श्री सूबेदार पाण्डेय “आत्मानंद”

☆ साप्ताहिक स्तम्भ – आत्मानंद साहित्य# 119 ☆

☆ ‌सद्गुरू महिमा ☆ श्री सूबेदार पाण्डेय “आत्मानंद” ☆

(ॐ  शिव गुरू नारायण – अर्थात् शिव ही गुरु और नारायण स्वरूप हैं)

दोहा-

दोउ कर जोरे नाई सिर, बिनती करौं मैं तोर।

दया दृष्टि नित राखियो, दास भगत मैं तोर।।१।।

 मो पर बाबा दया करो, करिओ  पूरन काज।

सदगुरु महिमा लिख रहा, तुम्हरी कृपा से आज।।२।।

 

चौपाई –

जै जै सदगुरु ज्ञानी दाता।

जो भी सरन तुम्हारी आता।।

श्रद्धा भक्ति से शीश झुकाता।

सुख शांति सब कुछ पा जाता।।

दुखिया दुख में तुम्हें पुकारे।

किन्ह सहाय दुःख सब टारे।।

तुम प्रभु हो करूणा के सागर।

तुम हो राधा के नट नागर।।

शिव स्वरूप मैं तुमको ध्याऊं।

तुम्हारी किर्ती सदा मैं गांऊं।

करत बखान मन नहीं अघाता।

धरत ध्यान सुख शांति पाता।।

ज्योति रूप प्रभु आप अनंता।

गावत चरित भगत सब संता।।

जब छायो मन में अंधियारा।

आरत मन से तुम्हें पुकारा।।

 बिनती सुनि प्रभु आयो धाई।

सब भगतन को कींन्ह सहाई।।

भगतन के सब काज नेवारो।

हनुमत रूप कष्ट सब टारो।।

राम रूप धरि रावण मारा।

कृष्ण रूप में दनुज संहारा।।

शिव बिरंचि ध्यावहि नित ध्याना।

रामकृष्ण सेवहि बिधि नाना।।

तेज अपार बरनि नहिं जाई।

तुम्हारी किर्ति कहां लौं गाई।।

प्रकटी ज्योति हृदय ऊंजियारा।

तुम्हारी महिमा अपरंपारा।।

वेद पुराण नित करत बखाना।

तुम्हरो चरित को अंत न जाना।।

संत जनन भगतन हितकारी।

सुनि लीजै  प्रभु अरज हमारी।।

जन जन काज नर रूप तुम धारे।

 सब भगतन के काज संवारे।।

नर नारी जो महिमा गावहिं।

नाना बिधि सुख संपति पावहिं।।

आत्मानंद करहि नित गाना।

तुम्हारी किर्ति न जाइ बखाना।।

 

दोहा-

पूरन  सदगुरु महिमा भई, भयो मुदित मन आज।

दया-दृष्टि नित राखियो, हे! सतगुरु महराज।।

चरन कमल नित पूज कर, बिनती कर, कर जोरि।

 धन्य भइ मम लेखनी, लिख कर महिमा तोरि।।

 महिमा पढ़त अघात मन, पावत कृपा तुम्हार।।

 सब में तूं ही रम रहा, तूं ही जीवन सार।।

गुरु पिता गुरू मातु है,  गुरू ही सखा सुजान।

गुरु ईश्वर गुरु ज्ञान है, इसको सच तूं मान।।

ॐ  श्री बंगाली बाबाय अर्पणमस्तु

© सूबेदार  पांडेय “आत्मानंद”

संपर्क – ग्राम जमसार, सिंधोरा बाज़ार, वाराणसी – 221208, मोबा—6387407266

 संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडल (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’/श्री जय प्रकाश पाण्डेय  ≈
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