श्री प्रदीप शर्मा

(वरिष्ठ साहित्यकार श्री प्रदीप शर्मा जी द्वारा हमारे प्रबुद्ध पाठकों के लिए दैनिक स्तम्भ “अभी अभी” के लिए आभार।आप प्रतिदिन इस स्तम्भ के अंतर्गत श्री प्रदीप शर्मा जी के चर्चित आलेख पढ़ सकेंगे। आज प्रस्तुत है आपका आलेख – “बात निकलेगी तो।)

?अभी अभी # १०१७ ⇒ आलेख – बात निकलेगी तो ? श्री प्रदीप शर्मा ?

दूर तलक जाएगी ! जब भी बात निकलती है, तो दूर तलक ही जाती है ! क्यों जाती है कितनी दूर तलक जाती है, बीच में रुक क्यों नहीं जाती, किसी को पता नहीं। इसलिए बात को अक्सर दूर तलक जाने ही नहीं दिया जाता है। या तो उसे रोक दिया जाता है, या बात को बदल दिया जाता है। बात का बतंगड़ ना बने, इसलिए कभी कभी तो बात को ही दफन कर दिया जाता है।

बहुत से ऐसे लोग हैं जो यह कहते नहीं अघाते कि मैं भी मुँह में ज़बान रखता हूँ। यह एक चेतावनी होती है कि जब भी यह ज़बान चलेगी, मुँहतोड़ जवाब देगी।इसलिए समझदार लोग सलाह देते हैं, उसके मुँह मत लगना।।

बातों से ही पता चलता है, भारत कभी सोने की चिड़िया था, यहाँ रामराज्य था। एक ऐसा भी राजा था, जो कुबेर तो ठीक, शनि समेत सभी नव-ग्रहों को अपने यहाँ बंदी बनाकर रखता था, लेकिन जब उसके ग्रह खराब चले तो एक सीता माता के हरण से लंकापति का खेल खत्म हो गया।

इस रामराज्य से उस रामराज्य के बीच बहुत कुछ घट गया। बात निकलेगी तो मुगल शासन और अंग्रेज़ी राज तक जाएगी। किसे मालूम था कि आज़ादी और बँटवारे के चलते गाँधी-नेहरू की बन आएगी। गाँधी ईश्वर-अल्लाह को एक साथ प्यारे होंगे, और वशवाद की जड़ें और मज़बूत हो जाएंगी।।

राजनीति की जब बात निकलती है गाँधी-नेहरू तलक अवश्य जाती है। फिल्मों की बात राजकपूर, दिलीप देव तक, फिल्मी गायकों की बात सहगल, रफी, मुकेश, किशोर तक, और फिल्मी गीतकारों की बात साहिर, शैलेन्द्र, हसरत और घूम फिरकर आनंद बख्शी तक ज़रूर पहुँच जाएगी। फिल्मी सङ्गीत का जब ज़िक्र होगा तो शंकर जयकिशन, नौशाद, मदनमोहन, सचिन देव और राहुल देव बर्मन से होती हुई लक्ष्मी प्यारे तक अवश्य जाएगी।

बात के दूर तलक जाने के अगर कुछ फायदे हैं, तो नुकसान भी ! इसे स्थानीय भाषा में कहते हैं, रहने दो, मुँह मत खुलाओ। इस चेतावनी के बाद मुँह बिना किसी आग्रह अथवा अनुग्रह के, अपने आप खुल जाता है। सभी राज़ फाश हो जाते हैं, सभी पर्दे, बेपर्दा और सभी लिहाज तार तार हो जाते हैं।।

जिस तरह बंदूक से निकली गोली कभी वापस नहीं आती, दूर तलक निकल गई बात, कई बात पुकारने के बाद भी वापस नहीं आती। कुछ वक्ता भी बात बात में, न जाने कौन सी बात निकाल लेते हैं, और ढील छोड़ देते हैं।

लोग उबासी ले लेकर थक जाते हैं, कुछ बाहर चाय नाश्ता तक कर आते हैं, लेकिन बात वापस नहीं आती। एक समझदार अनुभवी श्रोता संयोजक के कान में मंत्र फूँकता है, माइक का वायर डिस्कनेक्ट कर दो। बात हाँफते हाँफते वापस आ जाती है।

सुबह का वक्त है, बात अभी निकली ही है, ज़्यादा दूर तलक नहीं गई होगी।।

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© श्री प्रदीप शर्मा

संपर्क – १०१, साहिल रिजेंसी, रोबोट स्क्वायर, MR 9, इंदौर

मो 8319180002

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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