सौ. सुनिता गद्रे
☆ मनोगत – ई-अभिव्यक्तीचे दुसऱ्या वर्षात पदार्पण ☆ सौ. सुनिता गद्रे ☆
?? हार्दिक आभार ??
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडळ (मराठी) – श्रीमती उज्ज्वला केळकर/श्री सुहास रघुनाथ पंडित /सौ. मंजुषा मुळे ≈
ई-अभिव्यक्ति: संवाद
☆ ई-अभिव्यक्ति: संवाद ☆ ई-अभिव्यक्ति (मराठी) का प्रथम वर्ष सम्पन्न ☆ 15 अगस्त 2021 से ई-अभिव्यक्ति का पुनर्प्रकाशन ☆
प्रिय मित्रों,
सादर अभिवादन,
ई-अभिव्यक्ति (मराठी) के प्रथम वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष में समस्त स्नेही सुहृदय मराठी लेखकगण एवं पाठकगण का हृदयतल से आभार। यह एक सुखद आश्चर्य है कि ई-अभिव्यक्ति वेबसाइट पर मेरी अनुपस्थिति के बावजूद संपादक मंडळ ई-अभिव्यक्ति (मराठी) ने अपनी प्रिय ई-पत्रिका को ई-अभिव्यक्ती:मराठी व्हाट्स एप्प ग्रुप के माध्यम से स्तरीय रचनाओं का प्रकाशन सतत जारी रखा। इस अभूतपूर्व सहयोग एवं समर्पण की भावना के लिए मैं आदरणीया श्रीमती उज्ज्वला केळकर, श्री सुहास रघुनाथ पंडित जी एवं सौ. मंजुषा मुळे जी का हृदय से आभारी हूँ।
यह शाश्वत सत्य है कि “होइहि सोइ जो राम रचि राखा”। प्रत्येक मनुष्य के जीवन में कुछ कठिन पल आते हैं, जो ईश्वर पर विश्वास, वरिष्ठ जनों के आशीर्वाद एवं स्नेही जनों कि शुभकामनाओं से चले भी जाते हैं। हम पुनः सुखद पलों में जीने लगते हैं।
कुछ माह पूर्व ही मैंने एवं श्री जय प्रकाश पाण्डेय जी ने कोरोना से संबन्धित स्वास्थ्य समस्याओं से निजात पाने में सफलता प्राप्त की। उसके पश्चात मैं गॉल ब्लैडर के स्टोन की शल्य क्रिया से गुजरा किन्तु, अब स्वस्थ हूँ।
इस बीच एक शुभ समाचार मिला कि – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव जी की सुपुत्री चि. सौ. अनुभा का शुभ विवाह लंदन में सानंद सम्पन्न हुआ। श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव जी 31 जुलाई 2021 को मध्यप्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कं लि, जबलपुर से अपनी समर्पित सेवाएँ पूर्ण कर सेवानिवृत्त हुए।
?? हम सभी की ओर से सौ. अनुभा को सुखद वैवाहिक जीवन एवं श्री विवेक रंजन जी को स्वस्थ सेवानिवृत्त जीवन के लिए हार्दिक शुभकामनाएं
??
अब हम सब सकारात्मक एवं स्तरीय साहित्य को समर्पित भावना से ससम्मान प्रकाशित करने के दृढ़ निश्चय के साथ आपके समक्ष पुनः उपस्थित हैं । हम कल स्वतन्त्रता दिवस के शुभ अवसर पर 15 अगस्त 2021 से ई-अभिव्यक्ति का प्रकाशन पुनः प्रारम्भ करने जा रहे हैं।
आपके आशीर्वाद एवं स्नेह की अपेक्षा सहित
????
हेमन्त बावनकर
14 अगस्त 2021
ई-अभिव्यक्ति: संवाद
☆ ई-अभिव्यक्ति: संवाद ☆ सनम्र निवेदन ☆
प्रिय मित्रों,
सादर अभिवादन,
ईश्वर की कृपा एवम आप सब के आत्मीय स्नेह से कोरोना से पार पा सका। मेरे एवं आपके दैनिक जीवन के अभिन्न अंग ई-अभिव्यक्ति ने पुनः गति पकड़ी ही थी कि कुछ विकट स्वास्थ्य समस्याओं ने पुनः जकड़ लिया।
“होइहि सोइ जो राम रचि राखा”
मुझे ईश्वर पर पूरा विश्वास है कि मैं शीघ्र ही स्वस्थ होकर पुनः ई-अभिव्यक्ति को नवीन तकनीकी स्वरूप में आपके समक्ष प्रस्तुत कर सकूँगा। साथ ही आपकी रचनाओं को ससम्मान वेबसाइट पर प्रकाशित कर सकूंगा।
आपके आशीर्वाद एवं स्नेह की अपेक्षा सहित
????
हेमन्त बावनकर
22 जून 2021
श्रीमती उज्ज्वला केळकर
☆ ई-अभिव्यक्ति: संवाद ☆ निवेदन ☆ श्रीमती उज्ज्वला केळकर ☆
आपल्या ई-अभिव्यक्तीचे प्रमुख संपादक मा. श्री. हेमंत बावनकर यांनी आपल्या सर्वांसाठी पाठवलेला संदेश —-
सर्व सुह्रदांना नमस्कार,
ईश्वराची कृपा आणि आपल्या सर्वांचा मनापासूनचा स्नेह यामुळे मी करोनाच्या विळख्यातून सुखरूप बाहेर
येऊ शकलो माझ्या आणि आपणा सर्वांच्याच दैनंदिन जीवनाचा अविभाज्य भाग झालेल्या ई-अभिव्यक्तीचे
कामही पुन्हा नव्या जोमाने करायला लागलो होतो. इतक्यात प्रकृतीच्या काही कठीण समस्यांनी मला पुन्हा
घेरले. म्हणतात ना-
“होइहि सोइ जो राम रचि राखा”
— हेच खरं. पण परमेश्वरावर माझा पूर्ण विश्वास आहे, आणि लवकरच मी पूर्ण बरा होऊन ई- अभिव्यक्तीला
नव्या तांत्रिक स्वरूपात आपल्यासमोर प्रस्तुत करू शकेन. त्याचबरोबर आपणा सर्वांचे लिखाण वेबसाईटवर
सन्मानाने प्रकाशित करू शकेन .
आपल्या सर्वांच्या आशीर्वादाची आणि स्नेहाची अपेक्षा करत आहे. ????
हेमंत बावनकर
ई-अभिव्यक्ती मराठी विभागाचे सर्व संपादक आपल्या सर्वांच्या वतीने ईश्वर चरणी प्रार्थना करतो की श्री. बावनकर
सरांना लवकरात लवकर पूर्णपणे प्रकृतीस्वास्थ्य लाभो. ????
श्रीमती उज्ज्वला केळकर, सम्पादिका ई-अभिव्यक्ती (मराठी)
≈ सम्पादक मंडळ (मराठी) – श्रीमती उज्ज्वला केळकर/श्री सुहास रघुनाथ पंडित /सौ. मंजुषा मुळे ≈
ई-अभिव्यक्ति: संवाद
☆ ई-अभिव्यक्ति: संवाद ☆ आज समवेत प्रयासों की सकारात्मकता जरूरी है ☆ श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ☆
प्रिय मित्रो,
यह सदियों में होने वाला अत्यंत दुष्कर समय है । जहाँ हम पड़ोस की किसी एक अकाल मृत्यु से विचलित हो जाते थे उसी देश मे अब तक सवा तीन लाख मृत्यु कोरोना से हो चुकीं हैं , यदि अब दुनिया को ग्लोबल विलेज मानते हैं तो आंकड़े गम्भीर हैं । और यह तो केवल मृत्यु के आंकड़े हैं । कितने ही लोग बुरी तरह से स्वास्थ्य , आर्थिक , रोजगार, चक्रवात/प्राकृतिक आपदा या अन्य तरह से महामारी से प्रभावित हैं । और इस सबका अंत तक सुनिश्चित नहीं है ।
ऐसी भयावहता में केवल सकारात्मक होना ही हमें बचा सकता है । रात के बाद सुबह जरूर होगी पर तब तक धैर्य और जीवन बचाये रखना होगा । यह तभी सम्भव है जब समाज समवेत प्रयास करे । व्यक्ति अपनी रचनात्मक वृत्तियों को एकाकार करे । जिस तरह पायल से आती मधुर झंकार में हर घुंघरू की आवाज शामिल होती है , किन्तु किस घुंघरू की आवाज का समवेत मधुर ध्वनि में क्या योगदान है कहा नही जा सकता , वैसे सकारात्मक माहौल से ही व्यक्ति व समाज इस नकारात्मकता पर विजय पा सकेगा ।
किन्तु दुखद है कि आज राजनेता आरोप प्रत्यारोप में उलझे हैं , मुनाफाखोरी कालाबाजारी चरम पर है । चिकित्सा शास्त्रों की लड़ाई हो रही हैं । राष्ट्र वर्चस्व और विस्तार की लड़ाई लड़ रहे हैं ।
ऐसे कठिन समय में साहित्य का दायित्व है कि समवेत सकरात्मकता के एकात्म का विचार विश्व में अधिरोपित करे ।
जिससे यह सुंदर विश्व पुनः सामान्य हो सके ।
आज बस इतना ही।
विवेक रंजन श्रीवास्तव
संपादक ई- अभिव्यक्ति (हिंदी)
30 मई 2021
ई-अभिव्यक्ति: संवाद
☆ ई-अभिव्यक्ति: संवाद ☆ कोरोना आपदा के क्षण (लॉकडाउन, क्वारंटाइन और आइसोलेशन) ☆ हेमन्त बावनकर
प्रिय मित्रो,
आज हम सब जीवन के एक अत्यंत कठिन दौर से गुज़र रहे हैं। एक ऐसा कालखंड जिसकी किसी ने कभी कल्पना तक नहीं की थी।
ई-अभिव्यक्ति परिवार भी इस आपदा से सुरक्षित नहीं रह पाया। हमारे कई सम्माननीय लेखक और पाठक भी इस आपदा से ग्रसित हुए एवं अधिकतर ईश्वर की अनुकंपा से एवं आपके अपार स्नेह और दुआओं से इस आपदा से सुरक्षित निकल आए।
इस दौर से मैं स्वयं एवं श्री जय प्रकाश पाण्डेय जी (संपादक – ई-अभिव्यक्ति (हिन्दी) अभी हाल ही में स्वस्थ होकर स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं।
यह ईश्वर की अनुकंपा एवं आप सब का अपार स्नेह ही है जो हम आप की सेवा में पुनः उपस्थित हो सके। हमें पूर्ण विश्वास है कि हम शनैः शनैः पुनः उसी ऊर्जा के साथ स्वस्थ एवं सकारात्मक साहित्य सेवा में अपना योगदान अविरत जारी रख सकेंगे।
आज हम किसी वैज्ञानिक फंतासी में जीवाणु युद्ध के पात्रों की तरह जीवन जीने को मजबूर हैं। जहां तक दृष्टि जाती है वहाँ तक ऐसा कोई परिवार, संबंधी या मित्र नहीं है जिसके निकट संबंधियों या मित्रगणों में किसी का कोविड से निधन न हुआ हो या कोविड से ग्रस्त न हुआ हो । ऐसा कोई दिन नहीं जाता है जब सोशल मीडिया में किसी के कोविड ग्रस्त होने या निधन का संदेश नहीं मिलता। ऐसे समय सुप्रसिद्ध शायर बशीर बद्र की पंक्ति – “अभी राह में कई मोड़ हैं कोई आएगा कोई जाएगा” अक्सर याद आती हैं। श्रद्धांजलि अर्पित करते हम सब की उँगलियाँ थक गईं है और आँसू सूख गए हैं।
वह स्वच्छंद बीता हुआ समय कब आयेगा यह भी कल्पना मात्र ही है। पता नहीं वह कभी आयेगा भी या नहीं। वह बीता हुआ एक एक क्षण स्वप्न सा लगता है। अब तो बस ‘मास्क’ और हैंड सेनिटाइजर ही जीवन के महत्वपूर्ण अंग हो गए हैं । ऐसे में फिर बशीर बद्र की कालजयी पंक्ति – “ये नए मिज़ाज का शहर है ज़रा फ़ासले से रहा करो” आज के परिपेक्ष्य में सदा के लिए सचेत करती है।
इस आपदा के समय सभी लोग किसी न किसी रूप में प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से मानवता में अपना योगदान दे रहे हैं। सबकी अपनी-अपनी सीमायें हैं। कोई व्यक्तिगत रूप से, कोई चिकित्सकीय सहायता के रूप से तो कोई आर्थिक सहायता के रूप से अपना योगदान दे रहे हैं।
ऐसे में कुछ लोग सम्पूर्ण मानवता के लिए अपना अभूतपूर्व आध्यात्मिक योगदान दे रहे हैं। उनका मानना है कि हमारी वैदिक परंपरा के अनुसार यदि हम सामूहिक रूप से प्रार्थना, श्लोकों का उच्चारण करें तो समस्त भूमण्डल में एक सकारात्मक ऊर्जा का संचरण होता है और “वसुधैव कुटुम्बकम” की अवधारणाना के अंतर्गत समस्त मानवता को इसका सकारात्मक लाभ अवश्य मिलता है। इस आध्यात्मिक अभियान के प्रणेता श्री संजय भारद्वाज जी के हम हृदय से आभारी हैं जिन्होंने हमारी जिज्ञासा स्वरुप ह्रदय में उत्पन्न कुछ प्रश्नों का उत्तर एक साक्षात्कार स्वरुप दिया है। इस सकारात्मकता का अनुभव मैंने स्वयं अपने “होम आइसोलेशन” के समय प्राप्त किया है।
हमें पूर्ण विश्वास है कि वर्तमान परिस्थितयों में आपदा के इन क्षणों (लॉकडाउन, क्वारंटाइन और आइसोलेशन) में अध्यात्म द्वारा स्वयं एवं अपने आसपास सकारात्मक ऊर्जा के संचरण के लिए आपकी भी अध्यात्म सम्बन्धी जिज्ञासाओं की पूर्ति आध्यात्मिक अभियान “आपदां अपहर्तारं” के इस साक्षात्कार के माध्यम से पूर्ण हो सकेगी।
विदित हो कि इस आध्यात्मिक अभियान “आपदां अपहर्तारं” एक आज एक वर्ष पूर्ण हो जायेंगे और आपके ही एक और अभियान “हिंदी आंदोलन” ने इस वर्ष अपने सफल 26 वर्ष पूर्ण किये हैं। इस निःस्वार्थ वैश्विक एवं आध्यात्मिक मानव सेवा के लिए इन दोनों अभियानों के प्रणेताओं श्री संजय भारद्वाज जी एवं श्री सुधा भारद्वाज जी को हार्दिक शुभकामनायें।
हमारी इस अनुपस्थिति के दौर में भी ई-अभिव्यक्ति (मराठी) के संपादक मण्डल के हम हृदय से आभारी हैं जिन्होने इस यात्रा को अपने व्हाट्स एप ग्रुप में जारी रखा। इस समर्पण, उत्साह, अपार स्नेह एवं सहयोग की भावना वास्तव में अनुकरणीय तथा सराहनीय कदम है। इस समर्पण की भावना एवं जिजीविषा को सादर नमन।
ई-अभिव्यक्ति परिवार की ईश्वर से करबद्ध प्रार्थना है कि जो वर्तमान में कोविड से जूझ रहे हैं उन्हें इस आपदा/पीड़ा को सहन करने की शक्ति प्रदान करे ताकि वे पुनः अपने परिवार के साथ सामान्य जीवन यापन कर सकें, दिवंगत आत्माओं को शांति प्रदान करे एवं उनके परिजनों को इस आकस्मिक दुःख को सहन करने की असीमित शक्ति प्रदान करें।
हमारा पूर्ण प्रयास है कि हम इस रविवार 23 अप्रैल से आपकी सेवा में पुनः अविरत उपस्थित हो सकें।
आपका प्रतिसाद और अपार स्नेह ही हमारा सम्बल है।
आज बस इतना ही।
हेमन्त बावनकर
19 मई 2021
ई-अभिव्यक्ति: संवाद–52
☆ ई-अभिव्यक्ति: संवाद- 52 ☆ पिता का होना या न होना ! ☆
प्रिय मित्रो,
किसी भी रिश्ते का एहसास उसके होने से अधिक उसके खोने पर होता है।
अनायास ही मन में विचार आया कि – साहित्य, सिनेमा और रिश्तों में ‘पिता’ को वह स्थान क्यों नहीं मिल पाया जो ‘माँ’ को मिला है? आखिर इसका उत्तर भी तो आप के ही पास है और आपकी संवेदनशीलता के माध्यम से मुझे उस उत्तर को सबसे साझा भी करना है।
जरा कल्पना कीजिये कैसा लगता होगा? जब किसी को समाचार मिलता है कि वह ‘पिता’ बन गया, ‘पिता’ नहीं बन सकता, बेटे का पिता बन गया, बेटी का पिता बन गया, दिव्याङ्ग का पिता बन गया, थर्ड जेंडर का पिता बन गया। फिर बतौर संतान इसका विपरीत पहलू भी हो सकता है। कैसा लगा है जब हम सुनते हैं – संतान ने पिता खो दिया या पिता ने संतान खो दिया। यदि ‘पिता’ शब्द का संवेदनाओं से गणितीय आकलन करें तो उससे संबन्धित कल्पनीय और अकल्पनीय विचारों और संवेदनाओं के कई क्रमचय (Permutation) और संचय (Combination) हो सकते हैं। चलिये यह आपके संवेदनशील हृदय पर छोड़ते हैं।
आपसे बस अनुरोध यह कि – ‘पिता’ शब्द / रिश्ते पर आधारित आपकी सर्वाधिक प्रिय रचना साहित्य की किसी भी विधा में जैसे कविता / लघुकथा / कथा / आलेख और व्यंग्य (यदि हो तो)) ईमेल [email protected] पर प्रेषित करें।
शीर्षक / विषय – ‘पिता’
चित्र एवं संक्षिप्त जीवन परिचय (अधिकतम 250 शब्दों में)
अधिकतम शब्द – सीमा 1000 शब्द
भाषा – हिन्दी, मराठी एवं अङ्ग्रेज़ी
अंतिम तिथि – 10 मार्च 2021
साथ में यह आशय कि –
रचना स्वरचित है। ई-अभिव्यक्ति को किसी भी माध्यम में प्रकाशित / प्रसारित करने का अधिकार / अनुमति है।
यह कोई प्रतियोगिता नहीं अपितु आपकी संवेदनाओं को प्रबुद्ध पाठकों से साझा करने का प्रयास मात्र है और ई-अभिव्यक्ति ऐसे संवेदनशील प्रयोग हेतु कटिबद्ध है।
आज बस इतना ही।
हेमन्त बावनकर
24 फ़रवरी 2021
ई-अभिव्यक्ति -संवाद
प्रिय मित्रो,
कौन कहता है आसमां में सुराख नहीं हो सकता
एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों…
दुष्यंत कुमार की ये पंक्तियाँ हमें हमारे जीवन और कर्म को नई दिशा प्रदान करती है।
यह ई-अभिव्यक्ति परिवार ( ई- अभिव्यक्ति – हिन्दी/मराठी/अंग्रेजी) के परिश्रम एवं आपके भरपूर प्रतिसाद तथा स्नेह का फल है जो इन पंक्तियों के लिखे जाने तक आपकी अपनी वेबसाइट पर 3,50,500+ विजिटर्स अब तक विजिट कर चुके हैं।
( ई-अभिव्यक्ति (हिन्दी) संपादक मण्डल के संपादक-द्वय मित्रों श्री जय प्रकाश पाण्डेय जी एवं श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ जी के सम्पादकीय उद्बोधन)
श्री जय प्रकाश पाण्डेय
(श्री जयप्रकाश पाण्डेय जी की पहचान भारतीय स्टेट बैंक से सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी के अतिरिक्त एक वरिष्ठ साहित्यकार की है। वे साहित्य की विभिन्न विधाओं के सशक्त हस्ताक्षर हैं। उनके व्यंग्य रचनाओं पर स्व. हरीशंकर परसाईं जी के साहित्य का असर देखने को मिलता है। परसाईं जी का सानिध्य उनके जीवन के अविस्मरणीय अनमोल क्षणों में से हैं, जिन्हें उन्होने अपने हृदय एवं साहित्य में सँजो रखा है। – हेमन्त बावनकर, ब्लॉग सम्पादक )
ई-अभिव्यक्ति की दिनों दिन बढ़ती लोकप्रियता और लगातार बढ़ती पाठकों की संख्या इस बात को साबित करती है कि कवि, व्यंंग्यकार श्री हेमन्त बावनकर के जूनून, कड़ी मेहनत और तकनीकी ज्ञान ने कवि, लेखकों को अभिव्यक्ति के लिए सम्मानजनक मंच दिया है।
जीवन की ऊहापोह की दर्द भरी दास्तां लिए 2020 बीत गया, धरती पर जिंदगी की जद्दोजहद के बीच कोरोना वायरस ने बिलखती मानवता को नये अर्थ दिये।
2020 आपकी सारी समस्याओं, बीमारी, क्षोभ, कुण्ठाओं, असामयिक मृत्यु, शर्म, अपमान, एकाकीपन, नैराश्य, विफलता, और तिरस्कार के साथ विदा ले रहा है।
श्रीमान 2021 जी ने मुझे आपको सूचित करने के लिए कहा कि, वह आपको दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य, धन-सम्पदा, प्रेम, प्रचुर आशीर्वाद, शान्ति, खुशी, धार्मिक सद्भाव, संवर्धन, समृद्धि की क्षतिपूर्ति करने आ रहे हैं।
ई-अभिव्यक्ति के प्रति आपकी प्रतिबद्धता ने हमें बहुत कुछ नया करने का संबल प्रदान किया है, सभी लेखकों का हार्दिक अभिनन्दन।
बधाई !
जय प्रकाश पाण्डेय (संपादक – ई-अभिव्यक्ति – हिन्दी)
(प्रतिष्ठित साहित्यकार श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ जी के साप्ताहिक स्तम्भ – “विवेक साहित्य ” में हम श्री विवेक जी की चुनिन्दा रचनाएँ आप तक पहुंचाने का प्रयास करते हैं। श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र जी, अतिरिक्त मुख्यअभियंता सिविल (म प्र पूर्व क्षेत्र विद्युत् वितरण कंपनी , जबलपुर ) में कार्यरत हैं। तकनीकी पृष्ठभूमि के साथ ही उन्हें साहित्यिक अभिरुचि विरासत में मिली है। उनका कार्यालय, जीवन एवं साहित्य में अद्भुत सामंजस्य अनुकरणीय है। – हेमन्त बावनकर, ब्लॉग संपादक )
नवल वर्ष के धवल दिवस अब, साथी सबको मंगलमय हो
कीर्ति मान यश से परिपूरित, जीवन का आलोक अमर हो
नये साल के पहले दिन सूरज की पहली किरण हम सबके जीवन में, सारे विश्व के लिए शांति, सुरक्षा, प्रसन्नता, समृद्धि और उन्नति लेकर आये यही कामनायें हैं.
विगत वर्ष कोरोना को समर्पित लगभग पूरी तरह दुनियां भर के लिये बाधित वर्ष के रूप में रहा. कोरोना जनित स्थितियां अप्रत्याशित, अभूतपूर्व थीं. सब स्तंभित थे. सेरकारें, यू एन ओ, लोग सभी किंकर्तव्यविमूढ़ थे. इस विडम्बना में जो फंस गये वे भुक्तभोगी बन गये. कितने ही लोगों के अंतिम संस्कार तक परिजन नहीं कर सके. पूजा स्थल तक बंद करने पड़े. आइये सब मनायें कि ऐसी परिस्थितियां दोबारा कभी न बनें.
ई अभिव्यक्ति आपके साहित्यिक रचना कर्म, अध्ययन के साथ सतत सहगामी है, व सबके लिए शुभकामनाएं संजोए, शुभेक्षाये, विश्व के मङ्गल की कामना करता है
विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ (संपादक – ई-अभिव्यक्ति – हिन्दी)
2020 वर्ष ने हमें जिंदगी जीना सीखा दिया और यह संदेश दे दिया कि जाति, धर्म और रंगभेद के सर्वोपरि मानवता है।
2020 वर्ष ने साहित्यकारों को नए डिजिटल/तकनीकी आयाम दिए हैं।
ईश्वर से कामना है की आने वाला वर्ष एक खुशनुमा और ख़ुशबुओं से भरा मुस्कुराहट लिए गुलदस्ता लेकर आएगा। प्रबुद्ध पाठकों को प्रबुद्ध लेखकों का सकारात्मक स्वस्थ साहित्य आत्मसात करने के लिए हमें नवीन अवसर प्रदान करेगा।
हेमन्त बावनकर
☆ ई-अभिव्यक्ति के 2रे जन्मदिवस – सफर तीन लाख का और विजयादशमी पर्व की हार्दिक शुभकामनायें ☆
प्रिय मित्रो,
अक्टूबर माह और आज का दिन ई- अभिव्यक्ति परिवार के लिए कई अर्थों में महत्वपूर्ण है। इसी माह 15 अक्टूबर 2018 को हमने अपनी यात्रा प्रारम्भ की थी। मुझे यह साझा करते हुए अत्यंत हर्ष हो रहा है कि 2 वर्ष 10 दिनों के इस छोटे से सफर में आपकी अपनी वेबसाइट पर 3 लाख से अधिक विजिटर्स विजिट कर चुके हैं।
आज मैं अपने नहीं आपके ही विचार आपसे साझा करने का प्रयास कर रहा हूँ।
जगत सिंह बिष्ट
प्रिय भाई हेमन्त जी,
सर्वप्रथम, ई-अभिव्यक्ति पर 3,00,000 विजिटर्स के कीर्तिमान हेतु हार्दिक बधाई। निश्चित रूप से, किसी भी पैमाने पर, 2 वर्ष के कम समय में यह एक मील का पत्थर है।
यह मेरा परम सौभाग्य है कि इस यात्रा की परिकल्पना के समय से ही मुझे इसका एक महत्वपूर्ण सहयात्री और क्षण-क्षण का प्रत्यक्षदर्शी बनने का अवसर प्राप्त हुआ है। सच कहूँ तो मुझे यह यात्रा अद्भुत, अविश्वसनीय और अप्रतिम लगी है।
परिकल्पना, परिश्रम, निरंतरता, विकास और चलायमान बने रहना अपने-आप में सफलता का द्योतक है। यह सौभाग्य हर किसी को नहीं मिलता, सिर्फ भगीरथ प्रयास करने वाले, आत्मविश्वासी और अडिग पुरुषों को ही मिलता है।
अंग्रेजी और मराठी भाषा को जोड़कर आपने अभिव्यक्ति को एक नया आयाम दिया है। आप इसी तरह निःस्वार्थ भाव से परिश्रम की पराकाष्ठा करते रहें, यही कामना है, यही प्रार्थना है। बहुत-बहुत साधुवाद और अनेकानेक शुभकामनाएं। – सदैव आपका
डॉ कुंदन सिंह परिहार
आपने बिना भेद -भाव के, बिना किसी निहित स्वार्थ के, समर्पित भाव से पत्रिका का संपादन किया है।आप अपने स्वभाव के अनुसार सबको आदर देते हैं।इसीलिए आपकी दर्शक संख्या इतनी बढ़ी है और इतने लोग आपसे जुड़े हैं।आपका काम दूसरों के लिए अनुकरणीय है।
डॉ. मुक्ता
नमस्कार, मात्र दो वर्ष से कम कि अवधि में तो न लाख लोगों का वेबसाइट का विज़िट करना स्वयं में महान् उपलब्धि है।इसका पूर्ण श्रेय आपके परिश्रम, लग्न व निरंतर कर्त्तव्य-निष्ठता को जाता है।
अशेष शुभ कामनाएं।
प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’
एक शिक्षक को सबसे अधिक प्रसन्नता तब होती है , जब उसके विद्यार्थी उसे सम्मान देते हैं । उम्र के इस पड़ाव पर मेरे विद्यार्थी सारे विश्व मे फैले हुए हैं । इंटरनेट के जरिये ढेर से पुराने शिष्यों ने मेरे पुत्र चि विवेक के माध्यम से ढूंढ कर सम्पर्क रखा है । हेमंत जी मेरे प्रिय शिष्यों में से एक हैं । सबसे बड़ी बात है कि वे एक बेहद अच्छे इंसान हैं , तकनिकज्ञ हैं , साहित्य अनुरागी हैं । मेरी रचना साधिकार उनकी हैं , वे उन्हें क्रमिक रूप से पोर्टल पर स्वस्फूर्त प्रकाशित करते हैं ।
तीन लाख दुनियाभर में फैले पाठकों का विशाल परिवार हम लेखकों, व पोर्टल की थाथी है । मेरी समस्त मंगल कामना उनके संग हैं । शुभेस्तु
श्री अमरेन्द्र नारायण
ई अभिव्यक्ति एक ऐसा पटल है जिसमें स्तरीय रचनायें पढ़ने को मिलती हैं।उत्तम रचनाओं को पटल पर उपलब्ध कराने में श्री हेमन्त बावनकर जी के परिश्रम और साहित्य की उनकी परख का महत्वपूर्ण योगदान है।
अपने प्रयास को नेपथ्य में रख कर साहित्य की श्री वृद्धि हेतु निरंतर प्रयत्नशील रहना हेमंत जी की प्रतिभा और साहित्य साधना का परिचय देता है।
हर्ष की बात है कि सुप्रसिद्ध साहित्यकार श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव जी का मार्गदर्शन और सहयोग ई अभिव्यक्ति को मिल रहा है।
ई अभिव्यक्ति की इतने कम समय में प्रशंसनीय उपलब्धि के लिए हेमंत जी और उनके सहयोगियों को हार्दिक बधाई।श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव जी ई अभिव्यक्ति के माध्यम से आदरणीय बाबूजी की रचनायें हमें उपलब्ध करा रहे हैं,उन्हें हार्दिक धन्यवाद और पूज्य बाबू जी को सादर प्रणाम।
हमारी शुभेच्छा है कि ई- अभिव्यक्ति निरंतर प्रगति करता रहे।
उल्लेखनीय है कि ई अभिव्यक्ति ने एकता व शक्ति के आयोजन प्रसार को नियमित स्तम्भ के रूप में स्थान दिया , इसके लिए हेमंत जी का विशेष आभार व्यक्त करता हूँ
हम सब इस उत्कृष्ट पटल को अपना सहयोग दें,इस आग्रह और नवरात्रि की शुभकामना के साथ- अमरेन्द्र नारायण????
ई अभिव्यक्ति के फाउंडर डिजाइनर हिंदी, अंग्रेजी, मराठी के साहित्य रसिक भाई हेमंत बावनकर जी से मेरा आत्मीयता का प्रगाढ़ रिश्ता है । याद आता है कि एक आयोजन में वे भी रानी दुर्गावती संग्रहालय के हाल जबलपुर में वे भी उपस्थित थे , और मैं भी पिताजी के साथ वहीं था । जैसे ही आयोजन पूर्ण हुआ वे हमारे पास आये और पिताजी को पहचान गए । दरअसल मेरे पिताश्री प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव जी केंद्रीय विद्यालय जबलपुर के संस्थापक प्राचार्य हैं , और हेमंत जी उनके विद्यार्थी थे । यह भावना भरी भेंट थी गुरु शिष्य की ।
फिर एक दिन हेमंत जी हमारे घर पधारे ई अभिव्यक्ति को लेकर विशद चर्चाएं हुई । पिताजी की भगवत गीता के श्लोक व अनुवाद को क्रमशः प्रतिदिन प्रस्तुत करने की योजना से हम इस शुद्ध साहित्यिक पोर्टल से जुड़े । फिर स्तम्भ के रूप में मेरी पुस्तक चर्चा, व्यंग्य भी पाठकों द्वारा पसन्द किया जाने लगा । धीरे धीरे हिट्स बढ़ते गए । हेमंत भाई को सबसे बड़े उम्र के सोलो पोर्टल डिजाइनर के रूप में बुक ऑफ रिकार्ड्स के द्वारा सम्मानित किया गया । हम प्रायः पोर्टल के विकास हेतु चर्चा करते रहते । प्रतिदिन प्रातः उठते साथ चुनिंदा पोस्ट का 2014 से चल रहे साहित्यम व्हाट्सएप ग्रुप में इंतजार रहता, मित्रो में ई अभिव्यक्ति चर्चा का केंद्र बनता गया ।
हेमंत जी ने मुझे संपादक मण्डल में शामिल कर लिया । एकता व शक्ति ग्रुप के आयोजनों में पोर्टल सहभागी बना । नए नए पाठक पोर्टल से जुड़ते जा रहे हैं । हेमंत भाई समर्पित सारस्वत साधना में लगे हुए हैं , मुझे प्रसन्नता है कि मैं इसका छोटा सा हिस्सा बन सका ।
श्री सुहास रघुनाथ पंडित
हम सब के लिये यह एक आनंददायी वार्ता है/ हम आप से सिर्फ दो महीनोंसे जुडे हुए है/ लेकिन आप तो दो साल से यह अक्षरपालखी उठा रहे है/ इसलिए यह आपके योगदान का फलित है/यह हमारा सौभाग्य है की हम इस कार्य मे अल्प सा हाथ बटा सके/
हम इस अंक मे भिन्न भिन्न प्रकार मे साहित्य उपलब्ध कर रहे हैं/ हो सकता है कि इसी कारण लोकप्रियता बढ रही हैं/ क्योंकि विभिन्न वाचक वर्ग अपनी अपनी पसंद का पढ रहा है/अपनी नयी उपक्रमशीलता हमारा वाचकवर्ग और बढा देगी यह आशा और विश्वास है /
श्री आशीष कुमार
हेमंत सर के विषय में शब्दों में लिखना बहुत ही मुश्किल है उन्होंने e-अभिव्यक्ति के माध्यम से मेरे जैसे कितने ही मंच वहीन और हीन सामान्य व्यक्तियों को एक ऐसा माध्यम प्रदान किया है जो किसी संजीवनी से कम नही। मैंने अपनी पूरी जिंदगी में उनके जैसे सहज व्यक्तित्व को विरला ही पाया है। वो एक गुरु की तरह समय समय पर मुझे स्मरण कराते है की आप अपना कोई अन्य लेख प्रकाशित करने के लिए दे सकते है । उनकी सरलता तो देखिए एक बार उनके और मेरे बीच किसी एक विषय को लेकर वार्तलाप चल रहा था वो एक ऐसा विषय था जिसके संदर्भ में मेरा ज्ञान अल्प था किन्तु हेमंत सर को पूर्ण ज्ञान थ। फिर भी मैं उन्हे उस विषय में बता रहा था और वो बहुत आराम से सुन रहे थे। मुझे बाद में ज्ञात हुआ की हेमंत सर तो उस विषय में पूर्णता पाए हुए है।
उम्र के इस पड़ाव पर भी हर सुबह गर्मी, सर्दी , बरसात आदि मौसमो में बिना किसी रुकवाट के निरंतर हमारे शब्दों को जीवन देना वे सच में हमारा प्रेरणा स्रोत है। ईश्वर से आपके स्वास्थ्य की कामना करते हुए आपको बधाई देता हूँ ।
……….. और सतत शुभकामनाओं और बधाइयों का तांता लगा है।
मैं अभिभूत हूँ आपके अथाह प्रेम, स्नेह और ई-अभिव्यक्ति को इतना प्रतिसाद देने के लिए। ईश्वर की अनुकम्पा और आपका स्नेह ऐसा ही यथावत रहे।
इसी कामना के साथ।
पुनः विजयादशमी की हार्दिक शुभकामनाएं
आपका अपना ही
हेमन्त बावनकर
25 अक्टूबर 2020
ई-अभिव्यक्ति -संवाद
☆ ई-अभिव्यक्ति: संवाद- 52 ☆प्रेरणास्रोत श्रीमती उज्ज्वला केळकर जी के 78वें जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनायें ☆
प्रिय मित्रो,
सुप्रसिद्ध वरिष्ठ मराठी साहित्यकार श्रीमति उज्ज्वला केळकर जी मराठी साहित्य की विभिन्न विधाओं की सशक्त हस्ताक्षर हैं। आपके कई साहित्य का हिन्दी अनुवाद भी हुआ है। इसके अतिरिक्त आपने काफी हिंदी साहित्य का मराठी अनुवाद भी किया है। आप कई पुरस्कारों/अलंकारणों से पुरस्कृत/अलंकृत हैं। आपकी अब तक 60 सेअधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं जिनमें बाल वाङ्गमय -30 से अधिक, कथा संग्रह – 4, कविता संग्रह-2, संकीर्ण -2 ( मराठी )। इनके अतिरिक्त हिंदी से अनुवादित कथा संग्रह – 16, उपन्यास – 6, लघुकथा संग्रह – 6, तत्वज्ञान पर – 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। हाल ही में आपकी दो पुस्तकें और प्रकाशित हुई हैं जिनकी जानकारी हम शीघ्र ही आपसे साझा करेंगे।
जीवन के इस पड़ाव में भी आपका सीधा सादा सरल एवं मृदु स्वभाव, सक्रिय एवं स्वस्थ जीवन तथा साहित्य के प्रति समर्पण हमें सदैव प्रेरणा देता है।
आपने ई-अभिव्यक्ति के मराठी संस्करण के सम्पादन के मेरे आग्रह को स्वीकार किया एवं श्री सुहास रघुनाथ पंडित जी के साथ उसे नवीन स्वरुप देकर मराठी साहित्य के पाठकों तक सकारात्मक साहित्य साझा करने में अभूतपूर्व सहयोग प्रदान किया। इसके लिए मैं आपका हृदय से आभारी हूँ।
अक्टूबर का माह हमारे लिए विशेष महत्व रखता है। 5 अक्टूबर को हमने हमारे मराठी सम्पादक मंडल के मित्र श्री सुहास रघुनाथ पंडित जी का जन्मदिवस मनाया और आप सभी के अगाध स्नेह से 15 अक्टूबर को ई-अभिव्यक्ति के दो वर्ष पूर्ण होने जा रहे हैं। हमें पूर्ण विश्वास है कि हमें इसी प्रकार भविष्य में भी आप सभी का अगाध स्नेह एवं प्रतिसाद मिलता रहेगा।
ई-अभिव्यक्ति परिवार की ओर से हम सबकी प्रेरणा स्रोत श्रीमती उज्ज्वला केळकर जी को 78 वें जन्मदिवस की अशेष हार्दिक शुभकामनायें।
हेमन्त बावनकर
9 अक्टूबर 2020