श्री अनिल कुमार अस्थाना
☆ पुस्तक समीक्षा ☆
☆ ब्रिटेन की सुप्रसिद्ध लोक कथाएं (नानी कहे कहानी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ☆ समीक्षक – श्री अनिल कुमार अस्थाना ☆
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पुस्तक समीक्षा: ब्रिटेन की सुप्रसिद्ध लोक कथाएं (नानी कहे कहानी)
लेखक: विवेक रंजन श्रीवास्तव
☆ प्रेम का मनोविज्ञान -बदलाव की बयार-“कोई नाम न दो” – सुश्री इन्दिरा किसलय ☆
श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव जी द्वारा रचित पुस्तक ‘ब्रिटेन की सुप्रसिद्ध लोक कथाएं (नानी कहे कहानी)’ का अध्ययन करने का सुखद अवसर प्राप्त हुआ। भले ही इन कहानियों का परिवेश मूलतः ब्रिटिश है, परंतु ये सभी कहानियां किसी न किसी रूप में हमारी दादियों द्वारा भारत में सुनाई जाने वाली कथाओं की ही आत्मीय अनुभूति कराती हैं।
लेखक ने विदेशी लोक कथाओं में छिपे उन तत्वों को उकेरा है जो भारतीय जनमानस से गहराई से जुड़ते हैं:
रॉबिन हुड और शेरवुड का जंगल : यह कहानी पूरी तरह से भारतीय ऐतिहासिक परिवेश से मेल खाती प्रतीत होती है। यह उस कालखंड का स्मरण कराती है जब पहले मुगल और फिर ब्रिटिश शासक जनता से जबरन लगान वसूलते थे। इसके साथ ही, यह प्रसंग बरबस ही इस बात की याद दिलाता है कि कैसे भारत शासन ने जमींदारी प्रथा को समाप्त कर ग्रामीण जनता को इस शोषण से बड़ी राहत दिलवाई थी।
राजा आर्थर और जादुई तलवार: यह कथा भारतीय महाकाव्य महाभारत के उस गौरवशाली प्रसंग की याद दिलाती है, जहां अर्जुन मछली की आंख पर अचूक निशाना लगाते हैं।
वर्तमान परिदृश्य में, यह पुस्तक आज की युवा पीढ़ी और बच्चों को अंतर्राष्ट्रीय कहानियों से परिचित कराने का एक अत्यंत सार्थक माध्यम है।
इस पुस्तक की विषयवस्तु से प्रेरित होकर, मैंने यह निर्णय लिया है कि मैं कल्याण में रह रही अपनी 4 वर्षीय भांजी ‘अन्वी’ को ये बाल-कहानियां अवश्य सुनाऊंगा।
विदेशी लोक कथाओं को इतने सहज और ग्राह्य रूप में प्रस्तुत करने के लिए लेखक श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव जी को हार्दिक बधाई।
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© श्री अनिल कुमार अस्थाना
जबलपुर
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈






