श्री प्रदीप शर्मा
(वरिष्ठ साहित्यकार श्री प्रदीप शर्मा जी द्वारा हमारे प्रबुद्ध पाठकों के लिए दैनिक स्तम्भ “अभी अभी” के लिए आभार।आप प्रतिदिन इस स्तम्भ के अंतर्गत श्री प्रदीप शर्मा जी के चर्चित आलेख पढ़ सकेंगे। आज प्रस्तुत है आपका आलेख – “गुड़ और शक्कर…“।)
अभी अभी # १०९२ ⇒ आलेख – गुड़ और शक्कर
श्री प्रदीप शर्मा
गुड़ तो गुणों की खान है। शक्कर के अवगुणों से हम लोग अब भी अनजान हैं। जब भी कोई खुशी का मौका आया, लोग झट से बोल उठते हैं, आपके मुँह में घी-शक्कर! ऐसे मौकों पर किसी को आहत नहीं किया जाता। वह मीठा बोल ही रहा है न, कोई खिला तो नहीं रहा।
शक्कर कोई आसमान से नहीं टपकती! वह भी गुड़ से ही बनती है। गुड़ गन्ने से बनता है। गन्ना खेत में उगता है। बचपन में हम जब शहर के आसपास के गाँवों में जाते थे, तो गन्ने के खेत लहलहाया करते थे और गाँव गाँव में कड़ाहों में गुड़ बनाया जाता था। गुड़ हम वहाँ खा जाया करते थे, और गन्ने घर ले आया करते थे।।
एक समय, हमारे प्रदेश के ही निमाड़ और धार जिले में कई शुगर मिलें थीं। जनता पार्टी के राज में गन्ने का मूल्य इतना सस्ता हो गया था कि लोग गन्ना बेचने के बजाए जलाने लग गए थे। आज भी महाराष्ट्र प्रदेश गन्ना और शक्कर उत्पादन में अग्रणी है।
शकर को हम चीनी भी कहते हैं। गन्ने को अंग्रेज़ी में भले ही शुगर-कैन कहते हों, गुड़ को अंग्रेज़ी में jaggery कहते हैं, शुगर नहीं। और यह भी जान लीजिए, लोगों को शकर की बीमारी होती है, गुड़ और शहद की नहीं। आज से चीनी कम।।
हर भारतीय रसोई में आज भी गुड़ ज़रूर मिलेगा। हर भारतीय थाली में एक गुड़ का टुकड़ा अवश्य रखा जाता था। प्रसाद में पहले गुड़-चने का प्रचलन था, जो कालांतर में चने-चिरौंजी का प्रसाद कहलाने लगा। आज बच्चे गुड़ को dairy milk के नाम से पहचानते हैं। कई सब्जियों में मिठास के लिए गुड़ का ही प्रयोग होता है, शकर का नहीं। सक्रांति के त्योहार पर तिल गुड़ खाकर मीठा बोला जाता है और ठंड में गुड़ की गजक के क्या कहने।
यही हाल नमक का है। पहले घरों में डल्ले वाला नमक आता था। सरकार आज भी iodized नमक का विज्ञापन कर रही है, जिससे थायरॉइड जैसी बीमारी पर रोक लगती है और दूसरी ओर प्राकृतिक चिकित्सक सफ़ेद नमक को ज़हर घोषित करने पर तुले हैं। टाटा शान से अपना नमक यह कहकर बेच रहा है, कि आपने देश का नमक खाया है। किसी को अपना नमक खिलाकर देशभक्त बनाना कोई टाटा से सीखे और अपने मंदिर में घंटी बजाकर भक्त बनाना बिड़ला मंदिर से।।
शुगर और बीपी दोनों ही बीमारियां शकर और नमक से होती हैं अतः आपसे करबद्ध निवेदन है कि आप भले ही गुड़ खाएँ और गुलगुले से परहेज करें, लेकिन अपने भोजन में नमक और शकर की मात्रा अवश्य घटाएँ।
अंत में एक और काम की बात! जब गुणवत्ता में गुड़, शक्कर से बेहतर है, तो गुरु भी गुड़ ही रहेगा और चेला उससे कमतर, यानी शक्कर। गुरु गुड़ की मिठास है और चेला शक्कर, यानी मधुमेह बीमारी की जड़। किसी ने ग़लत नहीं कहा, अगर गुरु को गुड़ कहा, और चेले को शक्कर। गुरु गुड़ ही रहेगा, और चेला, शक्कर।।
© श्री प्रदीप शर्मा
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