सुश्री मंजिरी “निधि”
(बड़ोदा से सुश्री मंजिरी “निधि” जी की गद्य एवं छंद विधा में विशेष अभिरुचि है और वे साथ ही एक सफल महिला उद्यमी भी हैं।
आज प्रस्तुत है आपका आलेख ‘परशुराम जी – १‘।)
☆ मंजिरी साहित्य # २५ ☆
आलेख – परशुराम जी – १ ☆ सुश्री मंजिरी “निधि”
जिस हिन्दु धर्म, संस्कृति में हमने जन्म लिया है वह सभी दृष्टि से कृतार्थ धन्य है l इस धर्म ने इस संस्कृति ने जो- जो भी देखा, जिस -जिस का उच्चारण किया, जिस -जिस का अनुभव किया, जो बताया गया उसका वैसा ही प्रचार किया वो विश्व कल्याण हेतु किया l
उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्”l
ये मेरा वो तेरा कहने की जगह हम कहते हैं ये पूरा विश्व ही हमारे लिये एक परिवार के समान है और हमारा भारत देश उस विश्वरूपी परिवार का भगवान घर है l सम्पूर्ण विश्व को जिन्होंने मांगल्य और पवित्रता प्रदान की वही तो हमारी संस्कृति है, वही हमारा सनातन धर्म है l हमारे देश की भूमि पुण्याई की भूमि है l हमारे देश को पवित्र स्थली बनाने के लिये प्रधानता उन सभी सगुण अवतारों की है l इसमें आचार्य, संत, महापुरुष और उस ईश्वरीय सत्ता के सभी अवतार आते हैं l ये सभी एक ही बात कहते हैं, एक ही बात समझाते हैं कि ये सारी वसुंधरा, ये सारा विश्व एक कुटुंब की तरह है l
हम सनातनी इतने सौभाग्यशाली हैं कि हमारी भारत भूमि ने हमारी संस्कृति ने हमारे हिन्दू धर्म ने इस जगत को इतना भर भर के दिया है जिसे किसी तराजू में तोला नहीं जा सकता क्यूंकि वह बेमोल है l
हमारे सनातन में लिखा है कि यदि मानव जीवन को कृतार्थ करना हो तो इन तीन प्रस्थानत्रयी का अभ्यास होना जरूरी होता है
1- वैदिक प्रस्थानत्रयी
2 – पुराणिक प्रस्थानत्रयी
3 – संतो की प्रस्थानत्रयी
1 – वैदिक प्रस्थानत्रयी- इसमें ब्रम्ह सूत्र, दशोपनिषद और भगवदगीता आते हैं l ब्रम्ह सूत्र को न्याय प्रस्थान, दशोपनिषदको श्रुति प्रस्थान एवं भगवदगीता को स्मृति प्रस्थान भी कहा जाता है l ये तीनों ग्रंथ वैदिक प्रस्थानत्रयी के मुख्य स्तम्भ माने जाते हैं l
2 – पुराणिक प्रस्थानत्रयी- इसमें रामायण, महाभारत एवं श्रीमदभागवत आते हैं l
3 – संतो की प्रस्थानत्रयी- उत्तर भारत में कबीर, सूर और तुलसी इनकी प्रस्थानत्रयी है l महाराष्ट्र में ज्ञानेश्वर माउली, एकनाथ, तुकोबा एवं समर्थ रामदास जी की प्रस्थानत्रयी है l दक्षिण में आलवार, नयनार, आचार्य रामानुज, निम्बार्क, वल्लभचार्य आदि l
धर्म जिसके कारण मनुष्य को भौतिक समृद्धि मिलती है साथ में अर्थ का भी लाभ होता है l हिन्दू धर्म है इसीलिये मानव में मनुष्यता बची है l
सगुण अवतार हमारी हिन्दू संस्कृति का महत्वपूर्ण लक्षण है l
मद्वयं भद्वयं चैव ब्रत्रयं वचतुष्टयम् ।अनापलिङ्गकूस्कानि पुराणानि प्रचक्षते
मद्वयं = मत्स्य पुराण, मारकंडेयपुराण
भद्वयं = भागवत पुराण, भविष्य पुराण
ब्रत्रयं = ब्रम्ह पुराण, ब्रम्हवैवर्त पुराण, ब्रम्हाड पुराण
वचतुष्टयम् = वराह पुराण, वायु पुराण, वामन पुराण, विष्णु पुराण
अनापलिङ्गकूस्कानि = अग्नि पुराण, नारद पुराण, पद्म पुराण, लिंग पुराण, गरुड़ पुराण, कूर्म पुराण, स्कन्द पुराण l
ये सब मिलकर अठारह पुराण हैं l
– क्रमशः
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© सुश्री मंजिरी “निधि”
बड़ोदा, गुजरात
≈ संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈







