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(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

☆ पुणे पुस्तक जत्रा में संपन्न हिंदी कवि सम्मेलन ☆ साभार – डॉ. प्रेरणा उबाळे ☆
24 वें ‘पुणे पुस्तक जत्रा‘ में हिंदी ‘कवि सम्मेलन‘ मुख्य आकर्षण रहा। ‘पुणे पुस्तक जत्रा‘ में मराठी कार्यक्रमों का पाँच दिनों का शानदार आयोजन हुआ। इस मेले का एक मुख्य आकर्षण ‘हिंदी कवि सम्मेलन‘ था। श्री शिरीष चिटणीस और श्री राजन द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में शरदेंदु शुक्ल, डॉ. प्रेरणा उबाले, महेंद्र माणिक और सुनील जोशी जैसे कवियों ने सहभाग लिया। उन्होंने अपनी सरस और दिलचस्प रचनाओं से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
इस समय केसरी के संपादक निखिल गजेंद्रगडकर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे l साथ ही उत्कर्ष प्रकाशन के प्रमुख सु. वा. जोशी ने इस अवसर पर अपने विचार साझा किये। हिंदी कवि सम्मेलन का जिक्र करते हुए केसरी के संपादक निखिल गजेंद्रगड़कर ने काका हाथरसी की हास्य, राजनीतिक और व्यंग्यात्मक कविताओं को याद किया। उन्होंने वरिष्ठ हिंदी लेखक धर्मवीर भारती की पत्रिका “धर्मयुग” को भी याद किया। उन्होंने कहा कि हिंदी फ़िल्मों और गानों के कारण हिंदी भाषा दुनिया तक पहुंची। इस सम्मेलन में अनुवादक रवीन्द्र गुर्जर, मराठी कवयित्री मृणालिनी कानिटकर, स्वप्निल पोरे, महादेव कोरे भी उपस्थित थे l
आयोजक शिरीष चिटणीस ने कहा कि पुणे पुस्तक मेले में मराठी, हिंदी और अंग्रेजी विषयों पर अलग-अलग व्याख्यान के साथ-साथ एक कवि सम्मेलन भी आयोजित किया जा रहा है और हम आगे भी ऐसा करते रहेंगे। इस मौके पर मराठी और हिंदी साहित्य की एक-दूसरे पर निर्भरता, अनुवाद के महत्व और अलग-अलग भाषाओं के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर विशेष चर्चा हुई। कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्रेरणा उबाळे ने किया।
सम्मेलन में जाने-माने कवियों ने अपनी रचनाएँ पेश कीं और दर्शकों की प्रशंसा पाई।
टीवी और साहित्य की दुनिया में लोकप्रिय कवि शरदेंदु शुक्ल ने अपनी मज़ेदार और व्यंग्यात्मक रचनाओं से पूरे सभागृह को हँसा दिया l वीरतापूर्ण कविता लिखने वाले शुक्ल ने वरिष्ठ कवि माणिक की सलाह पर हास्य-व्यंग्य कविताएं प्रस्तुत करना आरंभ किया। उन्होंने “मरो मरो सरकारी सांड की तरह …” कविता के ज़रिए भ्रष्ट व्यवस्था पर व्यंग्य किया और जंग लगे स्कूटर पर राजनैतिक व्यंग्य और पारिवारिक व्यवस्था पर आधारित कविताएँ पेश करके भी तारीफ़ें बटोरीं।
हिंदी के प्रसिद्ध कवि महेंद्र कुमार माणिक ने मॉडर्न वेडिंग कल्चर, Shaadi.com और मेट्रोपॉलिटन शहरों की जीवन शैली पर हास्य-व्यंग्यात्मक कविताएँ पेश कीं। उन्होंने याद दिलाया कि उनकी पुस्तक वेलेंटाइन की प्रस्तावना मशहूर कार्टूनिस्ट आबिद सुरती ने लिखी थी। साथ ही, उनकी रचना, चिड़ियाघर में जानवरों के बीच बातचीत के ज़रिए इंसानों के बीच नस्लवाद और आतंकवाद पर प्रहार किया।
आयोजक और कवि डॉ. प्रेरणा उबाले ने मनुष्य भावनाओं और सामाजिक मुद्दों पर कविताएँ प्रस्तुत कीं। उन्होंने “कलम कुछ ऐसा लिखना चाहती है”, “अभाव की नज़र”, “मिटता कुछ नहीं ज़िंदगी से”, “विज्ञापन पर अभिनेता जी की मुस्कान देखी” कविताएँ पेश कीं। “आज कलम कुछ ऐसा लिखना चाहती है” कविता से उन्होंने कलम की ताकत पर ज़ोर दिया। “अभाव की नज़र” और “विज्ञान पर अभिनेता जी की मुस्कान देखी” रचनाओं ने समाज में असमानता, गरीबी और आम आदमी के संघर्ष के असली विरोधाभास को उजागर किया।
विभिन्न साहित्य महोत्सव आयोजित करने वाले कवि सुनील जोशी ने प्रेम, प्रकृति और सामाजिक जागृति से संबंधित कविताएँ प्रस्तुत कीं। उन्होंने “मैं तेरे प्रेम में गीत लिख जाऊंगा” पेश की l साथ ही बारिश, बिना इंटरनेट वाला गाँव और पोस्टमैन के लेटर का इंतज़ार कर रहे गाँव की एक भावुकतापूर्ण कहानी थी। उन्होंने संगिनी गीत के माध्यम से नारी शक्ति की भी प्रशंसा की।
इस कवि सम्मेलन में मराठी और हिंदी कविता की संस्कृति का अद्भुत मेल देखने को मिला। पुणे के लोगों से मिले ज़बरदस्त प्रतिसाद को देखते हुए, संयोजकों ने भविष्य में भी ऐसी साहित्यिक और सांस्कृतिक गतिविधियाँ आयोजित करते रहने का संकल्प लिया।
इस सम्मेलन को पुणे पुस्तक जत्रा के पी. एन. आर. राजन और समन्वयक शिरीष चिटणीस ने आयोजित किया था, जो पिछले 24 वर्षों से पुणे में बुक फेयर को सफ़लतापूर्वक आयोजित कर रहे हैं।
साभार – डॉ. प्रेरणा उबाळे
अध्यक्ष, हिंदी विभाग, मॉडर्न महाविद्यालय, शिवाजीनगर, पुणे
संपर्क- 7028525378
≈ श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈