श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय “प्रकाश”
(सुप्रसिद्ध साहित्यकार श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय “प्रकाश” जी का हिन्दी बाल -साहित्य एवं हिन्दी साहित्य की अन्य विधाओं में विशिष्ट योगदान हैं। साप्ताहिक स्तम्भ “श्री ओमप्रकाश जी का साहित्य” के अंतर्गत उनकी मानवीय दृष्टिकोण से परिपूर्ण लघुकथाएं आप प्रत्येक गुरुवार को पढ़ सकते हैं। आज प्रस्तुत है आपकी एक अतिसुन्दर कविता – “परीक्षा”।)
☆ साप्ताहिक स्तम्भ – श्री ओमप्रकाश जी का साहित्य # 112 ☆
☆ कविता – परीक्षा ☆
मुझ से तुम न घबराना
चुपके से आ कर कहें परीक्षा.
घबराने से गायब होती
याद की थी जो बातेंशिक्षा.
याद रहा है जितना तुम को
लिख दो उस को, कहे परीक्षा.
सरल—सहल पहले लिखना
कानों में यह देती शिक्षा.
जो भी लिखना, सुंदर लिखना
सुंदरता की देती शिक्षा.
जितना पूछे, उतना लिखना
कह देती यह खूब परीक्षा.
© ओमप्रकाश क्षत्रिय “प्रकाश”
मोबाइल – 9424079675
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडल (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’/श्री जय प्रकाश पाण्डेय ≈