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हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ परिहार जी का साहित्यिक संसार # 65 ☆ व्यंग्य >> उनकी यादों में हम ☆ डॉ कुंदन सिंह परिहार

डॉ कुंदन सिंह परिहार (वरिष्ठतम साहित्यकार आदरणीय  डॉ  कुन्दन सिंह परिहार जी  का साहित्य विशेषकर व्यंग्य  एवं  लघुकथाएं  ई-अभिव्यक्ति  के माध्यम से काफी  पढ़ी  एवं  सराही जाती रही हैं।   हम  प्रति रविवार  उनके साप्ताहिक स्तम्भ – “परिहार जी का साहित्यिक संसार” शीर्षक  के अंतर्गत उनकी चुनिन्दा रचनाएँ आप तक पहुंचाते  रहते हैं।  डॉ कुंदन सिंह परिहार जी  की रचनाओं के पात्र  हमें हमारे आसपास ही दिख जाते हैं। कुछ पात्र तो अक्सर हमारे  आसपास या गली मोहल्ले में ही नज़र आ जाते हैं।  उन पात्रों की वाक्पटुता और उनके हावभाव को डॉ परिहार जी उन्हीं की बोलचाल  की भाषा का प्रयोग करते हुए अपना साहित्यिक संसार रच डालते हैं। आज  प्रस्तुत है  एक सार्थक  व्यंग्य  ‘उनकी यादों में हम’। डॉ परिहार जी ने इस व्यंग्य के माध्यम से वर्तमान परिवेश में महत्वाकांक्षा की पराकाष्ठा  और मानवीय व्यवहार पर उसके प्रभाव पर तीक्ष्ण  प्रहार किया है। इस सार्थक व्यंग्य  के लिए डॉ परिहार जी की  लेखनी को  सादर नमन।) ☆ साप्ताहिक स्तम्भ – परिहार जी का साहित्यिक संसार  # 65 ☆ ☆...
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हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ संजय उवाच – # 63 ☆ मानस प्रश्नोत्तरी ☆ श्री संजय भारद्वाज

श्री संजय भारद्वाज  (“साप्ताहिक स्तम्भ – संजय उवाच “ के  लेखक  श्री संजय भारद्वाज जी – एक गंभीर व्यक्तित्व । जितना गहन अध्ययन उतना ही  गंभीर लेखन।  शब्दशिल्प इतना अद्भुत कि उनका पठन ही शब्दों – वाक्यों का आत्मसात हो जाना है।साहित्य उतना ही गंभीर है जितना उनका चिंतन और उतना ही उनका स्वभाव। संभवतः ये सभी शब्द आपस में संयोग रखते हैं  और जीवन के अनुभव हमारे व्यक्तित्व पर अमिट छाप छोड़ जाते हैं। श्री संजय जी के ही शब्दों में ” ‘संजय उवाच’ विभिन्न विषयों पर चिंतनात्मक (दार्शनिक शब्द बहुत ऊँचा हो जाएगा) टिप्पणियाँ  हैं। ईश्वर की अनुकम्पा से आपको  पाठकों का  आशातीत  प्रतिसाद मिला है।” हम  प्रति रविवार उनके साप्ताहिक स्तम्भ – संजय उवाच शीर्षक  के अंतर्गत उनकी चुनिन्दा रचनाएँ आप तक पहुंचाते रहेंगे। आज प्रस्तुत है  इस शृंखला की अगली  कड़ी । ऐसे ही साप्ताहिक स्तंभों  के माध्यम से  हम आप तक उत्कृष्ट साहित्य पहुंचाने का प्रयास करते रहेंगे।) ☆ संजय उवाच –  🙏🏻 मानस प्रश्नोत्तरी🙏🏻 ☆ प्रश्न- श्रेष्ठ मनुष्य बनने के लिए क्या करना चाहिए? उत्तर- पहले मनुष्य...
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हिन्दी साहित्य – कथा कहानी ☆ “युगांत” अध्याय-8- भीष्म भाग- 8 – डॉ विनोद गायकवाड ☆ डॉ प्रतिभा मुदलियार (हिन्दी भावानुवाद)

डॉ विनोद गायकवाड जी के पुरस्कृत मराठी उपन्यास " युगांत " का डॉ प्रतिभा मुदलियार जी द्वारा हिंदी भावानुवाद  अमेज़न लिंक >>>>> युगांत (मराठी) (महाभारत के चरित्र भीष्म पितामह के जीवन पर आधारित सुप्रसिद्ध मराठी उपन्यास) डॉ विनोद गायकवाड       डॉ.विनोद गायकवाड़ जी मराठी के एक प्रसिद्ध उपन्यासकार हैं। आपने पचास से अधिक उपन्यासों की रचना की है।  महाभारत के चरित्र भीष्म  पितामह पर आधारित उपन्यास "युगांत" ने कई पुरस्कार जीते हैं।हाल ही में आपने  शिरडी के साईं  बाबा के जीवन पर आधारित मराठी में "साईं" उपन्यास लिखा है जिसे पाठकों का भरपूर प्रतिसाद मिला है। आपका संक्षिप्त साहित्यिक परिचय निम्नानुसार है - उपन्यास - 54 उपन्यास सुप्रसिद्ध उपन्यास - साई - (शिर्डी साईबाबा के जीवन पर आधारित कथा ) मराठी, अङ्ग्रेज़ी, हिन्दी, कन्नड, तमिल, गुजराती व कोंकणी भाषा में अनुवाद युगांत - (भीष्म पितामह के जीवन पर आधारित रोमहर्षक कथा) मराठी, तमिल, हिन्दी एवं अङ्ग्रेज़ी में अनुवादित युगारंभ - (महात्मा फुले व सवितरिबाई फुले के जीवन पर आधारित कथा ) मराठी, कन्नड व अङ्ग्रेज़ी में अनुवादित कथा...
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English Literature – Poetry ☆ Anonymous litterateur of Social Media# 21 ☆ Captain Pravin Raghuvanshi, NM

Captain Pravin Raghuvanshi, NM ☆ Anonymous Litterateur of Social Media # 21 (सोशल मीडिया के गुमनाम साहित्यकार # 21) ☆  Captain Pravin Raghuvanshi —an ex Naval Officer, possesses a multifaceted personality. Presently, he is serving as Senior Advisor in prestigious Supercomputer organisation C-DAC, Pune. He is involved in various Artificial Intelligence and High-Performance Computing projects of national and international repute. He has got a long experience in the field of ‘Natural Language Processing’, especially, in the domain of Machine Translation. He has taken the mantle of translating the timeless beauties of Indian literature upon himself so that it reaches across the globe. He has also undertaken translation work for Shri Narendra Modi, the Hon’ble Prime Minister of India, which was highly appreciated by him. He is also a member of ‘Bombay Film Writer Association’. Captain Raghuvanshi is also a littérateur par excellence. He is a prolific writer, poet and ‘Shayar’ himself and participates in literature fests and ‘Mushayaras’. He keeps participating in various language & literature fests, symposiums and workshops etc. Recently, he played...
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हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ – सलिल प्रवाह # 20 ☆ कहो जीवन की जय ☆ आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’

आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ (आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ जी संस्कारधानी जबलपुर के सुप्रसिद्ध साहित्यकार हैं। आपको आपकी बुआ श्री महीयसी महादेवी वर्मा जी से साहित्यिक विधा विरासत में प्राप्त हुई है । आपके द्वारा रचित साहित्य में प्रमुख हैं पुस्तकें- कलम के देव, लोकतंत्र का मकबरा, मीत मेरे, भूकंप के साथ जीना सीखें, समय्जयी साहित्यकार भगवत प्रसाद मिश्रा ‘नियाज़’, काल है संक्रांति का, सड़क पर आदि।  संपादन -८ पुस्तकें ६ पत्रिकाएँ अनेक संकलन। आप प्रत्येक सप्ताह रविवार को  “साप्ताहिक स्तम्भ – सलिल प्रवाह” के अंतर्गत आपकी रचनाएँ आत्मसात कर सकेंगे। आज प्रस्तुत है  एक भावप्रवण कविता कहो जीवन की जय ) ☆ साप्ताहिक स्तम्भ – सलिल प्रवाह # 20 ☆  ☆ कहो जीवन की जय ☆    धरती माता विपदाओं से डरी नहीं मुस्काती है जीत उन्हें यह मरी नहीं आसमान ने नीली छत सिर पर तानी तूफां-बिजली हार गये यह फटी नहीं अग्नि पचाती भोजन, जला रही अब भी बुझ-बुझ जलती लेकिन किंचित् थकी नहीं पवन बह रहा, साँस भले थम जाती हो प्रात समीरण प्राण फूँकते थमी नहीं सलिल प्रवाहित कलकल निर्मल तृषा बुझा नेह नर्मदा प्रवहित किंचित् रुकी नहीं पंचतत्व निर्मित...
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हिंदी साहित्य – फिल्म/रंगमंच ☆ साप्ताहिक स्तम्भ – हिंदी फिल्मों के स्वर्णिम युग के कलाकार # 19 – महान फ़िल्मकार : के.आसिफ़-1 ☆ श्री सुरेश पटवा

श्री सुरेश पटवा            ((श्री सुरेश पटवा जी  भारतीय स्टेट बैंक से  सहायक महाप्रबंधक पद से सेवानिवृत्त अधिकारी हैं और स्वतंत्र लेखन में व्यस्त हैं। आपकी प्रिय विधा साहित्य, दर्शन, इतिहास, पर्यटन आदि हैं।  अभी हाल ही में नोशन प्रेस द्वारा आपकी पुस्तक नर्मदा : सौंदर्य, समृद्धि और वैराग्य की  (नर्मदा घाटी का इतिहास)  प्रकाशित हुई है। इसके पूर्व आपकी तीन पुस्तकों  स्त्री-पुरुष “, गुलामी की कहानी एवं पंचमढ़ी की कहानी को सारे विश्व में पाठकों से अपार स्नेह व  प्रतिसाद मिला है।  आजकल वे  हिंदी फिल्मों के स्वर्णिम युग  की फिल्मों एवं कलाकारों पर शोधपूर्ण पुस्तक लिख रहे हैं जो निश्चित ही भविष्य में एक महत्वपूर्ण दस्तावेज साबित होगा। हमारे आग्रह पर उन्होंने  साप्ताहिक स्तम्भ – हिंदी फिल्मोंके स्वर्णिम युग के कलाकार  के माध्यम से उन कलाकारों की जानकारी हमारे प्रबुद्ध पाठकों से साझा  करना स्वीकार किया है  जिनमें कई कलाकारों से हमारी एवं नई पीढ़ी  अनभिज्ञ हैं ।  उनमें कई कलाकार तो आज भी सिनेमा के रुपहले परदे पर हमारा मनोरंजन कर रहे हैं । आज प्रस्तुत है  महान फ़िल्मकार : के.आसिफ़ पर आलेख ।) ☆...
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हिन्दी साहित्य – कविता ☆ साप्ताहिक स्तम्भ – स्वतंत्रता संग्राम के अनाम सिपाही -लोकनायक रघु काका-6 ☆ श्री सूबेदार पाण्डेय “आत्मानंद”

श्री सूबेदार पाण्डेय “आत्मानंद” (आज  “साप्ताहिक स्तम्भ -आत्मानंद  साहित्य “ में प्रस्तुत है  एक धारावाहिक कथा  “स्वतंत्रता संग्राम के अनाम सिपाही  -लोकनायक रघु काका ” का अंतिम भाग।)  ☆ साप्ताहिक स्तम्भ – आत्मानंद साहित्य – स्वतंत्रता संग्राम के अनाम सिपाही  -लोकनायक रघु काका- 6 ☆ वो गहननिंद्रा में निमग्न हो गये, काफी‌ दिन चढ़ जाने पर ही चरवाहे बच्चों की‌ आवाजें सुन कर जागे और अगल बगल छोटे बच्चों का‌ समूह खेलते पाया था। उनकी मधुर आवाज से ही उनका मन खिलखिला उठा था और वे एक बार फिर सारी दुख चिंताये भूल कर बच्चों मे‌ बच्चा बनते दिखे। वे मेले से खरीदी रेवड़ियां और बेर फल बच्चों में बाँटते दिखे। तब से वह भग्न शिवालय ही उनका आशियाना बना। अब वे‌ विरक्त संन्यासी का जीवन गुजार ‌रहे थे। उन्हें जिंदगी को एक नये सकारात्मक दृष्टिकोण ‌से देखने का जरिया मिल गया था। एक दिन जीवन के मस्ती भरे क्षणों के बीच उन्हीं खंडहरों में रघूकाका का पार्थिव शरीर मिला। उस दिन सहचरी ढोल सिरहाने पड़ी आँसू बहा...
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सूचना/Information ☆ अभिप्राय ☆ सम्पादक मंडळ ई-अभिव्यक्ति (मराठी) ☆

सूचना/Information  (साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार) ☆ वाचकांचे अभिप्राय ☆ अभिप्राय – 1 मा. श्रीमती उज्ज्वलाताई, संपादक (ई-अभिव्यक्ती - मराठी) नमस्कार , 'ई-अभिव्यक्ती मराठी आवृत्तीचे' मनापासून स्वागत. आजच्या   परिस्थितीत इलेक्ट्रॉनिक माध्यमाचा वापर  करून वाचक आणि लेखक या दोघांनाही आपण एक नवे दालन उपलब्ध करुन दिलंत! वाचन व लेखन यासाठी आपण हाती घेतलेला हा उपक्रम अत्यंत स्तुत्य आहे . तोही मराठी भाषेसाठी असल्यामुळे अभिमानास्पद आहे. छोट्या छोट्या लेखांच्या,गोष्टींच्या तसेच कवितेंच्या रुपातून ई- अभिव्यक्ती मार्फत हे साहित्य सहजपणे अनेकांच्या हातात पोचत आहे. जाता येता; कमी वेळात; कोठेही; सहजपणे वाचता येते. लॉकडाऊनमुळे वाचनालये बंद पडली आहेत. ई-अभिव्यक्ती वाचकांची तहान भागवण्याचे मोठं काम पार पाडत आहे. नवनवीन साहित्यकृती वाचायला मिळत आहेत. एक लेखिका म्हणून मला नवं आधुनिक व्यासपीठ मिळालं आहेच. पण एक वाचक म्हणून मिळणारा आनंद सुद्धा मोठा आहे. अतिशय नेटकेपणाने, काही ओळीतून मांडलेली अभिव्यक्ती  'थोडक्यात समजणे। थोडक्यात समजावणे। मुद्देसुद बोलणे। ही संवाद कला या संत तुकारामांच्या ओवीची आठवण करुन देते. धन्यवाद , सौ. दीपा पुजारी, इचलकरंजी अभिप्राय – 2 मी लिहीत असलेले माझे विचार ह्या माध्यमा मुळे लोकांपर्यंत पोचत आहेत, ह्याचा मला आनंद वाटतो. आमच्या सारख्या नवोदित...
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मराठी साहित्य – कवितेचा उत्सव ☆ तो कोण ☆ सुश्री दीप्ती कुलकर्णी

☆ कवितेचा उत्सव ☆ तो कोण ☆ सुश्री दीप्ती कुलकर्णी ☆  या फुलांना या धरेला गंध तोची कोण देतो तो अनादी सर्वसाक्षी ईश सकला व्यापितो तरुही बोले,पर्ण बोले नाद तो झंकारतो कोण स्पर्शे,तरल तनुला त्या करांनी सुखवितो झोपलेल्या त्या मुकुला गुज स्वप्नी सांगतो दिवस येता,मुग्ध रूपा कोण तोची हसवितो प्राणीमात्रा रूप द्याया सृष्टीकर्मा जागतो आस जैसी,फलित तैसे सत्य हे साकारतो.   © सुश्री दीप्ती कुलकर्णी कोल्हापूर. भ्र. 9552448461 ≈ ब्लॉग संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडळ (मराठी) – श्रीमती उज्ज्वला केळकर/श्री सुहास रघुनाथ पंडित ≈ ...
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मराठी साहित्य – कवितेचा उत्सव ☆ दरवळ ☆ सुश्री निलांबरी शिर्के

☆ कवितेचा उत्सव ☆ दरवळ ☆ सुश्री निलांबरी शिर्के ☆  डोक्यावर जडभार कडेवर छोटे पोर पावलाच्यापुढे साऱ्या आयुष्याचा घोर   कडेवरच लेकरू उद्या चालाया लागेल शिरावरचाही भार जरा हलका होईल   उरातील स्वप्ने सारी माझ्या बाळात पहाते तळपायीच्या काट्यांची मज जाणीव ना होते   आज देह कष्टविते पोटच्या या गोळ्यासाठी तोच होऊनीया मोठा माझ्या आधाराची काठी   सुशिक्षित लेकराची स्वप्ने कष्टात पहाते स्वप्नपुर्ततेचे हासु मुखी सदा विलसते   हेच ध्येय जगताना सारी संपेल ही वाट माझी अन लेकराची नवी जन्मेल पहाट   त्या सोनेरी प्रकाशी सारे जाई उजळून जगण्यातील कष्ट सारे स्वाभिमाने ये फुलुन   स्वाभिमानाच्या फुलांचा चिरंतन दरवळ आयुष्याचा सुख झरा वाहणार झुळझुळ   © सुश्री निलांबरी शिर्के ≈ ब्लॉग संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडळ (मराठी) – श्रीमती उज्ज्वला केळकर/श्री सुहास रघुनाथ पंडित ≈ ...
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