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हिन्दी साहित्य- कविता / दोहे ☆ आचार्य सत्य नारायण गोयनका जी के दोहे #2 ☆ प्रस्तुति – श्री जगत सिंह बिष्ट

आचार्य सत्य नारायण गोयनका (हम इस आलेख के लिए श्री जगत सिंह बिष्ट जी, योगाचार्य एवं प्रेरक वक्ता योग साधना / LifeSkills  इंदौर के ह्रदय से आभारी हैं, जिन्होंने हमारे प्रबुद्ध पाठकों के लिए ध्यान विधि विपश्यना के महान साधक – आचार्य सत्य नारायण गोयनका जी के महान कार्यों से अवगत करने में  सहायता की है। आप  आचार्य सत्य नारायण गोयनका जी के कार्यों के बारे में निम्न लिंक पर सविस्तार पढ़ सकते हैं।) आलेख का  लिंक  ->>>>>>  ध्यान विधि विपश्यना के महान साधक – आचार्य सत्य नारायण गोयनका जी  Shri Jagat Singh Bisht (Master Teacher: Happiness & Well-Being, Laughter Yoga Master Trainer, Author, Blogger, Educator, and Speaker.) ☆  कविता / दोहे ☆ आचार्य सत्य नारायण गोयनका जी के दोहे #2 ☆ प्रस्तुति – श्री जगत सिंह बिष्ट ☆  (हम  प्रतिदिन आचार्य सत्य नारायण गोयनका  जी के एक दोहे को अपने प्रबुद्ध पाठकों के साथ साझा करने का प्रयास करेंगे, ताकि आप उस दोहे के गूढ़ अर्थ को गंभीरता पूर्वक आत्मसात कर सकें। ) आचार्य सत्य नारायण गोयनका जी के दोहे बुद्ध वाणी को सरल,...
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आध्यात्म/Spiritual ☆ श्रीमद् भगवत गीता – पद्यानुवाद – दशम अध्याय (34) ☆ प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’

श्रीमद् भगवत गीता हिंदी पद्यानुवाद – प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’ दशम अध्याय (भगवान द्वारा अपनी विभूतियों और योगशक्ति का कथन)   मृत्युः सर्वहरश्चाहमुद्भवश्च भविष्यताम्‌। कीर्तिः श्रीर्वाक्च नारीणां स्मृतिर्मेधा धृतिः क्षमा ।।34।।   सर्वाहारी मृत्यु हूँ हूँ उद्भव की चाह नारी में वाणी क्षमा कीर्ति स्मृति परवाह।।34।।   भावार्थ :  मैं सबका नाश करने वाला मृत्यु और उत्पन्न होने वालों का उत्पत्ति हेतु हूँ तथा स्त्रियों में कीर्ति (कीर्ति आदि ये सात देवताओं की स्त्रियाँ और स्त्रीवाचक नाम वाले गुण भी प्रसिद्ध हैं, इसलिए दोनों प्रकार से ही भगवान की विभूतियाँ हैं), श्री, वाक्‌, स्मृति, मेधा, धृति और क्षमा हूँ।।34।।   And I am all-devouring death, and prosperity of those who are to be prosperous; among feminine qualities (I am) fame, prosperity, speech, memory, intelligence, firmness and forgiveness.।।34।।   प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’ ए १ ,विद्युत मण्डल कालोनी, रामपुर, जबलपुर vivek1959@yahoo.co.in...
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हिन्दी साहित्य- कविता / दोहे ☆ आचार्य सत्य नारायण गोयनका जी के दोहे #1 ☆ प्रस्तुति – श्री जगत सिंह बिष्ट

आचार्य सत्य नारायण गोयनका (हम इस आलेख के लिए श्री जगत सिंह बिष्ट जी, योगाचार्य एवं प्रेरक वक्ता योग साधना / LifeSkills  इंदौर के ह्रदय से आभारी हैं, जिन्होंने हमारे प्रबुद्ध पाठकों के लिए ध्यान विधि विपश्यना के महान साधक – आचार्य सत्य नारायण गोयनका जी के महान कार्यों से अवगत करने में  सहायता की है। आप  आचार्य सत्य नारायण गोयनका जी के कार्यों के बारे में निम्न लिंक पर सविस्तार पढ़ सकते हैं।) आलेख का  लिंक  ->>>>>>  ध्यान विधि विपश्यना के महान साधक – आचार्य सत्य नारायण गोयनका जी  Shri Jagat Singh Bisht (Master Teacher: Happiness & Well-Being, Laughter Yoga Master Trainer, Author, Blogger, Educator, and Speaker.) ☆  कविता / दोहे ☆ आचार्य सत्य नारायण गोयनका जी के दोहे #1 ☆ प्रस्तुति – श्री जगत सिंह बिष्ट ☆  (हम  प्रतिदिन आचार्य सत्य नारायण गोयनका  जी के एक दोहे को अपने प्रबुद्ध पाठकों के साथ साझा करने का प्रयास करेंगे, ताकि आप उस दोहे के गूढ़ अर्थ को गंभीरता पूर्वक आत्मसात कर सकें। ) आचार्य सत्य नारायण गोयनका जी के दोहे बुद्ध वाणी को सरल,...
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आध्यात्म/Spiritual ☆ श्रीमद् भगवत गीता – पद्यानुवाद – दशम अध्याय (33) ☆ प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’

श्रीमद् भगवत गीता हिंदी पद्यानुवाद – प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’ दशम अध्याय (भगवान द्वारा अपनी विभूतियों और योगशक्ति का कथन)   अक्षराणामकारोऽस्मि द्वंद्वः सामासिकस्य च । अहमेवाक्षयः कालो धाताहं विश्वतोमुखः ।।33।।   हूँ अकार अक्षरों में द्वंद समास समास मैं ही अक्षर काल हूँ धाता सविश्वास।।33।।   भावार्थ :  मैं अक्षरों में अकार हूँ और समासों में द्वंद्व नामक समास हूँ। अक्षयकाल अर्थात्‌काल का भी महाकाल तथा सब ओर मुखवाला, विराट्स्वरूप, सबका धारण-पोषण करने वाला भी मैं ही हूँ।।33।।   Among the  letters  of  the  alphabet,  the  letter  “A”  I  am,  and  the  dual  among  the compounds. I am verily the inexhaustible or everlasting time; I am the dispenser (of the fruits of actions), having faces in all directions.।।33।।   प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’ ए १ ,विद्युत मण्डल कालोनी, रामपुर, जबलपुर vivek1959@yahoo.co.in...
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हिन्दी साहित्य- कविता / दोहे ☆ आचार्य सत्य नारायण गोयनका जी के दोहे ☆ प्रस्तुति – श्री जगत सिंह बिष्ट

आचार्य सत्य नारायण गोयनका (हम इस आलेख के लिए श्री जगत सिंह बिष्ट जी, योगाचार्य एवं प्रेरक वक्ता योग साधना / LifeSkills  इंदौर के ह्रदय से आभारी हैं, जिन्होंने हमारे प्रबुद्ध पाठकों के लिए ध्यान विधि विपश्यना के महान साधक – आचार्य सत्य नारायण गोयनका जी के महान कार्यों से अवगत करने में  सहायता की है। आप  आचार्य सत्य नारायण गोयनका जी के कार्यों के बारे में निम्न लिंक पर सविस्तार पढ़ सकते हैं।) आलेख का  लिंक  ->>>>>>  ध्यान विधि विपश्यना के महान साधक – आचार्य सत्य नारायण गोयनका जी  Shri Jagat Singh Bisht (Master Teacher: Happiness & Well-Being, Laughter Yoga Master Trainer, Author, Blogger, Educator, and Speaker.) ☆  कविता / दोहे ☆ आचार्य सत्य नारायण गोयनका जी के दोहे ☆ प्रस्तुति - श्री जगत सिंह बिष्ट ☆  (हम  प्रतिदिन आचार्य सत्य नारायण गोयनका  जी के एक दोहे को अपने प्रबुद्ध पाठकों के साथ साझा करने का प्रयास करेंगे, ताकि आप उस दोहे के गूढ़ अर्थ को गंभीरता पूर्वक आत्मसात कर सकें। ) आचार्य सत्यनारायण गोयन्का के दोहे बुद्ध वाणी को...
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आध्यात्म/Spiritual ☆ श्रीमद् भगवत गीता – पद्यानुवाद – दशम अध्याय (32) ☆ प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’

श्रीमद् भगवत गीता हिंदी पद्यानुवाद – प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’ दशम अध्याय (भगवान द्वारा अपनी विभूतियों और योगशक्ति का कथन)   सर्गाणामादिरन्तश्च मध्यं चैवाहमर्जुन । अध्यात्मविद्या विद्यानां वादः प्रवदतामहम्‌॥   आदि,मध्य औ" अंत हूँ सकल सृष्टि का पार्थ! विद्या में अध्यात्म हूँ वाचालों में वाद।।32।।        भावार्थ :  हे अर्जुन! सृष्टियों का आदि और अंत तथा मध्य भी मैं ही हूँ। मैं विद्याओं में अध्यात्म विद्या अर्थात्‌ ब्रह्मविद्या और परस्पर विवाद करने वालों का तत्व-निर्णय के लिए किया जाने वाला वाद हूँ।।32।।   Among creations I am the beginning, the middle and also the end, O Arjuna! Among the sciences I am the science of the Self; and I am logic among controversialists. ।।32।।   प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’ ए १ ,विद्युत मण्डल कालोनी, रामपुर, जबलपुर vivek1959@yahoo.co.in...
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आध्यात्म/Spiritual ☆ श्रीमद् भगवत गीता – पद्यानुवाद – दशम अध्याय (31) ☆ प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’

श्रीमद् भगवत गीता हिंदी पद्यानुवाद – प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’ दशम अध्याय (भगवान द्वारा अपनी विभूतियों और योगशक्ति का कथन)   पवनः पवतामस्मि रामः शस्त्रभृतामहम्‌। झषाणां मकरश्चास्मि स्रोतसामस्मि जाह्नवी ।।31।।   पावन कर्ता पवन हूँ धनुर्वीर श्रीराम नदियों में गंगा नदी,मत्स्य मगर उद्दाम।।31।।   भावार्थ :  मैं पवित्र करने वालों में वायु और शस्त्रधारियों में श्रीराम हूँ तथा मछलियों में मगर हूँ और नदियों में श्री भागीरथी गंगाजी हूँ।।31।।   Among the purifiers (or the speeders) I am the wind; Rama among the warriors am I; among the fishes I am the shark; among the streams I am the Ganga.।।31।।   प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’ ए १ ,विद्युत मण्डल कालोनी, रामपुर, जबलपुर vivek1959@yahoo.co.in ...
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आध्यात्म/Spiritual ☆ श्रीमद् भगवत गीता – पद्यानुवाद – दशम अध्याय (30) ☆ प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’

श्रीमद् भगवत गीता हिंदी पद्यानुवाद – प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’ दशम अध्याय (भगवान द्वारा अपनी विभूतियों और योगशक्ति का कथन)   प्रह्लादश्चास्मि दैत्यानां कालः कलयतामहम्‌। मृगाणां च मृगेन्द्रोऽहं वैनतेयश्च पक्षिणाम्‌।।30।।   सब पक्षियों में हूँ गरूड पशुओं मध्य मृगेन्द्र दैत्यों में प्रहलाद हूँ गणकों में कालेन्द्र।।30।।   भावार्थ : मैं दैत्यों में प्रह्लाद और गणना करने वालों का समय (क्षण, घड़ी, दिन, पक्ष, मास आदि में जो समय है वह मैं हूँ) हूँ तथा पशुओं में मृगराज सिंह और पक्षियों में गरुड़ हूँ।।30।।   And, I am Prahlad among the demons; among the reckoners I am time; among beasts I am their king, the lion; and Garuda among birds.।।30।।   प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’ ए १ ,विद्युत मण्डल कालोनी, रामपुर, जबलपुर vivek1959@yahoo.co.in...
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आध्यात्म/Spiritual ☆ श्रीमद् भगवत गीता – पद्यानुवाद – दशम अध्याय (29) ☆ प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’

श्रीमद् भगवत गीता हिंदी पद्यानुवाद – प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’ दशम अध्याय (भगवान द्वारा अपनी विभूतियों और योगशक्ति का कथन)   अनन्तश्चास्मि नागानां वरुणो यादसामहम्‌। पितॄणामर्यमा चास्मि यमः संयमतामहम्‌।।29।।   जलचर बीच में वरूण हूँ नागों बीच अनंत पितरों में हूँ अर्थमा,नियमन कर्ता यम।।29।।   भावार्थ : मैं नागों में (नाग और सर्प ये दो प्रकार की सर्पों की ही जाति है।) शेषनाग और जलचरों का अधिपति वरुण देवता हूँ और पितरों में अर्यमा नामक पितर तथा शासन करने वालों में यमराज मैं हूँ।।29।।   I am Ananta among the Nagas; I am Varuna among water-Deities; Aryaman among the manes I am; I am Yama among the governors.।।29।।   प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’ ए १ ,विद्युत मण्डल कालोनी, रामपुर, जबलपुर vivek1959@yahoo.co.in...
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योग-साधना LifeSkills/जीवन कौशल ☆ Yoga Asanas: Yoga Asanas: Chandra Namaskara: Salutations to the Moon  – Video #4 ☆ Shri Jagat Singh Bisht

Shri Jagat Singh Bisht (Master Teacher: Happiness & Well-Being, Laughter Yoga Master Trainer, Author, Blogger, Educator, and Speaker.) ☆  Yoga Asanas: Chandra Namaskara: Salutations to the Moon ☆  Video Link >>>> YOGA: VIDEO # 4 This posture develops balance and concentration; the breathing pattern becomes more demanding - inhalation, exhalation and breath retention are all prolonged. The lunar energy flows within ida nadi. It has cool, relaxing and creative qualities. The word ‘chandra’ means the moon. Just as the moon, having no light of its own, reflects the light of the sun, so the practice of chandra namaskara reflects that of the surya namaskara. The sequence of the asanas is the same as surya namaskara except that ‘ardha chandrasana’, the half moon pose, is performed after ashwa sanchalanasana. Also, in ashwa sanchalanasana the left leg is extended back in the first half of the round, activating ida nadi, the lunar force. In the second half of the round, the right leg is extended back. The inclusion of ardha chandrasana is a significant change....
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