सुश्री इन्दिरा किसलय

☆ कविता ☆ दो क्षणिकाएं ☆ सुश्री इन्दिरा किसलय ☆

[१] – चुनाव

*

चुनाव आते ही

उनके चेहरे

खुशी से खिल गए !

सुनते हैं

वो बंदूक बनाते हैं

रोटी के लिए !!

[२] – विंडो शाॅपिंग

*

मंहगाई का नाम सुनकर

गरीबों का

कलेजा करता है धकधक !

धन्य है सरकार

जिसने विंडो शाॅपिंग का तो

दिया है हक !!

©  सुश्री इंदिरा किसलय 

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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