श्री रामस्वरूप दीक्षित
(वरिष्ठ साहित्यकार श्री रामस्वरूप दीक्षित जी गद्य, व्यंग्य , कविताओं और लघुकथाओं के सशक्त हस्ताक्षर हैं। धर्मयुग,सारिका, हंस ,कथादेश नवनीत, कादंबिनी, साहित्य अमृत, वसुधा, व्यंग्ययात्रा, अट्टाहास एवं जनसत्ता ,हिंदुस्तान, नवभारत टाइम्स, राष्ट्रीय सहारा,दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर, नईदुनिया,पंजाब केसरी, राजस्थान पत्रिका,सहित देश की सभी प्रमुख पत्र पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित । कुछ रचनाओं का पंजाबी, बुन्देली, गुजराती और कन्नड़ में अनुवाद। मध्यप्रदेश हिंदी साहित्य सम्मेलन की टीकमगढ़ इकाई के अध्यक्ष। हम समय समय पर आपकी सार्थक रचनाओं को अपने पाठकों से साझा करने का प्रयास करते रहते हैं।
☆ कविता – स्त्री की हंसी ☆ श्री रामस्वरूप दीक्षित ☆
स्त्री की हंसी में
शामिल है
उन सबकी हंसी
जिनके लिए हंसना
एक ऐसा अवसर है
जो हर बार चला जाता चुपके से
उन्हें रोते रहने को छोड़कर
स्त्री की हंसी में
शामिल है
कचरे के ढेर में
जूठन तलाशते बच्चों
देह बेचकर पेट भरने को
अभिशप्त स्त्रियों
दूसरों के लिए अन्न उगाकर
खुद अन्न को तरसते किसानों
पसीने में शरीर का नमक बहाते
मजदूरों से
छीन ली गई हंसी
स्त्री की हंसी में
शामिल है
उदास जंगलों
अनमने पहाड़ों
कलपती नदियों
और खिलने से पहले ही
मसले गए फूलों की हंसी
स्त्री बेसब्री से करती है
हंसने का इंतजार
वह हंसकर उड़ा देना चाहती है
उदासी की चादर
तकलीफों के तिनकों
और दुखों के गुबार को
स्त्री की हंसी में
हंसती हैं वक्त की उम्मीदें
© रामस्वरूप दीक्षित
सिद्ध बाबा कॉलोनी, टीकमगढ़ 472001 मो. 9981411097
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