डॉ प्रेरणा उबाळे
☆ आलेख – देश-विदेश में लहराता हिंदी का परचम… ☆ डॉ प्रेरणा उबाळे ☆
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भाषा के सिवा हमारा कोई अस्तित्व नहीं हैl भाषा के बिना हमारा कोई और सहारा भी नहीं हैl आज भारतवर्ष के उज्ज्वल और महान भविष्य का निर्माण हमारी भाषाएँ ही कर रही हैंl सैकड़ो वर्षों से निर्मित, परिष्कृत होकर जनमानस में रची-बसी हिंदी आज मन-मस्तिष्क ही नहीं बल्कि उससे उपजे अनेक क्षेत्रों तक अपने पाँव जमा चुकी है। नदी के प्रवाह में जिस प्रकार कंकड़-पत्थर आकर जल को उछलकर अधिक बहने को उत्साहित करते हैं वैसे ही हिंदी भाषा की आरंभ से अब तक की यात्रा में अनगिनत समस्याएँ, बाधाएँ आने के बावजूद भी वर्तमान समय में वह विश्व के अनेक देशों तक प्रवाहित होकर अपना परचम लहरा रही है ।
भारतीय जनमानस ने हिंदी को राष्ट्रभाषा के रूप में स्वीकार कर लिया हैl सन 1949 में हिंदी को राजभाषा अर्थात ऑफिशयल लैंग्वेज के रूप में स्थान दिया गया हैl इसके अनुसार भारतीय संविधान के द्वारा सरकारी कामकाज, प्रशासन, संसद और विधान-मंडलों तथा न्यायिक कार्यकलापों के लिए स्वीकृत भाषा हिंदी हैl पहले भले ही राजकीय अथवा प्रशासन के स्तर पर कभी संस्कृत, कभी फारसी और बाद में अंग्रेजी का प्रचलन रहा । परंतु समूचे राष्ट्र के जनसमुदाय के आपसी संपर्क, संवाद-संचार, विचार-विमर्श, सांस्कृतिक एकता और जीवन व्यवहार का माध्यम हिंदी रही है । अर्थात भारत में सर्वाधिक बोली, समझी, पढ़ी- पढ़ाई जाने वाली भाषा हिंदी ही है । आज भारत की सभी पाठशालाओं, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों में हिंदी भाषा का अध्ययन-अध्यापन हो रहा हैl न केवल भारत में बल्कि भारत के बाहर भी 40 से अधिक देशों में हिंदी भाषा अध्ययन-अध्यापन के स्तर पर प्रमुख भाषा के रूप में अपना अस्तित्व निर्माण कर चुकी है ।
व्यापक रूप में देखा जाए तो हिंदी भाषा का अध्ययन करने वाले, हिंदी भाषा जानने-समझने वाले और हिंदी भाषा पर अधिकार रखने वाले व्यक्तियों के लिए रोजगार के बड़ी संख्या अवसर उपलब्ध हुए हैं । जैसे – अध्ययन-अध्यापन, अनुवाद, साहित्य लेखन; राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अनुवादक, दुभाषिये का काम, बहुराष्ट्रीय कंपनियों में और बाजार सर्वेक्षण के लिए, बीपीओ और कॉल सेंटर में विदेशी भाषा का अंतरण; पर्यटन उद्योग व होटल प्रबंधन, भारतीय भाषा प्रौद्योगिकी विकास मिशन, फिल्म क्षेत्र, टी. वी. क्षेत्र, पत्रकारिता, अंशकालिक पत्रकारिता, साहित्यिक अनुवाद, विज्ञापन, जनसंपर्क एजन्सियाँ, फीचर लेखन, बधाई कार्ड लेखन, पोर्टल, वेब पत्रिकाओं के लिए लेखन और अनुवाद; सीडैक – हिंदी सोफ्टवेयर निर्माण, केंद्र सरकार के कार्यालयों में हिंदी अनुवादक, सरकारी कार्यालाओं और बैंक में राजभाषा अधिकारी, विभिन्न कार्यालयों में सहायक प्रबंधक एवं प्रबंधक, प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रोनिक मीडिया में संपादक, उपसंपादक, प्रूफ-रीडर, रिपोर्ट, विदेशों में हिंदी पढ़ने हेतु अध्यापक, रेडिओ जोकी, मंचसंचालक, गीतकार, हिंदी प्रकाशनों में विभिन्न कार्यों के लिए हिंदी का कार्य, फिल्म डबिंग, प्रतियोगी परीक्षाएँ, संवाद- लेखक, फ्री- लान्सिंग, कॉर्पोरेट कम्युनिकेशन, न्यायिक सेवा, रेल प्रशासन में हिंदी प्रबंधक और अनुवादक, विदेश मंत्रालय, खेल क्षेत्र में समालोचन, साहित्यिक वेबसाइट – निर्माण, साहित्याशिल्पी, अच्छी खबर, हैप्पी हिंदी जैसे ब्लॉग -लेखन में हिंदी से संबंधित कार्य इत्यादि….
….. इन तमाम क्षेत्रों में हिंदी विषय में अध्ययन- अध्यापन और विभिन्न प्रकार के कार्यों से अनेक लोग रोजगार निर्माण कर रहे हैंl हमारी राष्ट्रीय भाषा हिंदी की लोकप्रियता और बढ़ते अंतरराष्ट्रीय महत्व के साथ-साथ हिंदी भाषा के जरिये सभी क्षेत्रों में रोजगारों के अवसरों में प्रचंड वृद्धि हुई है । केंद्र सरकार, राज्य सरकारों के विभिन्न विभागों में हिंदी भाषा में काम किया जाता हैl इसलिए केंद्र तथा राज्य सरकारों के विभिन्न विभागों, इकाइयों में हिंदी अधिकारी, हिंदी अनुवादक, हिंदी सहायक, राजभाषा प्रबंधक के पदों की बड़ी संख्या है । अध्यापन के परंपरागत क्षेत्र के अलावा टी.वी. और रेडियो चैनलों की कुछ वर्षों में वृद्धि होने के कारण परंपरागत पत्रिकाओं, समाचारपत्रों के अतिरिक्त अनेक नए क्षेत्र भी कई गुना रोजगार उपलब्ध करा दे रहे हैं । हिंदी मीडिया के क्षेत्र में संपादक, संवाददाता, रिपोर्टर, रेडियो जॉकी तथा मंच संचालक आदि की बहुत आवश्यकता होती हैl सिनेमा, रेडियो, टी.वी. के क्षेत्र में पटकथा लेखक, संवाद लेखक, गीतकार के रूप में अवसर उपलब्ध हैl सृजनात्मक हिंदी लेखन का क्षेत्र भी आज व्यापक बना हुआ है । अंग्रेजी तथा अन्य भाषाओं के होने के बावजूद भी बढ़ती तकनीकी जरूरत के कारण हिंदी की लोकप्रियता और आवश्यकता अधिक बढ़ रही हैl माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनी भी हिंदी की साक्षात्कारकर्ता को देखकर हिंदी में ऑपरेटिंग सिस्टम शुरू कर चुकी हैंl अब ए.आई. अर्थात कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में तो अनगिनत अवसर हिंदी भाषा से निर्माण हो रहे हैं ।
भारत में दर्जनों भाषाएँ मौजूद हैं परंतु उनमें शिक्षा, कला, साहित्य, विज्ञान, तकनीक, प्रशासन, विधि, वाणिज्य, व्यवसाय, जनसंचार माध्यम आदि के प्रमुख भाषा हिंदी बन गई हैl आज यह सबकी रोजी-रोटी की भाषा बन चुकी हैl वर्तमान समय में हिंदी का अपना क्षेत्रीय संदर्भ अपनी अस्मिता के साथ जीवंत तो है ही, अपितु भाषा की मिठास सभी को अधिक आकृष्ट कर रही हैl इसी कारण राष्ट्रीय स्तर पर आम बोलचाल की भाषा के रूप में उसने भारत की अन्य भाषाओं को पीछे छोड़ दिया है और संपर्क भाषा के रूप में प्रथम स्थान अर्जित कर लिया हैl राजभाषा के रूप में उसके माध्यम से बड़ी सफलता से कार्य-व्यवहार हो रहे हैंl जनमानस ने हिंदी को अपनत्व की भावना से अघोषित राष्ट्रभाषा का दर्जा प्रदान किया है । परिणामस्वरुप क्षेत्रीय और राष्ट्रीय संदर्भों को पार करते हुए हिंदी भाषा विश्व के कई देशों में व्यापक रूप में व्यवहृत हो रही है । प्रमुखत: मॉरीशस, सूरीनाम, त्रिनिदाद, दक्षिण अफ्रीका, गयाना बांग्लादेश श्रीलंका मलेशिया कंबोडिया नेपाल अमेरिका इंग्लैंड सोवियत संघ फ्रांस जापान चेकोस्लोवाकिया हॉलैंड रशिया जापान पश्चिम जर्मनी आदि देशों में हिंदी का प्रयोग हो रहा हैl विश्व के 40 से अधिक देशों के 270 से अधिक महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में हिंदी भाषा का अध्ययन-अध्यापन हो रहा है । अकेले अमेरिका के 67 और चीन के 20 विश्वविद्यालयों में हिंदी भाषा पढ़ी- पढ़ाई जाती हैl स्पष्ट रूप से कहा जा सकता है कि हिंदी का क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अत्यंत व्यापक हो रहा हैl अमरीका की कुछ पाठशालाओं ने फ्रेंच, स्पेनिश, जर्मन के साथ एक विदेशी भाषा के रूप में हिंदी पढ़ाना आरंभ किया है । हिंदी को बड़ी शिद्दत से यहाँ अपनाया गया है और वैश्विक रूप में हिंदी का विकास निश्चित रूप से बहुआयामी कहा जा सकता है ।
हिंदी को वैश्विक संदर्भ प्रदान करने में विश्वभर में व्याप्त तीन करोड़ से अधिक प्रवासी भारतीयों ने भी अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया हैl उन्होंने हिंदी के माध्यम से विभिन्न भाषाओं के साथ सांस्कृतिक समाज स्थापित किया है और हिंदी विश्व के सभी महाद्वीप को राष्ट्र और जिनकी संख्या 140 से भी अधिक है; वहाँ किसी-न-किसी रूप में वह प्रयुक्त हो रही हैl वर्तमान समय में विश्व की तीन सबसे बड़ी भाषाओं में से एक भाषा हिंदी विराट फलक पर सम्मानित हुई है । चीन की मंदारिन भाषा के बाद हिंदी दूसरे नंबर की भाषा बन गई है । इन सभी देशों में हिंदी की स्वीकार्यता बड़े उल्लास के साथ हुई है ।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक, आर्थिक कार्यों के लिए हिंदी के अनुप्रयोग हमारे विशेषज्ञों तथा राजनेताओं ने भी हिंदी में भाषण देकर उसकी उपयोगिता को सिद्ध किया है । भारतीयता की पहचान को दृढ़ बनानेवाली भाषा के रूप में उन्होंने इसे सिद्ध कर दिखायाl अंतरराष्ट्रीय मंच पर इस प्रकार हिंदी का प्रयोग निश्चित रूप से सराहनीय है और इससे सबका प्रतिनिधित्व करने वाली हमारी हिंदी भाषा एकमात्र है यह दिखाई देता है । भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद में भी विदेश में स्थापित भारतीय विश्वविद्यालयों की केंद्रीय भूमिका में हिंदी का ही प्रयोग हमें अधिकांश रूप में दिखाई देता है ।
भारत के बाहर लगभग 44 देशों में अंतरराष्ट्रीय, राजनीतिक, व्यावसायिक संबंध स्थापित करने हेतु भारतीय अध्ययन पीठों की स्थापना की गई है । इसके माध्यम से विदेशी लोगों में केवल हिंदी भाषा ही नहीं बल्कि हिंदी भाषा के माध्यम से भारत का इतिहास, सभ्यता, संस्कृति का भी प्रसार हो रहा हैl हिंदी भाषा अब विश्वभाषा बनने की ओर अग्रसर हैl विश्व के सभी महत्वपूर्ण देशों में हिंदी का अध्ययन-अध्यापन होना यह एक शैक्षिक और साहित्यिक दृष्टि से महत्वपूर्ण सेतु का कार्य हैl इसके माध्यम से अपने आप सांस्कृतिक परिवेश में सक्रियता अधिक बढ़ रही है । हिंदी फिल्मों, गीतों, संवादों ने विश्व स्तर पर पहले ही लोकप्रियता हासिल की हैl हिंदी फिल्म जगत और अभिनेताओं ने हमेशा ही विश्वमन को अपने साथ जोड़ लिया है । प्रेमचंद, जयशंकर प्रसाद, कबीर, तुलसीदास जैसे हिंदी रचनाकारों की रचनाएं विदेश में पढ़ने वाले अनेक लोग मौजूद हैं तथा इन साहित्यकारों को विशेष रूप से पढ़ने के लिए अध्ययन पीठों का निर्माण किया हुआ हमें दिखाई देता हैl महात्मा गांधी, डॉ. बाबासाहेब आम्बेडकर अध्ययन केंद्र, महात्मा बुद्ध अध्ययन केंद्र, प्रवासी भारतीय साहित्य केंद्र आदि के माध्यम से भारतीय महापुरुषों के जीवन, व्यक्तित्व, विचारों को हिंदी भाषा में पढाया जा रहा हैl इस दृष्टि से हम कह सकते हैं कि विश्व भाषा की गरिमा हिंदी भाषा में मौजूद है और विश्व के अनेक महत्वपूर्ण पक्षों से संदर्भित यह भाषा है ।
भाषाओं के संदर्भ में आज भले ही कितने विवाद निर्माण करने का प्रयत्न समाज के विघातक पक्षों के द्वारा हो रहा है परंतु ऐसी स्थिति में वैचारिक दृष्टि से व्यापक होने की अब आवश्यकता महसूस होती हैl उसकी स्वीकार्यता यदि जनसामान्यों के द्वारा हो रही है तो विवाद निश्चय ही निष्फल हैl भाषा हमारे अपने समाज का अस्तित्व बनाए रखती है, देश का प्रतिनिधित्व करती है, विश्व स्तर पर हमारी पहचान बनाती है और आज यह खुले मन से स्वीकार करना होगा कि संपूर्ण भारत में ही नहीं बल्कि भारत के बाहर भी सबसे अधिक बोली और समझी जाने वाली भाषा अगर कोई है तो वह हिंदी हैl निर्विवाद रूप में यह जल्द ही विश्व भाषा का स्थान ग्रहण कर लेगीl
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© डॉ प्रेरणा उबाळे
लेखिका, अनुवादक
सहायक प्राध्यापक, हिंदी विभागाध्यक्षा, मॉडर्न कला, विज्ञान और वाणिज्य महाविद्यालय (स्वायत्त), शिवाजीनगर, पुणे ०५
संपर्क – 7028525378 / preranaubale2016@gmail.com
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडल (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’/श्री जय प्रकाश पाण्डेय ≈






