॥ श्री रघुवंशम् ॥
॥ महाकवि कालिदास कृत श्री रघुवंशम् महाकाव्य का हिंदी पद्यानुवाद : द्वारा प्रो. चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’॥
☆ “श्री रघुवंशम्” ॥ हिन्दी पद्यानुवाद सर्ग #15 (26 – 30) ॥ ☆
रघुवंश सर्ग : -15
लवणासुर को मार के शत्रुध्न हुये महान।
इन्द्र जीत को मार ज्यों लक्ष्मण-बंधु समान।।26।।
ऋषियों ने की प्रशंसा शत्रुध्न का सम्मान।
पर विनम्रता दिखा वह हुये अधिक द्युतिमान।।27।।
स्पृहारहित पुरूषार्थ से शोभित वह बलवान।
यमुनातट पर किया नव मथुरा का निर्माण।।28।।
मथुरा हुई शोभित अधिक पा नृप अतिगुणवान।
स्वर्ग से ला ज्यों बसाये गये लोग विद्धान।।29।।
चढ़कर शुभ प्रसाद पर लखते यमुनाधार।
चक्रवाक वेणी लखी धरणि पुष्प का हार।।30।।
© प्रो. चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’
A १, विद्युत मण्डल कालोनी, रामपुर, जबलपुर. म.प्र. भारत पिन ४८२००८
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडल (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’/श्री जय प्रकाश पाण्डेय ≈