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(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

🌹– ‘स्वयंभू और तुलसीदास रचित रामकथा’ का विमोचन हुआ –🌹

श्रीराम, भारतीय संस्कृति के शलाका पुरुष हैं। रामकथा कल-कल प्रवाहित होती धारा है। यही कारण है कि भारत में विभिन्न भाषाओं में रामकथा पर आधारित लगभग 300 ग्रंथ हैैं। स्थूल रूप से ये सभी रामायण से अनुप्राणित हैं। आचार्य स्वयंभू का ‘पउमचरिउ’ इनमें अपवाद है। यह जैन दर्शन को केंद्र में रखकर रचा गया है। इसके चलते इस ग्रंथ में वाल्मीकि कृत मूल रामकथा में कई बड़े बदलाव दृष्टिगोचर होते हैं।

इसमें रावण का वध श्रीराम के हाथों ना होकर लक्ष्मण के हाथों कराया गया है। प्रचलित रामकथा के कुछ पात्रों के नाम में परिवर्तन भी इसमें देखने को मिलते हैं। हनुमान जी को ब्रह्मचारी के बजाय गृहस्थ रूप में प्रस्तुत किया गया है। ‘पउमचरिउ’ के रावण का खलनायकत्व भी उसके प्रति सहानुभूति जगाने में सहायक है।

जो भी हो, अपनी-अपनी मान्यता, दर्शन और विश्वास के अनुसार श्रीराम की जीवनगाथा हर मत-मतांतर ने ग्रहण की है। अतः अपने-अपने होकर भी श्रीराम सबके हैं। उदार और सर्वसमावेशी व्यक्तित्व से ही वे श्रीराम हैं।

श्री संजय भारद्वाज

ये उद्गार हिंदी आंदोलन परिवार के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ साहित्यकार श्री संजय भारद्वाज ने व्यक्त किए। वे क्षितिज प्रकाशन द्वारा प्रकाशित डॉ. मृणालिनी शहा और डॉ. लतिका जाधव द्वारा संपादित ‘स्वयंभू और तुलसीदास रचित रामकथा’ पुस्तक के विमोचन के अवसर पर बोल रहे थे। यह पुस्तक मूल रूप से स्व. गजानन नरसिंह साठे के शोध पर आधारित है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पुणे विश्वविद्यालय के जैन अध्यासन के प्रमुख प्रो. के. के. जैन ने कहा कि ‘पउमचरिउ’ में राम चरित को जैन सिद्धांतों के अनुसार ढाला गया है। विभिन्न समाज महापुरुषों को अपने-अपने ढंग से व्यंजित करते हैं। जैन दर्शन में राम वासुदेव हैं, लक्ष्मण नारायण हैं जबकि रावण प्रति वासुदेव है। दोनों महाकाव्य  का तुलनात्मक अध्ययन करते हुए स्वर्गीय डॉ. साठे ने पूर्ण निष्पक्ष भाव से विवेचन किया है।

डॉ. मृणालिनी शाह ने बताया कि अमेरिका में आयोजित एक रिलिजन कॉन्फ्रेंस में पेपर पढ़ने के लिए उन्होंने जैन रामायण चुनी थी। इस विषय पर काम करते हुए उन्हें डॉ. साठे के शोध का संदर्भ मिला। योगायोग से डॉ. साठे, डॉ शहा के समधी के मामा निकले। उनके शोध को पढ़ने के बाद दोनों संपादकों के मन में उसे पुस्तक रूप देने का विचार आया। फलत: इस पुस्तक का जन्म हुआ।

डॉ. लतिका जाधव ने कार्यक्रम का सुचारु एवं सटीक संचालन किया। श्रीकृष्ण नामजोशी ने अतिथियों का स्वागत किया। अभिजीत शहा ने आभार प्रदर्शन किया। साहिल जाधव का विशेष सहयोग रहा। कार्यक्रम में उल्लेखनीय संख्या में पुस्तक प्रेमी श्रोता उपस्थित थे।

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 – क्षितिज ब्यूरो की रिपोर्ट

≈संस्थापक संपादक श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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Latika
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संजय जी,
रामायण की महत्ता का बहुत महत्वपूर्ण वृत्तांत। सार्थक विवेचन के लिए साधुवाद! 🙏