डॉ भावना शुक्ल
(डॉ भावना शुक्ल जी (सह संपादक ‘प्राची‘) को जो कुछ साहित्यिक विरासत में मिला है उसे उन्होने मात्र सँजोया ही नहीं अपितु , उस विरासत को गति प्रदान किया है। हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि माँ सरस्वती का वरद हस्त उन पर ऐसा ही बना रहे। आज प्रस्तुत हैं होली पर्व पर विशेष “भावना के दोहे ”। )
☆ साप्ताहिक स्तम्भ # 124 – साहित्य निकुंज ☆
☆ भावना के दोहे ☆
फसल प्यार की लग रही, आई खुशियां पास।
आँचल में उम्मीद के, हरदम जगती आस।।
कंचन काया देखकर, मन होता बेचैन।
मिलने को आकुल लगन, कब आएगा चैन।।
फसल खेत में पक गई, सुंदर है खलिहान।
पाकर श्रम का पुण्यफल, खुश हो रहे किसान।।
धानी फसलें देखकर, मुस्काते खलिहान।
बढ़ता है भंडार गृह, करता काम किसान।।
माटी से सुंदर बने, काया सुभग अनूप ।
गढ़ता रूप कुम्हार जब, अपने ही अनुरूप।।
© डॉ.भावना शुक्ल
सहसंपादक…प्राची
प्रतीक लॉरेल , C 904, नोएडा सेक्टर – 120, नोएडा (यू.पी )- 201307
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडल (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’/श्री जय प्रकाश पाण्डेय ≈
बहुत ही बेहतरीन रचना, भावना जी
अनुकरणीय शैली