निशा नंदिनी भारतीय – http://bit.ly/2paYPEi
  1. हिन्दी साहित्य – संस्मरण – ☆ पकुआ के घर गाँधी जी ! ☆ श्री जय प्रकाश पाण्डेय – http://bit.ly/2mI78q6
  1. मराठी साहित्य – कविता – ☆ बापू ☆ श्री सुजित कदम, मराठी युवा साहित्यकार – http://bit.ly/2olLJn9
  1. हिन्दी साहित्य – व्यंग्य – ☆ क्योंकि मैं राष्ट्र मां नहीं ☆ श्रीमती समीक्षा तैलंग – http://bit.ly/2nDSYXD
  1. हिन्दी साहित्य – व्यंग्य – ☆ चौराहे पर गांधी! ☆ श्री प्रेम जनमेजय, व्यंग्य शिल्पी एवं संपादक – http://bit.ly/2nQ2VBn
  1. हिन्दी साहित्य – आलेख – ☆ महात्मा गांधी के सपनों का भारत ☆ डॉ भावना शुक्ल – http://bit.ly/2otaeiv
  1. हिन्दी साहित्य – व्यंग्य – ☆ बापू कभी इस जेब में कभी उस जेब में ☆ श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ – http://bit.ly/2oz1Bmg
  1. हिन्दी साहित्य – व्यंग्य – ☆ हे राम ! ☆ डॉ गंगाप्रसाद शर्मा ‘गुणशेखर’ – http://bit.ly/2nS9GCz
  1. हिन्दी साहित्य – व्यंग्य – ☆ कहाँ चल दिए बापू ☆ श्री विनोद कुमार ‘विक्की’ – http://bit.ly/2piJ9ic
  1. हिन्दी साहित्य – कविता – ☆ प्रश्नचिन्ह ☆ श्री रमेश सैनी – http://bit.ly/2nGgUtD
  1. हिन्दी साहित्य – लघुकथा – ☆ मानव ☆ श्री सदानंद आंबेकर – http://bit.ly/2nPuieQ
  1. हिन्दी साहित्य – आलेख – ☆ गांधी की खादी आज भी प्रासंगिक ☆ श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ – http://bit.ly/2mQoSji
  1. मराठी साहित्य – कविता – ☆ महात्मा गांधी……! ☆ – कविराज विजय यशवंत सातपुते, मराठी साहित्यकार – http://bit.ly/2mSkCj8
  1. हिन्दी साहित्य – लघुकथा – ☆ पूछ रहे बैकुंठ से बापू ☆ श्री मनोज जैन “मित्र” – http://bit.ly/2nG4L7Z
  1. हिन्दी साहित्य – लघुकथा – ☆ दृष्टि ☆ श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय “प्रकाश” – http://bit.ly/2pn1smx
  1. हिन्दी साहित्य – व्यंग्य लघुकथा – ☆ महात्मा गाँधी की जय ☆ श्री घनश्याम अग्रवाल – http://bit.ly/2osqznA
  1. हिन्दी साहित्य – संस्मरण – ☆ बा और बापू ☆ श्रीमति हेमलता मिश्र “मानवी “ – http://bit.ly/2nST8KT

धन्यवाद.




महत्वपूर्ण सूचना – ☆ महात्मा गांधी जी के150वीं जयंती पर विशेष – ☆ ई-अभिव्यक्ति – गांधी स्मृति विशेषांक ☆

 ☆ महत्वपूर्ण सूचना ☆

 ☆ ई-अभिव्यक्ति -गांधी स्मृति विशेषांक ☆

महात्मा गांधी जी के 150वीं जयंती पर ई-अभिव्यक्ति की विशेष प्रस्तुति “ई-अभिव्यक्ति -गांधी स्मृति विशेषांक”

 

इस विशेषांक में आप पढ़ सकेंगे अंतरराष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय स्तर के वरिष्ठ एवं साहित्य की विभिन्न विधाओं के सशक्त हस्ताक्षरों की रचनाएँ, जिनमें प्रमुख हैं :-

श्री राकेश कुमार पालीवाल, महानिदेशक (आयकर) हैदराबाद एवं प्रसिद्ध गांधीवादी चिंतक, डॉ मुक्ता, पूर्व निदेशक हरियाणा साहित्य अकादमी एवं राष्ट्रपति पुरस्कार से पुरस्कृत, वरिष्ठ साहित्यकार डॉ कुन्दन सिंह परिहार, डॉ सुरेश कान्त, श्री प्रेम जनमेजय, श्री संजीव निगम, श्रीमति सुसंस्कृति परिहार, श्री अरुण कुमार डनायक, सुश्री निशा नंदिनी भारतीय, श्री जय प्रकाश पाण्डेय, डॉ गुणशेखर शर्मा, श्री विनोद कुमार विक्की, श्री रमेश सैनी, श्री सदानंद आंबेकार, श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’, श्रीमती समीक्षा तैलंग, श्री मनोज जैन “मित्र”, श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय “प्रकाश”, मराठी साहित्यकार कवीराज विजय यशवंत सातपुते, श्री सुजित कदम एवं अन्य सुप्रसिद्ध साहित्य की विभिन्न विधाओं के सशक्त हस्ताक्षर।

आशा है आपको निश्चित ही इस अंक की प्रतीक्षा रहेगी ।

 




सूचनाएं /Information – ☆ महाराष्ट्र हिंदी साहित्य अकादमी द्वारा “चार पीढ़ी के कवि” प्रकाशित ☆

 ☆ सूचनाएं /Information ☆

 ☆ महाराष्ट्र हिंदी साहित्य अकादमी द्वारा “चार पीढ़ी के कवि” प्रकाशित ☆

सौ. सुजाता काळे

हिंदी भाषा के विकास के लिए ‘महाराष्ट्र हिंदी साहित्य अकादमी’ एवं ‘ सेंट पीटर्स विद्यालय, पंचगनी ‘ की ओर से 28 सितम्बर, 2019 को एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया था।

 

  • प्रथम सत्र में  डाॅ जीतेंद्र पांडेय जी द्वारा  सम्पादित पुस्तक ‘ चार पीढ़ी के कवि’ एवं उनकी लिखी हुई पुस्तक ‘कविता की स्वाधीन चेतना’ का लोकार्पण समारोह का आयोजन किया गया।
  • द्वितीय सत्र में  विद्यार्थियों के लिए ‘ अपने प्रिय गीतकार से मिलिए ‘ कार्यक्रम का आयोजन किया गया था।
  • तृतीय सत्र  में भाषायी संगम कार्यक्रम  का आयोजन किया गया था ।

 

सौ. सुजाता काळे जी  की कवितायें  ‘चार पीढ़ी के कवि  में सम्मिलित की गई है इसके लिए उन्हें  ई-अभिव्यक्ति की ओर से  हार्दिक बधाई. 

 

सौ. सुजाता काळे जी  मराठी एवं हिन्दी की काव्य एवं गद्य  विधा की सशक्त हस्ताक्षर हैं ।  वे महाराष्ट्र के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल कोहरे के आँचल – पंचगनी से ताल्लुक रखती हैं।  उनके साहित्य में मानवीय संवेदनाओं के साथ प्रकृतिक सौन्दर्य की छवि स्पष्ट दिखाई देती है। 

 

डॉ जीतेन्द्र पांडेय जी   को उनके संकलन  चार पीढ़ी के कवि एवं पुस्तक कविता की स्वाधीन चेतना  के लिए हार्दिक बधाई. साथ ही चार पीढ़ी के कवि में सम्मिलित सभी रचनाकारों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं. 

 




सूचनाएँ/Information – श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय “प्रकाश”  जी द्वारा इतिहास रचित

सूचनाएं /Information

 

श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय “प्रकाश”  जी  की कहानी “गांव का एक दिन” बनी सर्वाधिक पढ़ी जाने वाली 

श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय “प्रकाश”

सुप्रसिद्ध साहित्यकार एवं वरिष्ठ शिक्षक श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय “प्रकाश”  जी द्वारा इतिहास रचित. 

ऑनलाइन मंच स्टोरी वीवर के चार वर्ष पूर्ण होने पर आकलन किया गया कीओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’ की कहानी की पुस्तक — गांव में एक दिन को सर्वाधिक 11,594 पाठकों द्वारा पढ़ी गई जो अपने आप में एक इतिहास है. यह साल भर की गतिविधि के आधार पर दी गई प्रगति की सूचना है। स्मरणीय है कि स्टोरीविवर प्रथम बुक्स का औनलाइन मंच है जहां पर विश्व की सर्वाधिक 200 भाषाओं में कहानी की चित्रकथा पुस्तकें प्रसारित होती है।

ई-अभिव्यक्ति द्वारा श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय “प्रकाश”  जी को इस उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई.



सूचनाएं (Informations) – ☆ शिक्षक दिवस विशेषांक ☆ महत्वपूर्ण लिंक्स

☆ शिक्षक दिवस विशेषांक ☆

 

शिक्षक दिवस विशेषांक में आज प्रस्तुत है:-

  1. हिंदी साहित्य ☆ शिक्षक दिवस विशेष ☆ विमर्श – शिक्षक कल आज और कल ☆ ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’, श्रीमति समीक्षा तैलंग, श्रीमति उर्मिला उद्धवराव इंगळे एवं सुश्री स्मिता रविशंकर – http://bit.ly/32tShif
  1. मराठी साहित्य – ☆ शिक्षक दिवस विशेष ☆शिक्षक आजचा व कालचा ☆ – श्रीमति उर्मिला उद्धवराव इंगळे  – http://bit.ly/32tIuIZ
  1. English Literature – Teacher’s Day Special – The Last Day – Shri Suraj Kumar सिंह – http://bit.ly/32tskzp
  1. हिन्दी साहित्य – शिक्षक दिवस विशेष – ☆ वर्तमान शिक्षा का आधार प्राचीन शिक्षा व्यवस्था हो ☆ – डॉ ज्योत्सना सिंह राजावत – http://bit.ly/32vo4zm
  1. हिन्दी साहित्य – शिक्षक दिवस विशेष – ☆ इससे श्रेष्ठ शिक्षक नहीं देखे ☆ श्रीमति समीक्षा तैलंग – http://bit.ly/32rqiji
  1. हिन्दी साहित्य – शिक्षक दिवस विशेष – ☆ पाठशाला के आँगन में ☆ – श्री मच्छिंद्र बापू भिसे – http://bit.ly/2HMlVrf
  1. हिन्दी साहित्य – शिक्षक दिवस विशेष – कविता – ☆ शिक्षक के अधिकार व कर्तव्य ☆ – सुश्री मालती मिश्रा ‘मयंती’ – http://bit.ly/2HM77sE
  1. हिन्दी साहित्य – शिक्षक दिवस विशेष – कविता – ☆ आशीष ☆ – श्रीमति विशाखा मुलमुले – http://bit.ly/32ATQv7

 

कृपया उपरोक्त रचनाओं को पढ़कर अपने महत्वपूर्ण विचार कमेंट बॉक्स में अवश्य दें.




सूचना – हिन्दी साहित्य – ☆ परसाई स्मृति अंक ☆ – (विशेषांक की रचनाएँ >>महत्वपूर्ण लिंक्स)

? परसाई स्मृति अंक ?

हम 22 अगस्त 2019 को www.e-abhivyakti.com द्वारा स्व. परसाई जी  के जन्मदिवस पर प्रकाशित विशेषांक की रचनाओं के  महत्वपूर्ण लिंक्स उपलब्ध कर रहे हैं जिन्हें आप भविष्य में पढ़ सकते हैं।

 

परसाई स्मृति अंक में e-abhivyakti  की प्रस्तुति :-

  1. हिन्दी साहित्य – परसाई स्मृति अंक – संस्मरण ☆ पारदर्शी परसाई ☆ – डॉ.राजकुमार “सुमित्र” ☆>>http://bit.ly/30jWqop
  2. हिन्दी साहित्य – परसाई स्मृति अंक ☆ अतिथि संपादक की कलम से ……. परसाई प्रसंग ☆ – श्री जय प्रकाश पाण्डेय ☆>> – http://bit.ly/30sNg9a
  3. ई-अभिव्यक्ति: संवाद- 38 – हेमन्त बावनकर ☆>>http://bit.ly/30priE3
  4. हिन्दी साहित्य – परसाई स्मृति अंक – आलेख ☆ इस तरह गुजरा जन्मदिन ☆ – स्व. हरिशंकर परसाई ☆>> – http://bit.ly/2Zty5Q1
  5. हिन्दी साहित्य – परसाई स्मृति अंक – संस्मरण ☆ परसाई जी – अमिट स्मृति ☆ – आचार्य भागवत दुबे ☆>> – http://bit.ly/2ZiwNHn
  6. हिन्दी साहित्य – परसाई स्मृति अंक – आलेख ☆ परसाई जी – एक आम आदमी और खास लेखक ☆ – श्री हिमांशु राय ☆>> – http://bit.ly/30qG39u
  7. हिन्दी साहित्य – परसाई स्मृति अंक – आलेख ☆ परसाई का मूल्यांकन क्यों नहीं? ☆ – श्री एम.एम. चन्द्रा ☆>> – http://bit.ly/2ZmdrRy
  8. हिन्दी साहित्य – परसाई स्मृति अंक – आलेख ☆ स्वतंत्र विचार ☆ – श्री जय प्रकाश पाण्डेय ☆>> – http://bit.ly/30yGhM9
  9. हिन्दी साहित्य – परसाई स्मृति अंक – संस्मरण ☆ परसाई के रूपराम ☆ – श्री जय प्रकाश पाण्डेय ☆>> – http://bit.ly/2ZkaIbh
  10. हिन्दी साहित्य – परसाई स्मृति अंक – आलेख ☆ हरिशंकर परसाई… व्यंग्य से करते ठुकाई…!! ☆ – सुश्री इंदु सिंह ‘इन्दुश्री’ ☆>> –  http://bit.ly/30jE7zH
  11. हिन्दी साहित्य – परसाई स्मृति अंक – आलेख ☆ सच्चे मानव परसाई जी ☆ – डॉ महेश दत्त मिश्र ☆>> – http://bit.ly/2ZigCcT
  12. हिन्दी साहित्य – परसाई स्मृति अंक – संस्मरण ☆ व्यंग्यकार स्व. श्रीबाल पांडे ☆ – श्री जय प्रकाश पाण्डेय ☆>> – http://bit.ly/30rJvku
  13. हिन्दी साहित्य – परसाई स्मृति अंक – आलेख ☆ परसाई को जानने के ख़तरे ☆ – डॉ कुन्दन सिंह परिहार ☆>> – http://bit.ly/2ZirWGe
  14. हिन्दी साहित्य – परसाई स्मृति अंक – आलेख ☆ वर्तमान परिदृश्य में परसाई की प्रासंगिकता ☆ – सुश्री अलका अग्रवाल सिग्तिया ☆>> http://bit.ly/2Ze7I0f
  15. हिन्दी साहित्य – परसाई स्मृति अंक – आलेख ☆ युग पुरुष परसाई ☆ – श्री जय प्रकाश पाण्डेय ☆>> – http://bit.ly/30kAqK2
  16. हिन्दी साहित्य – परसाई स्मृति अंक – संस्मरण ☆ परसाई का गाँव ☆ – श्री जय प्रकाश पाण्डेय ☆>> – http://bit.ly/2ZirFDc
  17. हिन्दी साहित्य – परसाई स्मृति अंक – आलेख ☆ कबीर के ध्वज वाहक हरिशंकर परसाई ☆ – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ☆>>http://bit.ly/30pl5rD
  18. हिन्दी साहित्य – परसाई स्मृति अंक – नाटक ☆ सदाचार का तावीज ☆ – श्री वसंत काशीकर ☆ –>>http://bit.ly/30pmgYa

 

 

 

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