श्री संतोष नेमा “संतोष”
(आदरणीय श्री संतोष नेमा जी कवितायें, व्यंग्य, गजल, दोहे, मुक्तक आदि विधाओं के सशक्त हस्ताक्षर हैं. धार्मिक एवं सामाजिक संस्कार आपको विरासत में मिले हैं. आपके पिताजी स्वर्गीय देवी चरण नेमा जी ने कई भजन और आरतियाँ लिखीं थीं, जिनका प्रकाशन भी हुआ है. आप डाक विभाग से सेवानिवृत्त हैं. आपकी रचनाएँ राष्ट्रीय पत्र पत्रिकाओं में लगातार प्रकाशित होती रहती हैं। आप कई सम्मानों / पुरस्कारों से सम्मानित/अलंकृत हैं. “साप्ताहिक स्तम्भ – इंद्रधनुष” की अगली कड़ी में प्रस्तुत हैं एक भावप्रवण रचना “बृज में उड़ती खूब गुलाल…”। आप श्री संतोष नेमा जी की रचनाएँ प्रत्येक शुक्रवार आत्मसात कर सकते हैं।)
☆ साहित्यिक स्तम्भ – इंद्रधनुष # 118 ☆
☆ बृज में उड़ती खूब गुलाल… ☆
ग्वाल-बाल सब मिलि खें पूछें, कितै छुपो नन्दलाल
लट्ठ प्रेम के बरसाने में, करवें खूब कमाल
गोरी राधा भई सांवरी, चकित भये गोपाल
खूब उड़ो आकाश में केसर, तन मन हो ग्यो लाल
सुध-बुध भूल सखी सब नाचें, रखो न कोई ख्याल
नाचे अब “संतोष” प्रभु संग, कर खें खूब धमाल
© संतोष कुमार नेमा “संतोष”
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