॥ श्री रघुवंशम् ॥
॥ महाकवि कालिदास कृत श्री रघुवंशम् महाकाव्य का हिंदी पद्यानुवाद : द्वारा प्रो. चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’॥
☆ “श्री रघुवंशम्” ॥ हिन्दी पद्यानुवाद सर्ग #15 (11 – 15) ॥ ☆
रघुवंश सर्ग : -15
पड़ा मार्ग में बाल्मीकि ऋषिवर का आवास।
मृगमय आश्रम में किया शत्रुध्न ने निशि वास।।11।।
किया मुनी वाल्मीकि ने शत्रुधं का सम्मान।
तपबल अर्जित श्रेष्ठ दे पीठ-शयन व पान।।12।।
उसी रात्री में सिया ने जाये दो सुकुमार।
कोष-दण्ड युत धरणि के जो उज्ज्वल उपहार।।13।।
रामपुत्र का जन्म सुन शत्रुध्न हुये प्रसन्न।
प्रातः मुनि से मिल करी यात्रा रथ-सम्पन्न।।14।।
लवणासुर, कुम्मनिसी-पुत्र महत् बलवान।
रहता था मधुपध्न में जो था नगर समान।।15अ।।
पहुँचे जब शत्रुध्न वह आया ले उपहार।
वन जीवों की राशि का करने को आहार।।15ब।।
© प्रो. चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’
A १, विद्युत मण्डल कालोनी, रामपुर, जबलपुर. म.प्र. भारत पिन ४८२००८
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडल (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’/श्री जय प्रकाश पाण्डेय ≈